इरशाद कामिल, सुधा मूर्ति
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
और, आखिरी सवाल आपके फिल्म निर्देशक बनने के बारे में। कितनी दूर हैं अभी अपनी इस मंजिल से?
मैंने एक फिल्म लिखी थी, और उसको निर्देशित भी करने वाला था। राकेश ओमप्रकाश मेहरा उसके निर्माता था। सारे कलाकार तय हो चुके थे, स्टूडियो ने भी हरी झंडी दे दी थी और तभी कोविड आ गया। उस दो साल के वक्त ने सारे हालात बदल दिए। दर्शकों की सोच बदल दी। कलाकारों की सोच बदल दी। और, फिल्में बनाने वालों की सोच बदल दी। लेकिन, चीजें धीरे धीरे बैठ रही हैं।
आज बारिश के मौसम में हम लोग ये इंटरव्यू कर रहे हैं। कोशिश करेंगे कि अगली बारिश के मौसम में जब हम बैठेंगे तो आपकी फिल्म पर बात कर रहे होंगे.. चलते चलते एक शेर हमारे पाठकों के लिए आप गुनगुन सकें, तो कुछ बात हो..!
जी जी, बारिश बीच-बीच में हो भी रही है कितनी अच्छी बात है..और इसी बात पर ये शेर भी है..कि,
मैं तो मिट्टी पे लिखा हुआ नाम हूं,
बारिशों से बचा लो तो कुछ बात हो,
ना सही मैं तेरे ख्वाब का हमसफर,
काम मुझ से चला लो तो कुछ बात हो...।