धर्मकांटा
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फिल्म ‘धर्मकांटा’ की एक खास बात यहां और बताते चलते हैं कि फिल्म में जीतेंद्र और राजेश खन्ना के पिता का रोल पहले प्राण करने वाले थे, लेकिन फिर सुल्तान अहमद ने इस रोल के लिए राजकुमार से बात की। राजकुमार को सुल्तान अहमद का बात करने का तौर तरीका बहुत पसंद आया। फिल्म की शूटिंग में एक बार राज कुमार को एक सीन करना था जिसमें उनके हाथ में हीरों का एक हार होता है। सीन के दौरान जब राज कुमार को नकली हीरों का हार पकड़ाया गया तो उन्होंने फेंक दिया। उसके बाद बताते हैं कि सुल्तान अहमद ने अपने घर से असली हीरों का हार मंगाया और तब जाकर शूटिंग आगे बढ़ सकी। इसी के बाद सुल्तान अहमद को राज कुमार ने एक नया नाम दे दिया, जानी मुगल ए आजम।
इस नाम का सुल्तान अहमद पर इतना असर हुआ कि वह इस बारे में गंभीरता से सोचने भी लगे। और, एक दिन उन्होंने एलान कर दिया कि वह एक फिल्म बनाने जा रहे हैं, ‘साहबजादे सलीम अनारकली।’ फिल्म में संगीत नौशाद का ही होना था और इसके लिए उन्होंने दिलीप कुमार और अमिताभ बच्चन से बात भी कर ली थी। लेकिन, फिल्म बाद में बनी नहीं। सुल्तान अहमद ने मिथुन चक्रवर्ती के साथ ‘दाता’ बनाने के बाद भी एक फिल्म घोषित की थी ‘गंगा की धारा’, इसमें वह अनिल कपूर और माधुरी दीक्षित को साइन कर लाए थे। फिल्म में संगीत कल्याणजी आनंद जी का होना था और फिल्म का मुहूर्त भी हुआ जिसमें कमाल अमरोही ने आकर मुहूर्त क्लैप दिया, लेकिन ये फिल्म भी बंद हो गई। आज के बाइस्कोप में इतना ही, कल बात करेंगे एक और ओल्डी गोल्डी की..। सिलसिला जारी है।
बाइस्कोप: 20 साल बाद भी कायम ‘हर दिल जो प्यार करेगा’ का जादू, ऐन मौके पर इसलिए बदल गईं हीरोइनें
(बाइस्कोप अमर उजाला डिजिटल का दैनिक कॉलम है जिसमें हम उस दिन रिलीज हुई किसी पुरानी फिल्म के बारे में चर्चा करते हैं।)