सौदागर
- फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
दिलीप कुमार ने बयां किया किस्सा
दिलीप कुमार के मुताबिक, ‘सुभाष घई ने मुझे दो दोस्तों की एक कहानी का रोचक विचार सुनाया, जिस पर वह काम कर रहे थे। इस दौरान मुझे आभास हुआ कि वह कुछ कहना चाह रहे हैं लेकिन कहने से सकुचा रहे हैं। शायद वह अपनी बात करने के लिए सही मौके का इंतजार कर रहे थे। और, फिर वह पल भी आया जब उन्होंने वह कहा जो उनके मन में घुमड़ रहा था। मुझे याद है कि सुभाष ने काफी नर्वस होते हुए कहा कि आपके दोस्त के रूप में मैं राज कुमार को लेने की सोच रहा था जो फिल्म की कहानी के हिसाब से मेरा दुश्मन बन जाता है। उन्हें शायद ये चिंता थी कि ये नाम सुनकर मुझे गुस्सा आएगा और मैं ये प्रस्ताव नामंजूर कर दूंगा लेकिन मैंने सुभाष की परेशानी ये कहते हुए दूर कर दी कि राज के साथ काम करना मुझे भी अच्छा लगेगा। और फिल्म ‘पैगाम’ की शूटिंग के दौरान हम दोनों ने काफी अच्छा वक्त भी साथ गुजारा था। मैंने सुभाष घई को सलाह दी कि उन्हें इसके बारे में पहले राज से बात करनी चाहिए तो उनके चेहरे पर शरारत भरी मुस्कान तैरी और वह बोले कि उनसे वह पहले ही बात कर चुके हैं और राज मेरे साथ काम करने को तैयार थे।’ राज कुमार अलग थलग रहने वाले इंसान रहे हैं और अकेले रहना उन्हें भाता है। दिलीप कुमार और सायरा बानो की शादी में वह दूल्हा दुल्हन से मिले बगैर ही लौट आए थे। वजह थी, वहां सितारों की पूरी बारात का इकट्ठा होना। राज कुमार ने तब वहां एक तोहफा छोड़ा था जिस पर लिखा था, ‘लाले और लाले की जान के लिए, ये दिन बार बार आए।’