‘हप्पू की उलटन पलटन‘ में गीतांजलि मिश्रा
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गीतांजलि कहती हैं, ‘‘यह दिवाली मेरे लिए काफी इमोशनल रही। पूरी दुनिया रौशनी के इस त्योहार को हर्षोल्लास के साथ मना रही थी, लेकिन मैं अस्पताल में उनके साथ थी और उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रही थी। दिवाली हमेशा परिवार और अपनेपन का त्योहार रही है, लेकिन मा के बिना घर में सब सूना-सूना लग रहा था। हर दिन उनके साथ बिताते हुए यह महसूस हुआ कि जिंदगी कितनी नाजुक है और हम अपने प्रियजनों को कितना हल्के में ले लेते हैं।”