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Bioscope S2: इस सीन को लेकर मनीषा कोइराला का हुआ घई से पंगा, राज कुमार ने किया फिल्म छोड़ने का फैसला

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सौदागर - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
9 अगस्त का दिन वैसे तो पूरे देश के लिए ही ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की शुरुआत का दिन होने के चलते काफी महत्वपूर्ण रहा है लेकिन अभिनेत्री मनीषा कोइराला के लिए ये तारीख उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज रही है। आज ही के दिन 30 साल पहले मनीषा कोइराला की पहली हिंदी फिल्म ‘सौदागर’ रिलीज हुई। इसके दो साल पहले हालांकि वह एक नेपाली फिल्म ‘फेरी भेटउला’ में काम कर चुकी थीं लेकिन उन दिनों के हिंदी सिनेमा के शो मैन सुभाष घई की फिल्म से मुंबई फिल्म इंडस्ट्री में लॉन्च होना उनके लिए बेमिसाल रहा है। और, 9 अगस्त की तारीख मनीषा के लिए इसलिए भी अहम है क्योंकि फिल्म ‘सौदागर’ की रिलीज के पांच साल बाद इसी तारीख को उनकी एक और फिल्म ‘खामोशी द म्यूजिक’ भी रिलीज हुई जिससे नए जमाने के नए शो मैन संजय लीला भंसाली ने अपना फिल्म निर्देशन करियर शुरू किया। फिल्म ‘सौदागर’ में दिलीप कुमार और राजकुमार की जोड़ी फिल्म ‘पैगाम’ के तीन दशक बाद बन रही थी और ये इसी वजह से लंबे समय तक चर्चा में बन रही। फिल्म के मुहूर्त पर अमिताभ बच्चन की मौजूदगी ने भी फिल्म ‘सौदागर’ को खूब चर्चाएं दिलाई।
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सौदागर - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
आमिर खान को ऑफर हुई फिल्म

सुभाष घई मस्त निर्माता और निर्देशक हैं। हीरो बनने आए थे। लेकिन पहले स्टोरी राइटर बने और फिर फिल्म डायरेक्टर। और फिल्म डायरेक्टर भी ऐसे कि उनकी फिल्मों में उन दिनों के बड़े बड़े सितारे काम करने को ललचाते थे। ये तो मैं आपको फिल्म ‘खलनायक’ के बाइस्कोप में ही बता चुका हूं कि इस फिल्म में बल्लू का किरदार करने के लिए आमिर खान ने काफी कोशिशें की थीं, लेकिन कम लोगों को ही पता होगा कि फिल्म ‘सौदागर’ में भी आमिर खान को ही पहले पहल वह रोल ऑफर हुआ था जो बाद में विवेक मुशरान को मिला और उन्होंने भी मनीषा कोइराला के साथ फिल्म ‘सौदागर’ से अपना करियर शुरू किया। वासु का ये किरदार बॉबी देओल से कराने की सुभाष घई की बड़ी इच्छा थी लेकिन धर्मेंद्र अपने बेटे का करियर किसी और की निगरानी में लॉन्च कराना नहीं चाहते थे। वह बॉबी देओल को खुद लॉन्च करने की प्लानिंग शुरू कर ही चुके थे। आमिर और बॉबी देओल के अलावा सुभाष घई ने इस रोल को लेकर सलमान खान से भी बात की लेकिन बात बनी नहीं। दूसरे जिन कम चर्चित कलाकारों ने फिल्म ‘सौदागर’ के इस रोल के लिए ऑडिशन दिए, उनमें शामिल हैं चंद्रचूड़ सिंह और जॉनी वाकर के बेटे नासिर खान।
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सौदागर - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
दिव्या भारती की मासूमियत ने छीना रोल

साल 1989 में नेपाली फिल्म से परदे पर उतरी मनीषा कोइराला के सितारे साथ देते तो उसी साल वह फिल्म ‘अनोखा अंदाज’ से ही हिंदी सिनेमा में भी डेब्यू कर चुकी होतीं लेकिन वह फिल्म अटकी तो मनीषा कोइराला का डेब्यू फिल्म ‘सौदागर’ से हुआ। विवेक मुशरान और मनीषा कोइराला की जोड़ी इस फिल्म में हिट रही और दोनों ने इसके बाद तीन और फिल्मों ‘फर्स्ट लव लेटर’, ‘इंसानियत के देवता’ और ‘सनम’ में भी साथ काम किया। दिलचस्प पहलू यहां ये भी है कि दोनों की फिल्म ‘फर्स्ट लव लेटर’ फिल्म ‘सौदागर’ के पूरी होने से पहले ही तैयार हो चुकी थी लेकिन सुभाष घई अपनी फिल्म से ही मनीषा का हिंदी सिनेमा में डेब्यू चाहते थे लिहाजा उनका लिहाज करते हुए फिल्म ‘फर्स्ट लव लेटर’ के निर्माता ने उनकी फिल्म की रिलीज का इंतजार किया। मनीषा कोइराला को ये फिल्म उस दौर की तमाम दूसरी अदाकाराओं को किनारे कर मिला था। उन दिनों की उभरती सुपरस्टार दिव्या भारती फिल्म ‘सौदागर’ के लिए करीब करीब फाइनल ही हो चुकी थीं लेकिन सुभाष घई का बाद में मन बदल गया, उन्हें लगा कि दिव्या का चेहरा बहुत मासूम है और ये मासूमियत रोल के हिसाब से ठीक नहीं है। पूजा भट्ट, मोना अंबेगांवकर और अन्नू कुत्तूर ने भी इस रोल के लिए ऑडिशन दिया। सुभाष घई की फिल्मों में काम करने वाली हीरोइनों में कम ही ऐसे हैं जिनको लेकर फिल्म मेकिंग के दौरान कोई न कोई किस्सा न बना हो। इस फिल्म में मनीषा और सुभाष घई के कम से कम दो बार जमगकर पंगे हुए। पहली बार तो मनीषा के एक हॉर्स राइडिंग सीन को लेकर कहा सुनी हुई। मनीषा ने पथरीले रास्ते पर घुड़सवारी करने से मना किया तो सुभाष घई का गुस्सा सरेआम उन पर फूटा। बाद में फिल्म रिलीज के दौरान मनीषा का गुस्सा फूटा जब फिर घई ने उन पर कोई टिप्पणी कर दी।

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सौदागर - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
दिलीप कुमार और राज कुमार का संगम

लेकिन, असल कमाल जो सुभाष घई ने फिल्म ‘सौदागर’ में किया था वह था दिग्गज अभिनेताओं दिलीप कुमार और राजकुमार को एक साथ लाना। इससे पहले दोनों ने 1959 में रिलीज हुई फिल्म ‘पैगाम’ में साथ काम किया था। उन दिनों दिलीप कुमार अपने करियर के उनवान पर थे और राजकुमार ने खुद को किसी से कम तुर्रम खां कभी समझा नहीं। शूटिंग के दौरान एक सीन में राजकुमार को अपने सामने खड़े दिलीप कुमार को तमाचा मारने की एक्टिंग करनी थी। लेकिन, सेट पर मौजूद लोग बताते हैं कि उस दिन राजकुमार ने दिलीप कुमार को कसकर असली वाला तमाचा रसीद कर दिया था। किसी तरह ये फिल्म बनी लेकिन दिलीप कुमार ने इसके बाद किसी भी फिल्म में राजकुमार के साथ काम न करने की कसम सी खा ली। कोई तीन दशकों बाद दोनो के साथ काम करने का संयोग बना तो इसलिए क्योंकि तब तक दोनों कलाकार हिंदी सिनेमा में हाशिये पर पहुंच चुके थे। दोनों को एक दमदार फिल्म की दरकार थी। सुभाष घई पहले ही दिलीप कुमार की सेकंड इनिंग्स की दो सुपरहिट फिल्में ‘विधाता’ और ‘कर्मा’ निर्देशित कर चुके थे।
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दिलीप कुमार ने बयां किया किस्सा

दिलीप कुमार के मुताबिक, ‘सुभाष घई ने मुझे दो दोस्तों की एक कहानी का रोचक विचार सुनाया, जिस पर वह काम कर रहे थे। इस दौरान मुझे आभास हुआ कि वह कुछ कहना चाह रहे हैं लेकिन कहने से सकुचा रहे हैं। शायद वह अपनी बात करने के लिए सही मौके का इंतजार कर रहे थे। और, फिर वह पल भी आया जब उन्होंने वह कहा जो उनके मन में घुमड़ रहा था। मुझे याद है कि सुभाष ने काफी नर्वस होते हुए कहा कि आपके दोस्त के रूप में मैं राज कुमार को लेने की सोच रहा था जो फिल्म की कहानी के हिसाब से मेरा दुश्मन बन जाता है। उन्हें शायद ये चिंता थी कि ये नाम सुनकर मुझे गुस्सा आएगा और मैं ये प्रस्ताव नामंजूर कर दूंगा लेकिन मैंने सुभाष की परेशानी ये कहते हुए दूर कर दी कि राज के साथ काम करना मुझे भी अच्छा लगेगा। और फिल्म ‘पैगाम’ की शूटिंग के दौरान हम दोनों ने काफी अच्छा वक्त भी साथ गुजारा था। मैंने सुभाष घई को सलाह दी कि उन्हें इसके बारे में पहले राज से बात करनी चाहिए तो उनके चेहरे पर शरारत भरी मुस्कान तैरी और वह बोले कि उनसे वह पहले ही बात कर चुके हैं और राज मेरे साथ काम करने को तैयार थे।’ राज कुमार अलग थलग रहने वाले इंसान रहे हैं और अकेले रहना उन्हें भाता है। दिलीप कुमार और सायरा बानो की शादी में वह दूल्हा दुल्हन से मिले बगैर ही लौट आए थे। वजह थी, वहां सितारों की पूरी बारात का इकट्ठा होना। राज कुमार ने तब वहां एक तोहफा छोड़ा था जिस पर लिखा था, ‘लाले और लाले की जान के लिए, ये दिन बार बार आए।’
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और, जब राज कुमार को आया गुस्सा

ये सब होने के बाद फिल्म ‘सौदागर’ की शूटिंग शुरू हुई तो वहां सुभाष घई का पूरा समय इन दोनों के अहं को तुष्ट करने में ही बीतता रहा। बताते हैं कि फिल्म की शूटिंग के दौरान जब पहली बार दिलीप कुमार और राज कुमार के एक साथ वाले सीन की शूटिंग का नंबर आया तो राजकुमार पहले ही दिन उखड़ गए। वजह थी दिलीप कुमार के संवादों का उत्तर प्रदेश और बिहार की बोलियों के मिश्रण से लिखा जाना। राज कुमार को लगा कि दिलीप कुमार तो अपने संवादों से उत्तर भारतीयों के दिलों को जीत लेंगे। इस बारे में उन्हें पहले बताया भी नहीं गया था। राज कुमार ने शूटिंग में हिस्सा न लेने और तुरंत मुंबई वापसी का एलान भी सेट पर कर डाला। इसके बाद वहां अफरातफरी मची तो अपने डायरेक्टर की मदद के लिए खुद दिलीप कुमार ने इस बार पहल की। बताते हैं कि इसके बाद सुभाष घई कोई दो घंटे तक राज कुमार के साथ बैठे और उन्हें ये समझाया कि उनका किरदार फिल्म में राजसी ठाट बाट वाला है और दिलीप कुमार को ठेठ गंवई वाला। इसके बाद ही राज कुमार फिल्म की शूटिंग करने को तैयार हुए। दोनों के करियर की फिल्म ‘सौदागर’ आखिरी बड़ी फिल्म रही। इसके बाद दिलीप कुमार फिल्म ‘कलिंगा’ के निर्देशन में व्यस्त हुए। ये फिल्म बनी नहीं। फिर फिल्म ‘किला’ में अभिनय के बाद वह अभिनय की दुनिया से दूर हो गए।
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सौदागर - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
हिट फिल्म का सुपरहिट संगीत

फिल्म ‘सौदागर’ की कहानी दो दोस्तों की कहानी है जिनके बीच अपनी अगली पीढ़ी के बीच प्रेम प्रसंग चलने और फिर एक हत्या हो जाने के चलते दुश्मनी हो जाती है। इनकी तीसरी पीढ़ी भी बिना एक दूसरे के परिवारों को जाने फिर मिलती है। दोनों में प्रेम होता है। कैसे इसके बाद कहानी आगे बढ़ती है और दोस्त से दुश्मन बने ये दोनों फिर आमने सामने होते हैं, इसी के सहारे साढ़े तीन घंटे की ये फिल्म आगे चलती है। फिल्म में गीत आनंद बक्षी के हैं और संगीत लक्ष्मीकांत प्यारेलाल का। मोहम्मद अजीज और सुदेश भोसले का गाया गाना ‘इमली का बूटा बेरी का बेर’ उन दिनों खूब हिट हुआ और फिल्म ‘सौदागर’ का जो गाना सुपरहिट रहा वह था, कविता कृष्णमूर्ति, उदित नारायण, सुखविंदर सिंह और मनहर उधास का गाया गाना, ‘ईलू ईलू..ईलू ईलू,,’।


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चलते चलते...

हिंदी सिनेमा में राज कपूर के बाद शो मैन की पदवी पाने वाले दूसरे निर्देशक बने सुभाष घई ने अपने करियर में डेढ़ दर्जन से ज्यादा फिल्में निर्देशित की हैं। लेकिन, फिल्म ‘सौदागर’ इकलौती फिल्म है जिसके लिए उन्हें फिल्मफेयर का बेस्ट डायरेक्टर का अवार्ड मिला। राज कुमार के अलावा मनीषा कोइराला के साथ बनी ये उनकी इकलौती फिल्म भी है। कम लोगों को ही पता है कि फिल्म ‘सौदागर’ में जैकी श्रॉफ वाला रोल पहले अमिताभ बच्चन को ऑफर हुआ था लेकिन उन्होंने इससे इंकार कर दिया। सुभाष घई की अमिताभ बच्चन के साथ शुरू हुई फिल्म ‘देवा’ भी दोनों की पटरी न बैठ पाने के चलते बंद हो गई थी। इसके बावजूद सितारों की लल्लो चप्पो करने में उस्ताद सुभाष घई फिल्म ‘सौदागर’ के मुहूर्त पर अमिताभ बच्चन को मुख्य अतिथि के तौर पर लाने में कामयाब रहे थे। फिल्म का शानदार प्रीमियर मुंबई में दादर स्थित प्लाजा सिनेमा में हुआ।

(‘बाइस्कोप’ कॉलम में प्रकाशित यह आलेख बौद्धिक संपदा अधिकारों के तहत संरक्षित हैं।)
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