खलनायक
- फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
लौट के घई ‘खलनायक’ पर आए
खैर, हम लौटते हैं अपनी आज के बाइस्कोप की फिल्म ‘खलनायक’ की तरफ। सुभाष घई तब तक हिंदी सिनेमा के नए शो मैन घोषित हो चुके थे। ‘हीरो’, ‘कर्मा’, ‘राम लखन’, ‘सौदागर’ उनकी कंपनी की बैक टू बैक ब्लॉकबस्टर फिल्में थीं और सुभाष घई का मन हो आया एक हॉलीवुड फिल्म डायरेक्ट करने का। इस सपने को पंख लगाए टेनिस खिलाड़ी अशोक अमृतराज ने। दोनों ने ओमर शरीफ से मुलाकात की और वह भी इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बनने को राजी हो गए। लेकिन, लॉस एंजिलिस से लौटते समय घई का मन बदल गया। उन्हें समझ आ गया कि विदेशी कंपनी में बस एक कामगार बनकर काम करने से अच्छा है अपनी देसी कंपनी का राजा होकर काम करना। घई तब तक सिनेमा और प्रोजेक्ट दोनों बनाने में माहिर थे। राम केलकर उनके पुराने साथी थे, संवाद लेखन के लिए उन्हें कमलेश पांडे जैसे दिग्गज का साथ मिला और तैयार हो गई पूरी पटकथा फिल्म ‘खलनायक’ की।