ब्लैक विडोज
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
जी5 की क्रिएटिव टीम की मेहनत इस विदेशी सीरीज के देसी रूपांतरण में साफ दिखती है। कहानी को एक बहुत ही चित्ताकर्षक लोकेशन पर शुरू करके जिन जिन गलियों, मोड़ों और चौराहों से गुजारा गया है, वही कहानी का असली आनंद है। राधिका आनंद को इसके लिए दाद दी जानी चाहिए कि वह कहानी के सेटअप से लेकर इसके विस्तार तक कहीं से भी ये एहसास नहीं होने देती हैं कि ये कहानी देसी नहीं है। कालजयी कहानियों की शायद यही असल पहचान भी होती है कि वह देश, काल और परस्थितियों से परे होती हैं। करीब आधे आधे घंटे के 12 एपीसोड की ये कहानी जहां रुकती भी है वहां बताती है कि इसका दूसरा सीजन भी जरूर बनना चाहिए।