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Bioscope S2: सात फेरों से पहले ही जया ने निभाया सावित्री धर्म, फ्लॉप के जाल से यूं निकाला अमिताभ को

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जंजीर का पोस्टर - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

आपने टेलीविजन या डिजिटल दुनिया में उपलब्ध वीडियोज देखते हुए एक बात पर अक्सर गौर किया होगा। जिस किसी भी कार्यक्रम में अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र साथ साथ होते हैं, अमिताभ बच्चन हर समय धर्मेंद्र के सम्मान में थोड़े झुके से ही रहते हैं। धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन की जोड़ी जब भी बड़े परदे पर बनी, हिट ही रही। ‘शोले’, ‘चुपके चुपके’ और ‘राम बलराम’ की कामयाबी से पहले धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन की कड़ी जुड़ी थी फिल्म ‘जंजीर’ से। जी हां, जिस कहानी के लिए धर्मेंद्र इसके लेखकों सलीम-जावेद को भुगतान कर चुके थे, वह कहानी अगर धर्मेंद्र बिजनौर वाले प्रकाश मेहरा को न देते तो इलाहाबाद वाले अमिताभ बच्चन का तो फिल्म इंडस्ट्री से पैक अप होने ही वाला था। खुद अमिताभ बच्चन ने फिल्म ‘जंजीर’ को लेकर ऐसा ही कुछ कहा था कि अगर ये फिल्म नहीं चली तो वह वापस घर लौट जाएंगे। ऐसा इसलिए कि तब तक अमिताभ बच्चन की 12 फिल्में फ्लॉप हो चुकी थीं। फिल्म ‘जंजीर’ को रिलीज हुए 48 साल पूरे हो रहे हैं तो चलिए आज के बाइस्कोप में इसी फिल्म के किस्से दोहराते हैं।

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जंजीर का एक दृश्य - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
धर्मेंद्र ने तोहफे में दे दी खरीदी हुई पटकथा
फिल्म अभिनेता धर्मेंद्र ने ये कहानी खरीदने के बाद इसे अपनी फेवरिट हीरोइन मुमताज के साथ करने की बात निर्देशक प्रकाश मेहरा से तय की थी। धर्मेंद्र और प्रकाश मेहरा की दोस्ती हुई फिल्म ‘समाधि’ से। फिल्म सुपरहिट रही। इसके पहले का रिकॉर्ड भी प्रकाश मेहरा का दमदार रहा। शशि कपूर के साथ वह 1969 में ही हिट फिल्म ‘हसीना मान जाएगी’ बना चुके थे और संजय खान व फिरोज खान को लेकर 1971 में उन्होंने बनाई सुपरहिट फिल्म ‘मेला’। ‘समाधि’ में प्रकाश मेहरा ने धर्मेंद्र के साथ आशा पारेख और जया भादुड़ी को लिया था। धर्मेंद्र उन दिनों तीन तीन शिफ्ट्स में फिल्में कर रहे थे और ‘जंजीर की शूटिंग थोड़ा रुककर शुरू करना चाहते थे। प्रकाश मेहरा के सामने समस्या ये थी कि सुनील दत्त और राखी वाली उनकी पिछली फिल्म ‘आन बान’ ज्यादा चली नहीं थी और उन्हें ‘जंजीर’ छह महीने के भीतर शूट करके किसी तरह रिलीज कर देनी थी ताकि उनका करियर धीमा न पड़े। पर धर्मेंद्र इसके लिए तैयार नहीं हुए। दरअसल धर्मेंद्र और प्रकाश मेहरा के बीच फिल्म ‘जंजीर’ को लेकर बात ‘समाधि’ के समय से ही चल रही थी। पं. मुखराम शर्मा की लिखी ‘समाधि’ की कहानी धर्मेंद्र को इतनी पसंद आई थी कि वह यह फिल्म करने के बदले ‘जंजीर’ में पैसा लगाने को भी तैयार हो गए थे।
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जंजीर का एक दृश्य - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
प्राण ने की अमिताभ की सिफारिश
आपको पता ही होगा कि ये फिल्म देव आनंद से लेकर राजकुमार और दिलीप कुमार तक का चक्कर लगाकर अमिताभ बच्चन की झोली में गिरी। देव आनंद को फिल्म में अपने ऊपर चार पांच गाने चाहिए थे, प्रकाश मेहरा इसके लिए तैयार नहीं हुए। राजकुमार चाहते थे फिल्म मद्रास में शूट हो। प्रकाश मेहरा ने अपनी कहानी का शहर बदलने से इंकार कर दिया। दिलीप कुमार को तो फिल्म के हीरो का किरदार ही नहीं जमा। अमिताभ बच्चन की एक फिल्म उन्हीं दिनों रिलीज हुई थी ‘बॉम्बे टू गोवा’। फिल्म ‘ज़ंजीर’ में धर्मेंद्र, मुमताज के अलावा जो तीसरे कलाकार साइन हुए थे, वह थे प्राण। प्राण ने ही प्रकाश मेहरा को फिल्म का वो फाइटिंग सीन देखने की सलाह दी, जिसमें अमिताभ चुइंग गम चबाते हुए शत्रुघ्न सिन्हा की पिटाई करते हैं। प्रकाश मेहरा ने फिल्म देखी। अमिताभ बच्चन उन्हें जंच गए। इधर वह अमिताभ बच्चन को साइन करके आए, उधर मुमताज ने ये फिल्म ये कहते हुए छोड़ दी कि वह शादी करने की योजना बना रही हैं और शूटिंग के लिए तारीखें नहीं दे सकतीं। हालांकि उन्होंने फिल्म छोड़ी थी अमिताभ बच्चन के साथ अपनी एक और फिल्म ‘बंधे हाथ’ का हश्र देखकर। जब अमिताभ बच्चन के साथ फिल्म करने को कोई हीरोइन तैयार नहीं हुई तब जया भादुड़ी की फिल्म में एंट्री हुई।

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जंजीर का एक दृश्य - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
एंग्री यंगमैन के गुस्से की कड़ियां
फिल्म ‘ज़ंजीर’ में सलीम खान ने विजय खन्ना का किरदार ऐसा गढ़ा, गुस्सा जिसके पूरे जिस्म में सुलग रहा था। वह न किसी से बोलता था। न मुस्कुराता था और न ही ज्यादा किसी से मिलता जुलता था। दीवाली की रात एक हाथ में घोड़े वाला ब्रेसलेट पहने एक अपराधी के हाथों अपने माता पिता खो चुका विजय मनोवैज्ञानिक रूप से बचपन से ही भीतर भीतर घुटता रहता है। बड़ा होकर जब वह पुलिस की नौकरी करता है तो भी ज्यादा तीन पांच नहीं सुनता। जुए के अड्डे चलाने वाले शेर खान से उसका पंगा होता है तो वह वर्दी वाला ताना मार देता है। फिर विजय सादी वर्दी में शेर खान के इलाके में आता है और ये लड़ाई फिर दोस्ती में बदल जाती है। शेर खान गैरकानूनी काम छोड़ गैरज का काम करने लगता है और कहानी में ट्विस्ट आता है अमिताभ बच्चन के रिश्वतखोरी के आरोप में निलंबित होने से। इस संकट के समय माला उसकी मदद करती है। शेरखान भी साथ आता है। और, तेजा का खात्मा होता है।
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अजीत - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
असली डॉन से मिले अजीत
इस फिल्म में मशहूर अभिनेता अजीत ने तेजा का किरदार किया। हामिद अली खान के नाम से बचपन गुजारने वाले अजीत की परवरिश नवाबी अंदाज में हुई क्योंकि वालिद उनके हैदराबाद के निजाम के यहां काम करते थे। इस फिल्म के लिए जब अजीत विलेन बने तो उन्होंने प्रकाश मेहरा से पूछा कि क्या कभी उन्होंने असल जिंदगी के माफिया डॉन से मुलाकात की है। उन्होंने बताया कि असल जिंदगी के ये बड़े बड़े डॉन कभी चीखते चिल्लाते नहीं हैं। उनका सर्द लहजा ही काम कर जाता है। और, ऐसे ही इंदौर के एक डॉन का पता सलीम खान को भी मालूम था। सलीम और अजीत दोनों मिले। फिल्म की शूटिंग शुरू होने से पहले अजीत ने लंबा वक्त इस शख्स के साथ गुजारा और उसके तौर तरीके सीखे। फिल्म में शेर खान का किरदार करने वाले प्राण ने भी इस फिल्म के लिए काफी कुछ तैयारियां कीं। फिल्म में उनका जो गेटअप है, वह उनका खुद का तैयार किया हुआ है। प्राण ने अपनी एक फिल्म का गेटअप कभी किसी दूसरी फिल्म में रिपीट नहीं किया। अगर लुक एक जैसा हुआ तो वह बोली बदल लेते थे। फिल्म ‘ज़ंजीर’ को बनाने में भी प्राण का ही सबसे बड़ा योगदान रहा। प्राण ने प्रकाश मेहरा का साथ नहीं छोड़ा ये इसके बावजूद कि इस फिल्म को छोड़ने पर मनोज कुमार ने उन्हें दो फिल्में देने का लालच भी दिया था। प्राण जुबान के पक्के इंसान आखिर तक रहे। (यहां प्राण के गाने वाला फोटो ही लगाएं)

https://www.youtube.com/watch?v=7KIcWTV3MME
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जंजीर पोस्टर - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
गीत हिट, संगीत सुपरहिट
फिल्म में मन्ना डे का गाया ये गाना और लता मंगेशकर व मोहम्मद रफी का गाया गाना, ‘दीवाने हैं दीवानों का न घर चाहिए…’, सुपरहिट गाने रहे अपने समय के। इस दोगाने में तो गाने के गीतकार गुलशन बावरा खुद नाच रहे हैं हारमोनियम बजाते हुए। फिल्म ‘ज़ंजीर’ में कुल पांच गाने हैं। इनमें से तीन गाने तो सुपर डुपर हिट रहे। चौथा गाना ‘दिलजलों का दिल जला के’ भी खूब बजा जिसे लिखा था फिल्म के निर्देशक प्रकाश मेहरा ने। फिल्म ‘ज़ंजीर’ में संगीत दिया था कल्याणजी आनंद जी ने। फिल्म के गाने रेडियो पर तो खूब बज रहे थे लेकिन इनके रिकॉर्ड्स ढूंढने में लोगों को खूब परेशानी हुई। गानों के कैसेट्स बनने भी तब बस शुरू ही हुए थे भारत में और कहते हैं कि उसी साल रिलीज हुई एक और सुपरहिट फिल्म के संगीतकारों ने बाजार से फिल्म ‘ज़ंजीर’ के सारे रिकॉर्ड्स और कैसेट्स उठवा लिए थे। फिल्म ‘ज़ंजीर’ के लिए अमिताभ बच्चन को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फिल्मफेयर पुरस्कार नामांकन भी मिला लेकिन ये अवार्ड उस साल गया ऋषि कपूर की झोली में फिल्म बॉबी के लिए। कैसे उनको ये पुरस्कार मिला था, इसका खुलासा वह खुद अपनी आत्मकथा में कर चुके हैं। अमिताभ बच्चन को इसी साल फिल्मफेयर बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का पुरस्कार मिला था फिल्म ‘नमक हराम’ के लिए। अमिताभ बच्चन तब से लेकर अब तक तमाम फिल्मफेयर अवार्ड जीत चुके हैं बेस्ट एक्टर के। बॉबी के लिए जहां ऋषि कपूर सबसे कम उम्र के फिल्म फेयर पुरस्कार विजेता बने, वहीं अमिताभ बच्चन सबसे ज्यादा उम्र में फिल्मफेयर बेस्ट एक्टर अवार्ड जीतने का रिकॉर्ड बना चुके हैं।

https://www.youtube.com/watch?v=NvXxswiQ880
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जंजीर की पूरी टीम - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

प्राण के नाम पर ही बिकी थी ज़ंजीर
फिल्म ‘ज़ंजीर’ को हिंदी सिनेमा की ट्रेंड सेटर फिल्म इस लिहाज से माना जाता है कि ये फिल्म उस दौर में बनी जब हीरो परदे पर सिर्फ इश्क करता दिखाई देता था। अपने आसपास समाज में हो रहे भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और अऱाजकता से वह लड़ता भी था तो बीच बीच में लौटकर अपनी माशूक के पास जरूर आ जाता था। लेकिन, यहां इस फिल्म में उसे बाकी दुनिया से कुछ लेना देना ही नहीं है। अपना घर तोड़ने की हद तक जाकर विजय खन्ना जमाने से भिड़ जाता है। एक बुजुर्ग के हाथ की खाली बोतल और उसके तीन बेटों की जहरीली शराब से मौत उसे चैन से जीने नहीं देती। फिल्म को समाज की सच्चाई से जोड़ने की ये कोशिश ही फिल्म ‘ज़ंजीर’ की कामयाबी का असली राज है। कुछ राज़ फिल्म के ऐसे भी हैं जो अमिताभ बच्चन को भी बहुत बाद में पता चले। फिल्म का कलकत्ता में प्रीमियर हुआ तो वहां इकट्ठा हुजूम प्राण की जै जैकार कर रहा था। फिल्म के वितरकों ने इसका प्रचार ही प्राण की फिल्म के तौर पर कर रखा था। इसे देख अमिताभ की आंखें नम हो आईं। प्रकाश मेहरा ने तब अमिताभ का कांधा दबाया और कहा, पिच्चर खत्म होने दो यही लोग थोड़ी देर में तुम्हारी जै जैकार करते दिखेंगे। हुआ भी यही। फिल्म कलकत्ता में तो चल निकली थी लेकिन फिल्म के कलाकार जब बंबई लौटे तो यहां मामला शांत था। बंबई में फिल्म ने रफ्तार पकड़नी शुरू की रविवार से। प्रकाश मेहरा उस दिन बांद्रा पश्चिम स्थित थिएटर गेटी गैलेक्सी के सामने से गुजरे तो वहां उन्हें हाउसफुल का बोर्ड लगा दिखा और टिकटें ब्लैक में बिकती दिखीं। सोमवार से फिल्म ने रफ्तार पकड़ी और ऐसी पकड़ी की आज तक हिंदी सिनेमा की कल्ट फिल्म मानी जाती है।

https://www.youtube.com/watch?v=agfiN_Y49WI

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जंजीर का पोस्टर - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
चलते चलते...
11 मई 1973 को फिल्म रिलीज हुई। इसकी कामयाबी मनाने अमिताभ और जया विदेश जाना चाहते थे। दोनों को घर वालों की इसके लिए मंजूरी भी मिल गई लेकिन 3 जून 1973 को शादी करने के बाद। 48 साल बाद इस फिल्म के कलाकारों में सिर्फ अमिताभ बच्चन ही अब तक सिनेमा में नियमित काम कर रहे हैं। अमिताभ बच्चन की फिल्म ‘ज़ंजीर’ के तमिल रीमेक में एम जी रामचंद्रन और तेलुगू रीमेक में एन टी रामाराव लीड रोल कर चुके हैं। फिल्म के मलयालम रीमेक के हीरो थे जयन। राम चरण तेजा ने साल 2013 में इस फिल्म का हिंदी और तेलुगू में मॉडर्न वर्जन प्रियंका चोपड़ा के साथ बनाने की कोशिश की और ये दोनों फिल्में ‘राम गोपाल वर्मा की शोले’ की तरह फ्लॉप रहीं।

(‘बाइस्कोप’ कॉलम में प्रकाशित यह आलेख बौद्धिक संपदा अधिकारों के तहत संरक्षित हैं।)
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