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Bioscope S2: मिस वर्ल्ड व मिस यूनीवर्स के मुकाबले में हुई माधुरी की एंट्री, भंसाली बन गए संगीतकार

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देेवदास - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
ये उन दिनों की बात है जब हिंदी सिनेमा और अंडरवर्ल्ड के रिश्तों के बीच के रिश्ते आम हुआ करते थे। फिल्म निर्माता भरत शाह को लोग हीरों के बड़े व्यापारी के तौर पर जानते थे। लोगों को ये भी पता चल चुका था कि समंदर किनारे अपना आलीशान महल जैसा घर ‘मन्नत’ बनाने के लिए शाहरुख खान ने भरत शाह से करोड़ों रुपये लिए हैं। और, फिर एक दिन अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम ने एक न्यूज चैनल को फोन करके कह दिया कि निर्देशक संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘देवदास’ में उसका भी पैसा लगा है। हर तरफ हंगामा मच गया। भरत शाह पहले से पुलिस की रडार पर थे। फिल्म ‘चोरी चोरी चुपके चुपके’ का मामला भी गरमा रहा था लेकिन किसी तरह भरत शाह पुलिस को ये समझाने में सफल रहे कि फिल्म ‘देवदास’ में अंडरवर्ल्ड का कोई हिस्सा नहीं है और जो भी पैसा वह पानी की तरह इस फिल्म पर बहा रहे है, वह सब उनका ही है। 19 साल पहले 50 करोड़ रुपये की लागत से बनी फिल्म ‘देवदास’ विश्वसिनेमा के इतिहास का जगमगाता हीरा है। दुनिया भर की तमाम पत्रिकाओं और वेबसाइट्स की बेस्ट फिल्मों में इसका शुमार है। 1917 में प्रकाशित शरत चंद्र के उपन्यास ‘देवदास’ पर बनी ये पहली रंगीन हिंदी फिल्म रही। इसके पहले चार फिल्में और इसी उपन्यास पर बन चुकी थीं, दो बांग्ला में और दो हिंदी में। हिंदी वाली पहली फिल्म के हीरो थे के एल सहगल और दूसरी के दिलीप कुमार।



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देवदास - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
‘देवदास’ का सपना

निर्देशक संजय लीला भंसाली कहते हैं, ‘मैं एक ऐसी कहानी अपनी किशोरावस्था से सुनता आ रहा था जिसमें एक इंसान मोहब्बत में खुद को बर्बाद कर लेता है। मेरे पिता अक्सर ये कहानी मुझे सुनाया करते थे। इस उपन्यास का हर किरदार मेरे जेहन में बसा था और मुझे लगता था कि इस कहानी पर एक शानदार, जानदार और आलीशान फिल्म बननी चाहिए। फिल्म ‘देवदास’ को बनाने का मेरा पहला विचार यहीं से पनपा।’ फिल्म ‘देवदास’ ने ही संजय लीला भंसाली को नई सदी के शो मैन का खिताब भी दिलाया। ये एक ऐसी फिल्म थी जिसे देखने वाले इसकी कहानी तो पहले से जानते थे लेकिन इसके सेट्स, इसके कॉस्ट्यूम्स और इसके फिल्मांकन का तरीका देख उनका मुंह खुला का खुला रह गया।
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देवदास - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
‘देवदास’ से पहले देवदास

कम लोगों को ही पता होगा कि ‘देवदास’ की कहानी पर पहली रंगीन फिल्म बनाने का सपना पहले पहल निर्देशक प्रकाश मेहरा ने देखा था। अमिताभ बच्चन को एंग्री यंगमैन का तमगा दिलाने वाली फिल्म ‘जंजीर’ का निर्देशन करने के बाद प्रकाश मेहरा ने अमिताभ बच्चन को देवदास बनाने की ठानी थी। पारो के रोल में थी शर्मिला टैगोर और चंद्रमुखी का किरदार तब करने वाली थीं हेमा मालिनी। लेकिन, प्रकाश मेहरा को फिल्म की स्क्रिप्ट पसंद नहीं आई। उन्होंने फिल्म निर्माता से इस बारे में बात की। बात लंबी खिंचती चली गई। प्रकाश मेहरा वाली ये फिल्म बंद करके निर्माता ने तब धर्मेंद्र के साथ भी ‘देवदास’ बनाने की योजना बनाई थी, लेकिन ये योजना भी कभी मूर्तरूप न ले सकी। उधर प्रकाश मेहरा तब तक ‘मुकद्दर का सिकंदर’ शुरू कर चुके थे। यहां भी फिल्म दो पाटों में फंसे प्रेमी की ही कहानी कहती है। अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र के बाद देवदास का किरदार निभाने का प्रस्ताव सलमान खान को भी मिला। ये प्रस्ताव संजय लीला भंसाली ही सलमान के साथ लेकर गए थे। सलमान और भंसाली की दोस्ती तब जगजाहिर हुआ करती थी। भंसाली की डेब्यू फिल्म और उसके बाद वाली फिल्म दोनों में सलमान ही हीरो थे। ‘खामोशी द म्यूजिकल’ और ‘हम दिल दे चुके सनम’ के बाद भंसाली एक नयनाभिराम फिल्म बनाना चाहते थे, लेकिन सलमान खान खुद को एक शराबी का रोल करने के लिए तैयार न कर सके।

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देवदास - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
‘देवदास’ की कास्टिंग कथा

सलमान खान की ना के बाद फिल्म ‘देवदास’ में शाहरुख खान आए। और, सिर्फ देवदास के लिए ही नहीं बल्कि फिल्म में चंद्रमुखी और पारो के किरदारों के लिए भी बड़ी उठा पटक हुई। सबसे पहले फिल्म में चंद्रमुखी के रोल के लिए सुष्मिता सेन को साइन किया गया था। बात माधुरी दीक्षित से भी चल रही थी लेकिन तभी माधुरी ने श्रीराम नेने संग ब्याह रचाकर घर बसाने का फैसला कर लिया। भंसाली इससे पहले भी फिल्म को मिस वर्ल्ड और मिस यूनीवर्स के साथ ही बनाना चाहते थे। लेकिन, फिर एक दिन माधुरी का मन बदला और वह फिल्म में चंद्रमुखी का किरदार करने को तैयार हो गईं। इन दोनों के अलावा चंद्रमुखी के रोल के लिए मनीषा कोइराला भी काफी उत्सुक थीं, लेकिन बताते हैं कि ऐश्वर्या राय उनके साथ काम करने को लेकर सहज नहीं हो पा रही थीं। फिल्म ‘देवदास’ के लिए करीना कपूर का भी स्क्रीन टेस्ट हुआ था, और ये इसके बावजूद कि करीना ने भंसाली की पहली दोनों फिल्मों में काम करने से इंकार कर दिया था। ये तो थी फिल्म में तीनों मुख्य किरदारों की कास्टिंग की कहानी लेकिन इससे भी ज्यादा दिलचस्प रही फिल्म में चुन्नी बाबू की कास्टिंग कथा। ये रोल सबसे पहले मनोज बाजपेयी के पास गया था। मनोज बाजपेयी तब तक शाहरुख खान ही बनने के सपने देखा करते थे। उनका तर्क भी यही रहा कि हीरो होकर वह साइड रोल भला क्यों करेंगे। इसके बाद सैफ अली खान से बात हुई और फाइनली ये रोल मिला जैकी श्रॉफ को।
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देवदास - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
‘देवदास’ का सम्मान

फिल्म ‘देवदास’ की रिलीज डेट कई बार बदली। फिल्म का दिल्ली के महादेव रोड स्थित ऑडिटोरियम में तत्कालीन उप प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी के लिए खास शो भी हुआ। कान फिल्म फेस्टिवल ने इस फिल्म का प्रीमियर अपने यहां करने के लिए खास न्यौता भेजा। फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया ने फिल्म ‘देवदास’ को भारत की तरफ से ऑस्कर अवार्ड्स में भी भेजा। यहां अपने देश में फिल्म ने 50वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में पांच पुरस्कार जीते। फिल्म ‘देवदास’ को भारत सरकार ने संपूर्ण मनोरंजन देने वाली फिल्म, सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायिका (श्रेया घोषाल), सर्वश्रेष्ठ कला निर्देशन (नितिन देसाई), सर्वश्रेष्ठ वेशभूषा (नीता लुला, अबु जानी, संदीप खोसला और रेजा शरीफी) और सर्वश्रेष्ठ नृत्य निर्देशन (डोला रे डोला के लिए सरोज खान) के लिए पुरस्कृत किया। फिल्मफेयर पुरस्कारों में तो फिल्म ‘देवदास’ ने पुरस्कारों की लाइन लगा दी। इन पुरस्कारों में इसने कुल 10 पुरस्कार जीतकर फिल्म ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ की बराबरी की। इस रिकॉर्ड को बाद में संजय लीला भंसाली की ही फिल्म ‘ब्लैक’ ने तोड़ा।
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देवदास - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
‘देवदास’ में बहा खून पसीना

फिल्म ‘देवदास’ में शाहरुख खान ने अपने करियर का बेहतरीन अभिनय किया है। कुछ दृश्यों में तो वह वास्तविकता लाने के लिए वाकई नशे में धुत होकर एक्टिंग कर रहे थे और माधुरी दीक्षित और ऐश्वर्या राय ने तो जैसे अपनी जान ही निकालकर इस फिल्म के लिए रख दी। माधुरी ने इस फिल्म में 30 किलो का घाघरा पहनकर भी काम किया है और ऐश्वर्या राय ने कानों के झुमकों के चलते कान फट जान के बावजूद शूटिंग करना जारी रखा। पैकअप होने पर पता चला कि ऐश्वर्या के कानों से तो खून निकल आया है। खून ऐश्वर्या राय ने फिल्म ‘देवदास’ के सेट पर तब भी देखा जब सेट पर मौजूद एक कर्मचारी तेजी से चल रहे पंखे की चपेट में आ गया था। उसका पूरा खून ऐश्वर्या के ऊपर फैल गया था। फिल्म ‘देवदास’ के सेट पर बार बार लगातार हादसे हुए। कभी सेट पर आग लगने से हफ्तों शूटिंग रुकी रही। कभी सेट पर मौजूद कर्मचारी की हादसे में मौत के चलते व्यवधान हुआ पर भंसाली ने हार नहीं मानी। वह लगातार अपनी टीम का जोश बढ़ाते रहे और तमाम मुश्किलों के बावजूद फिल्म पूरी करके माने।
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देवदास - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
‘देवदास’ का दिव्य स्वरूप

फिल्म ‘देवदास’ में वैसे तो हीरो शाहरुख खान ही हैं लेकिन इसे भव्य बनाने में सबसे बड़ा योगदान रहा इसके सिनेमैटोग्राफर बिनोद प्रधान का। आमतौर पर किसी फिल्म के सेट पर 25-30 कमर्चारी ही शूटिंग के समय लगी लाइट्स संभालने का काम करते हैं। लेकिन, बिनोद प्रधान ने इस फिल्म में एक साथ 700 लाइटमेन के साथ काम करने का रिकॉर्ड भी बनाया। चंद्रमुखी और पारो के घरों के सेट्स थे ही इतने आलीशान। करोड़ों की लागत से बने इन घरों में एक सीन में ढाई हजार लाइट्स तक इस्तेमाल हुई हैं। हिंदी फिल्मों की शूटिंग दो या तीन जेनरेटरों से आम तौर पर पूरी हो जाती है। लेकिन, फिल्म ‘देवदास’ की शूटिंग के दौरान एक वक्त ऐसा भी आया जब पूरी मुंबई में हंगामा मच गया था। भंसाली ने उस दिन मुंबई में उपलब्ध सारे जेनरेटर अपने सेट पर मंगा लिए। उस दिन जबरदस्त सहालग थी और लोगों की शादियों में रोशनी तक के लिए जेनरेटर शहर में नहीं बचे। बताते हैं कि उस दिन फिल्म ‘देवदास’ के सेट पर लाइटिंग के लिए 42 जेनरेटर एक साथ चालू किए गए थे। कहीं कांच के टुकडों पर दिन रात काम होता रहता तो कहीं लाइटिंग पर। फिल्म के कॉस्ट्यूम पर भी गजब काम हुआ है। सौ डेढ़ सौ जोड़ियों में आमतौर पर एक हिंदी फिल्म बन जाती है। फिल्म ‘देवदास’ में इसके डिजाइनरों ने करोड़ों रुपये तो सिर्फ कॉस्ट्यूम पर बहा दिए। मिक्स एंड मैच करके बनीं ऐश्वर्या की साड़ियां फिल्म में आठ से नौ गज तक की हैं और उनकी एक एक कॉस्ट्यूम लाखों की रही।

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देवदास - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
‘देवदास’ का दमदार संगीत

और, अब बात फिल्म ‘देवदास’ के म्यूजिक की जो अपने समय का सबसे महंगा म्यूजिक माना जाता है। जानकारी के मुताबिक फिल्म के म्यूजिक राइट्स करीब 12.5 करोड़ रुपये में बिके थे। इस म्यूजिक को बनाने में संजय लीला भंसाली दो ढाई साल तक इतना खोए रहे कि वह खुद ही बाद में संगीतकार बन गए। अपनी पिछली फिल्म ‘हम दिल दे चुके सनम’ के संगीतकार इस्माइल दरबार को ही उन्होंने इस फिल्म में भी लिया और उनसे इतना काम कराया कि आगे फिर कुछ नया कर पाने के लिए इस्माइल के पास कुछ बचा ही नहीं। फिल्म के तकरीबन सारे गाने सुपरहिट रहे। और, फिल्म के संगीत की सबसे बड़ी खोज रहीं गायिका श्रेया घोषाल, जिन्हें भंसाली की मां ने एक दिन एक म्यूजिक रियलिटी शो में लता मंगेशकर का गाया भजन गाते हुए सुना। सिर्फ 16 साल की उम्र में श्रेया को फिल्म ‘देवदास’ में पहला ब्रेक मिला। पहली ही फिल्म में बेस्ट सिंगर का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और फिल्मफेयर पुरस्कार दोनों जीतने वाली वह इकलौती गायिका है। फिल्म की रिलीज से पहले और फिल्म की रिलीज के चार छह महीनों के भीतर देश में सिर्फ फिल्म ‘देवदास’ के गाने ही उन दिनों सुनाई देते थे। श्रेया घोषाल के अलावा फिल्म में कविता कृष्णमूर्ति और उदित नारायण ने भी अपने हुनर का लोहा मनवाया।



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देवदास - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
चलते चलते...

फिल्म ‘देवदास’ अपने नृत्यों के लिए भी खूब याद की जाती है। सरोज खान को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार दिलाने वाला गाना ‘डोला रे डोला’ हिंदी सिनेमा के कालजयी गानों में शुमार होता है। इस गाने की पूरी संरचना बहुत कठिन रही। लेकिन, मास्टरजी की दोनों काबिल शागिर्दों माधुरी दीक्षित और ऐश्वर्या राय ने उनके बताए हर स्टेप को न सिर्फ किया बल्कि जहां दोनों को एक साथ रिदम में गिरना था, वह मुश्किल सीन भी संजय लीला भंसाली की कल्पना के मुताबिक ही दोनों ने सौ फीसदी कर दिखाया। फिल्म में एक गाना ‘काहे छेड़ छेड़े मोहे..’ की नृत्य संचना बिरजू महाराज ने भी रची है।





(‘बाइस्कोप’ कॉलम में प्रकाशित यह आलेख बौद्धिक संपदा अधिकारों के तहत संरक्षित हैं।)
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