शूटिंग के दौरान नरीमन ईरानी, अमिताभ बच्चन, चंद्रा बारोट
- फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
पहले हफ्ते ही घोषित कर दी गई फ्लॉप
फिल्म ‘डॉन’ की बॉक्स ऑफिस पर बोहनी उन चंद फिल्मों की तरह ही हुई, जिन्हें रिलीज के पहले हफ्ते में फ्लॉप घोषित कर दिया गया था। अब भले हिंदी फिल्में एक साथ चार हजार स्क्रीन्स तक पर रिलीज होती हैं। चंद्रा के मुताबिक डॉन सिर्फ 120 सिनेमाघरों में पूरे देश में रिलीज हुई थी। इसके कुछ ही दिन पहले अमिताभ बच्चन, शशि कपूर, संजीव कुमार, हेमा मालिनी, राखी, पूनम ढिल्लों और सचिन की फिल्म ‘त्रिशूल’ रिलीज हो चुकी थी। चैनल या डिजिटल मीडिया तो तब था नहीं। हां, अखबार और पत्रिकाएं उन दिनों सत्यजीत रे की फिल्म ‘शतरंज के खिलाड़ी’, राज कपूर की फिल्म ‘सत्यम शिवम सुंदरम’ और प्रकाश मेहरा की फिल्म ‘मुकद्दर का सिकंदर’ के किस्सों से भरी रहती थीं। अमिताभ बच्चन उन दिनों मल्टीस्टारर फिल्में ही ज्यादा किया करते थे। एंग्रीयंग मैन का ठप्पा लगने के बाद ‘डॉन’ उनकी पहली सोलो एक्शन फिल्म थी। ऐसे में चंद्रा बारोट कौन है, कोई पूछता तक नहीं था। चंद्रा बताते हैं, ’किसी काम को शुरू करने के पीछे की नीयत ही उस काम की नियति बन जाती है। ऐसा मेरा पक्का मानना रहा है। हमने ये फिल्म नरीमन ईरानी की मदद करने के लिए बनाई थी। सुनील दत्त के साथ उन्होंने एक फिल्म बनाई थी ‘जिंदगी जिंदगी’, उसके फ्लॉप हो जाने से उनके ऊपर कर्ज काफी बढ़ गया था। कैमरामैन की नौकरी करके वह कर्ज चुका नहीं सकते थे। तो हम सबने मिलकर उनका हौसला बढ़ाया कि वह एक और फिल्म प्रोड्यूस करें ताकि उसके मुनाफे से उनका कर्ज उतारा जा सके। फिल्म ब्लॉकबस्टर हुई। ये और बात है कि फिल्म को बनने में करीब चार साल लग गए। रिलीज से पहले नरीमन ईरानी भी एक हादसे में चल बसे, लेकिन हम लोगों ने फिल्म का सारा मुनाफा ले जाकर उनकी पत्नी सलमा को दे दिया और उन्होंने नरीमन का पाई पाई कर्जा चुका दिया।’