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Vipul A Shah Exclusive: शेफाली शाह का सनसनीखेज बैंक डकैती कनेक्शन, ‘बस्तर’ के लिए जान पर खेलकर हमने जुटाया सच

सार


 
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विपुल अमृतलाल शाह - फोटो : अमर उजाला
हिंदी सिनेमा में लागत के हिसाब से इस साल सबसे ज्यादा मुनाफा कमाने वाली और स्त्री प्रधान फिल्मों में अब तक की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ के लेखक, रचनात्मक निर्देशक और निर्माता विपुल अमृतलाल शाह इन दिनों ‘बस्तर’ बना रहे हैं। बतौर निर्देशक अपनी अगली फिल्म की तैयारियां भी वह शुरू कर चुके हैं। विपुल से 'अमर उजाला' के सलाहकार संपादक पंकज शुक्ल की एक एक्सक्लूसिव मुलाकात।
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द केरल स्टोरी, विपुल अमृतलाल शाह - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
महज 15 करोड़ रुपये में बनी फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ के दुनिया भर में 300 करोड़ रुपये कमा लेने की उम्मीद आपको कितनी थी?
मेरे पास ये कहानी तीन साल पहले आई थी। तभी मैंने इसके निर्देशक सुदीप्तो सेन को बता दिया था कि बिना ठोस रिसर्च के मैं ये फिल्म नहीं बनाऊंगा। इसीलिए, निर्माता होने के साथ साथ मैं इस फिल्म से लेखक और रचनात्मक निर्देशक के रूप में भी जुड़ा। मुझे आशा तो थी कि ये फिल्म भारतीय दर्शकों को पसंद आएगी लेकिन फिल्म का विस्तार आम दर्शकों के बीत तब और अधिक हो गया जब इसका जिक्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में किया।
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‘बस्तर’, विपुल अमृतलाल शाह - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अब इसके बाद आप ‘बस्तर’ बना रहे हैं, इसके लिए शोध का काम तो बहुत जोखिम भरा रहा होगा?
जी हां, फिल्म की कहानी लिखने से पहले हम नक्सल प्रभावित इलाकों का दौरा करने कई बार गए। हर बार हमें यही सलाह दी जाती थी कि हम खुले में बिना सुरक्षाबलों के कतई न जाएं। तमाम तरह की सावधानियां हमें इस दौरान बरतनी पड़ीं और इस शोध को पूरा करने के लिए हमने कई बार अपनी जान जोखिम में डाली। हमने जान पर खेलकर इस कथा का सच जुटाया है। ये फिल्म हम अगले साल अप्रैल में रिलीज कर रहे हैं।

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‘कमांडो’, विपुल अमृतलाल शाह - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
‘कमांडो’ फ्रेंचाइजी के बाद आपके प्रोडक्शन हाउस की ये एक नई फ्रेंचाइजी विकसित हो रही है, फ्रेंचाइजी फिल्मों का हिंदी सिनेमा में कैसा भविष्य देखते हैं आप?
मेरा ये मानना है कि जब तक आप अपने विषय के प्रति ईमानदार रहते हैं और सिर्फ फ्रेंचाइजी के नाम पर कुछ भी नहीं बनाने लगते हैं, दर्शक आपके साथ रहते हैं। आपने एक खास किस्म की फिल्म बनाकर दर्शकों के बीच से उन विषयों को पसंद करने वाले दर्शकों को अपने साथ जोड़ा है, ये दर्शक वर्ग जब किसी निर्माता पर भरोसा करने लगता है तो निर्माता का भी फर्ज बनता है कि वह दर्शकों को उस फ्रेंचाइजी की अगली फिल्म बनाते समय पूरी तरह से सजग रहे।
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‘सनक’, विपुल अमृतलाल शाह - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
बीच में आपने ओटीटी के लिए भी एक फिल्म ‘सनक’ बनाई थी, उसकी सीक्वल की भी काफी चर्चा रही?
हां, हमारे पास इस फिल्म का भी सीक्वल बनाने का प्रस्ताव आ चुका है। ये एक अच्छा संकेत है कि दर्शक विविधतापूर्ण मनोरंजन सामग्री पसंद कर रहे हैं। अभी मैं ‘बस्तर’ की शूटिंग में व्यस्त हूं। ‘सनक 2’ फिलहाल हम नहीं बना रहे हैं, आगे कुछ होगा तो जरूर इसकी जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।
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शेफाली शाह, विपुल अमृतलाल शाह - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
‘आंखें’ फ्रेंचाइजी भी दर्शक विकसित होते देखना चाहते हैं, बतौर निर्देशक ऐसी एक फिल्म आप विकसित भी कर रहे थे, उसकी क्या प्रगति है?
आपके साथ ही मैं ये साझा कर रहा हूं। उसी श्रेणी की एक फिल्म पर मैं काम शुरू कर चुका हूं। ये एक बैंक डकैती की कहानी है। इसमें किरदार ऐसे ऐसे हैं कि दर्शकों को हर बार एक नया सरप्राइज मिलेगा। ‘दिल्ली क्राइम’, ‘जलसा’, ‘डार्लिंग्स’ और ‘थ्री ऑफ अस’ देखने वाले दर्शक मुझे लगातार शेफाली (शाह) जी के साथ फिल्म बनाने के लिए पूछते रहे हैं। ये फिल्म मैं उन्हीं के साथ बना रहा हूं। फिल्म की कहानी बहुत ही रोमांचक है और दर्शक इसमें ‘आंखें’ की तरह ही अंत तक सीट से चिपके रहेंगे।
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