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Sonalee Kulkarni Interview: आज तो हर कोई यूट्यूब चैनल खोलकर रिपोर्टर बन बैठा है, जानिए क्यों कहा ऐसा सोनाली ने

Mon, 19 Feb 2024 12:53 PM IST
आकांक्षा गुप्ता अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

सार

'नटरंग' जैसी मराठी फिल्म से चर्चित हुई अभिनेत्री सोनाली कुलकर्णी को लोगों ने नाम बदलने की भी सलाह दी, लेकिन सोनाली ने अपना नाम नहीं बदला।
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सोनाली कुलकर्णी - फोटो : अमर उजाला
मराठी और हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में सोनाली कुलकर्णी नाम की दो अभिनेत्रियां हैं। अक्सर इनके नाम को लेकर सिर्फ दर्शकों को ही नहीं बल्कि पत्रकारों को भी भ्रम होता रहता है। 'नटरंग' जैसी मराठी फिल्म से चर्चित हुई अभिनेत्री सोनाली कुलकर्णी को लोगों ने नाम बदलने की भी सलाह दी, लेकिन सोनाली ने अपना नाम नहीं बदला। सोनाली कुलकर्णी ने हिंदी में 'ग्रैंड मस्ती' और 'सिंघम रिटर्न्स'  जैसी फिल्में की हैं। हाल ही में उनकी पहली मलयालम फिल्म 'मलाईकोट्टई वालिबन'  रिलीज हुई, जिसमें उन्होंने सुपरस्टार मोहनलाल के साथ काम किया। अपने अभिनय को मिल रहे विस्तार से सोनाली काफी खुश हैं, उनकी इस खुशी में अमर उजाला भी शामिल हुआ।
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सोनाली कुलकर्णी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
मोहनलाल जैसे दिग्गज सितारे के साथ फिल्म 'मलाईकोट्टई वालिबन' में मौका कैसे मिला?
मेरी मराठी फिल्म 'नटरंग' के गाने 'अप्सरा आली' की वजह से ही मुझे ये मौका मिला। निर्देशक लिजो जोस पेलिसेरी ने मेरा वह गाना देखा था। इस फिल्म में मेरी भूमिका एक डांसर रंगपट्टिनम रंगरानी की है। लिजो जोस पेलिसेरी ने अपनी कास्टिंग टीम को मुझसे संपर्क करने को कहा था। मेरे पास फोन आए तो मुझे लगा कि ऐसे ही कोई मजाक कर रहा है। मलयालम फिल्म इंडस्ट्री से मेरे एक दोस्त सिद्धार्थ मालिक हैं। वह मेरे साथ मराठी फिल्म 'पोस्टर बॉय' में काम कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि लोग तुम्हें ढूंढ रहे हैं, फोन आएगा तो मना मत करना। मराठी फिल्म 'ताराराणी' की शूटिंग की लोकेशन पर ये लोग मुझे मिलने ही पहुंच गए।
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सोनाली कुलकर्णी, मोहनलाल - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

मोहनलाल के साथ कैसे अनुभव रहे?

मैंने उनकी  मलयालम फिल्में 'दृश्यम' और 'दृश्यम 2' देखी हैं। इसके अलावा उनकी कोई भी मलयालम फिल्म नहीं देखी थी। फिल्म 'मलाईकोट्टई वालिबन' में  वह 60 साल की उम्र में अपने सारे एक्शन सीन खुद कर रहे थे। वह प्रशिक्षित नर्तक और मार्शल आर्ट्स जानकार हैं। इस फिल्म की पूरी शूटिंग राजस्थान में हुई है। मलयालम सिनेमा की अब तक की सबसे महंगी फिल्म है। इस फिल्म में मेरा किरदार गांव गांव जाकर नृत्य करता है और मोहनलाल का किरदार गांव -गांव में पहलवानी। इसी यात्रा में हमारी मुलाकात होती है। मोहनलाल सर बहुत बड़े स्टार हैं, लेकिन वह कभी जाहिर नहीं करते हैं कि इतने बड़े स्टार हैं।

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सोनाली कुलकर्णी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

फिल्म में मोहन लाल के साथ पहला सीन क्या क्या था?

मैंने छह महीने से अपने इस सीन और इसके संवादों की तैयारी करके रखी थी। सीन ऐसा था कि मैं मोहनलाल जी को प्रपोज कर रही हूं। उस सीन में सिर्फ मैं ही बोले जा रही थी और मोहनलाल सर हां और न में जवाब दे रहे हैं। फाइनली जब सीन शूट हुआ तो एक ही शॉट में ओके हो गया। मोहनलाल सर बहुत खुश हुए थे उस दिन।

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सोनाली कुलकर्णी, मोहनलाल - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

और, थोड़ा शुरू से समझें तो आपके अभिनय की शुरुआत कैसे हुई हुई?

मेरे पापा और मम्मी दोनों भारतीय सेना में रहे हैं। घर पर सब हिंदी में ही बात करते रहे हैं। 15 साल की उम्र से मैं पुणे में मॉडलिंग करती रही। एक मराठी सीरियल 'हा खेल संचिताचा' के ऑडिशन में मेरा चयन हो गया। मुझे तब मराठी नहीं आती थी। निर्देशक उषा देशपांडे ने मेरा हौसला बढ़ाया। मुझे नसीरुद्दीन शाह और विक्रम गोखले जैसे कलाकारों के साथ इस धारावाहिक काम करने का मौका मिला।  मराठी फिल्मों में मेरी शुरुआत फिल्म 'बकुला नामदेव घोटले' से हुई। निर्देशक रवि जाधव की फिल्म 'नटरंग' से मराठी सिनेमा में मेरी एक अलग पहचान बन गई। 

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सोनाली कुलकर्णी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

सोनाली कुलकर्णी नाम से पहले से ही भारतीय सिनेमा में स्थापित अभिनेत्री रही हैं, जब आपने एक्टिंग में करियर बनाने का फैसला किया तो किसी ने नाम बदलने की सलाह नहीं दी ? 

कई लोगों ने नाम  बदलने का सुझाव दिया। लेकिन, निर्देशक उषा देशपांडे ने मुझे सुझाव दिया कि नाम बदलने की क्या जरूरत है? तुम्हारे काम से तुम्हारा नाम होगा। तुमने इंडस्ट्री में आने के बाद थोड़े ही अपना नाम रखा है, वह नाम तो पहले से ही है। तुम्हारा अगर काम अच्छा होगा तो तुम अपना वजूद बना लोगी। अगर काम अच्छा नहीं होगा तो कोई भी नाम रख लो करियर तो नहीं बनेगा। फिर मैंने सोचा कि यह सही बात है। हम दोनों में एक पीढ़ी का फर्क है। वह बहुत अलग दिखती हैं, उनके स्किल्स बहुत अलग हैं।

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सोनाली कुलकर्णी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
फिर भी नाम को लेकर कन्फ्यूजन तो लोगों में रहा ही होगा?
ऐसा कई बार हुआ है कि सोनाली जी को  समझकर लोग मुझे फोन कर देते हैं। कई बार इंटरव्यू के दौरान पत्रकार भी भ्रमित रहते हैं। नए पत्रकार तो यहां तक बोलते हैं कि बचपन में मैंने आपकी फिल्म 'दिल चाहता है' देखी है। मुझे बड़ी हैरानी होती है। जब कुछ नए रिपोर्टर ऐसी बात करते हैं। आज तो हर कोई यूट्यूब चैनल खोलकर रिपोर्टर बन बैठा है । हमारी मराठी फिल्म 'तमाशा' इसी विषय पर आधरित है कि भारत में रिपोर्टिंग कैसी होती है? सुशांत सिंह राजपूत और उनकी मैनेजर दिशा सालियान की मौत के बाद मीडिया में जो सर्कस चला उसी विषय पर फिल्म बनी थी। 

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सोनाली कुलकर्णी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

हिंदी सिनेमा में 'ग्रैंड मस्ती' और 'सिंघम रिटर्न्स' के बाद आगे क्यों नहीं कोशिश की?

मुझे मराठी फिल्म इंडस्ट्री में जिस तरह की इज्जत और किरदार मिले वैसे किरदार हिंदी सिनेमा में नहीं मिल रहे थे। हिंदी फिल्मों में छोटे-मोटे किरदार के लिए खूब बुलावे आते रहते हैं, लेकिन वैसे रोल मैं करना नहीं चाह रही थी। मैं चाहती हूं कि हिंदी फिल्मों में भले ही छोटा किरदार हो, लेकिन वह कहानी का एक अहम हिस्सा रहे।

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सोनाली कुलकर्णी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

अपने अभिनय करियर को लेकर माता-पिता का कितना सहयोग रहा?

मेरे पापा मनोहर कुलकर्णी मेरे एक्टिंग करियर के खिलाफ थे। मेरी मां सविंदर कुलकर्णी पंजाबी हैं। पंजाबियों में नाचने गाने का कल्चर होता है। मम्मी की इच्छा थी कि एक्टिंग के प्रोफेशन में कुछ करूं। मम्मी ही हर जगह मुझे स्कूटर पर आडिशन पर लेकर जाती थी। मेरी मम्मी भी सेना में ही थीं लेकिन जब मेरी फिल्म 'नटरंग' रिलीज हुई तब उन्होंने जॉब छोड़ दी। 

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