दक्षिण भारतीय दिग्गज अभिनेता चिरंजीवी का नाम हाल ही में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ है। चिरंजीवी सिर्फ साउथ ही नहीं बल्कि हिंदी पट्टी में भी काफी मशहूर हैं। उन्होंने कई हिंदी फिल्मों में भी काम किया है। बता दें कि 45 वर्षों में अपनी 156 फिल्मों के 537 गानों में 24000 डांस मूव्स करने के लिए उनका नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया है। हाल ही में अभिनेता ने ‘इंडियन फिल्म फेस्टिवल’ में अहा के विशेष फायरसाइड चैट के लिए राजीव मसंद से बातचीत में बताया कि उन्हें किस तरह की फिल्में करनी है, इसकी समझ कब आई।
अभिनेता ने बातचीत के दौरान कहा, मैं बहुत भाग्यशाली हूं कि एफटीआईआई से अभिनय का कोर्स पूरा करने से पहले ही मुझे एक फिल्म में कास्ट कर लिया गया। इससे पहले कि वह रिलीज होती, के. बालचंदर सर जैसे दिग्गज फिल्ममेकर ने मुझे एक फिल्म में कास्ट किया। फिर बापू गरु और के. विश्वनाथ गरु जैसे दिग्गजों के साथ एक फिल्म बनी। अपने करियर के शुरुआती दौर में ही मुझे कुछ बेहतरीन फिल्ममेकर्स के साथ काम करने का सौभाग्य मिला। साथ ही, मैं डांस, एक्शन और अन्य चीजों के जरिए दर्शकों का मनोरंजन करने के अपने हुनर को निखार रहा था। वह मुझे और भी ज्यादा पसंद करने लगे।’ Devara Box Office Collection Day 7: 'देवरा' की कमाई में आई गिरावट, सातवें दिन रही महज इतनी कमाई
मेगास्टार ने आगे बताया कि किस तरह की फिल्मों के लिए उनका दिल धड़कता है। उन्होंने कहा, ‘मेरे प्रशंसक, आम जनता, वह मुझे एक्शन, शानदार डांस जैसी चीजों में देखना चाहते हैं। हालांकि, मेरा दिल चाहता था कि मैं के.बी. सर, भारतीराजा, के.वी. गरु और बापू गरु जैसे दिग्गजों के साथ फिल्में करूं। मैं उलझन में था।’ चिरंजीवी ने अपनी दुविधा के बारे में खुलकर बात की और कहा, ‘चलिए 1983 की बात करते हैं। ‘खैदी’, जिसने मुझे स्टार का दर्जा दिया, उसमें एक गंभीर किरदार था और बेहतरीन डांस सीक्वेंस थे। अगले हफ्ते, मैंने बापू गरु द्वारा निर्देशित ‘मंत्री गारी वियंकुडु’ की। यह एक शरारती किरदार था और यह भी एक बड़ी सफलता थी।’
कई मायनों में अभिनेता का मानना है कि के बालाचंदर की ‘रुद्रवीणा’ उनके करियर में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि थी। उन्होंने कहा, ‘समय बीतने के साथ, मुझे समझ में आया कि काम की संतुष्टि उतनी महत्वपूर्ण नहीं है जितना कि निर्माताओं को उनका पैसा वापस मिलना। उदाहरण के लिए, ‘रुद्रवीणा’ को ही लें। इसने राष्ट्रीय एकता पर ‘सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म’ के लिए ‘नरगिस पुरस्कार’ जीता, इलैयाराजा सर के लिए सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशन, एसपी बालासुब्रमण्यम के लिए ‘सर्वश्रेष्ठ पुरुष प्लेबैक सिंगर’ और कुछ राज्य पुरस्कार भी जीते। एक अभिनेता के रूप में भी मुझे आलोचकों की प्रशंसा मिली, लेकिन, एक निर्माता के रूप में, यह एक बड़ी विफलता थी। ऐसी स्थिति मैं नहीं चाहता था। मेरे पास अपने निर्माताओं के प्रति भी जिम्मेदारी है। इसलिए, मैं धीरे-धीरे कमर्शियल फिल्मों की ओर झुका।’