सबको पता है कि राजेश खन्ना ने साल 1969 से लेकर साल 1971 तक 15 सोलो हिट फिल्में दीं। अब न तो किसी हीरो की सिर्फ तीन साल में 15 फिल्में रिलीज होने वाली हैं, और न ही ये रिकॉर्ड टूटने वाला है। हां, आयुष्मान खुराना ने बीच में लगातार आधा दर्जन हिट फिल्में लगातार देकर उम्मीद जताई थी लेकिन ‘गुलाबो सिताबो’ तक आते आते उनके नमक का आयोडीन भी हवा में उड़ गया। अब वह दुनिया की सौ प्रभावशाली हस्तियों में तो शामिल हैं, लेकिन हिंदी सिनेमा के प्रभावशाली हीरो कितने बचे हैं, इस पर बहस उनकी अगली फिल्म से जल्द शुरू होने वाली है। राजेश खन्ना और आयुष्मान खुराना दोनों एक ही इलाके के हीरो हैं। दोनों ने कथानक आधारित फिल्में करने का सबक अपनी फ्लॉप फिल्मों से ही सीखा। राजेश खन्ना की गाड़ी जब तक सरपट दौड़ रही थी, रूपेश कुमार जैसे लोग ‘ऊपर आका, नीचे काका’ जैसे जुमले सुनाकर उन्हें चने के पेड़ पर चढ़ा ही रहे थे, खुद वह भी निश्चिंत थे। लेकिन, अमिताभ बच्चन की साल 1973 में हिट हुई फिल्म ‘जंजीर’ ने हिंदी सिनेमा में रोमांस का तंबू समेट दिया। राजेश खन्ना के पास उन्हीं दिनों पहुंचे निर्देशक बासु भट्टाचार्य, जिनके पास कहानी तो लाजवाब थी, पर पैसे नहीं थे। और, राजेश खन्ना के पास पैसे बेहिसाब थे, पर खुद को फिर से साबित करने वाली फिल्म नहीं थी। बस, यहीं से नींव पड़ी हमारे आज के बाइस्कोप की फिल्म ‘आविष्कार’ की।