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Vicky Kaushal Interview: उस दिन हम एक छत के नीचे थे, कहां पता था कि हमें किसी दिन एक छत के नीचे एक साथ रहना है

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विक्की कौशल - फोटो : अमर उजाला
साल 2012 में जब स्टंट निर्देशक शाम कौशल का बड़ा बेटा विक्की फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप की फिल्म ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ के सेट पर भागदौड़ कर रहा होता था, तब सलमान खान की फिल्म ‘एक था टाइगर’ तक आते आते कैटरीना कैफ सुपरस्टार बन चुकी थीं। इसके बाद फिल्म ‘मसान’ में एक दलित युवक के किरदार से विक्की कौशल भी हीरो बने। ‘उरी’, ‘सरदार उधम’ और ‘सैम बहादुर’ जैसी फिल्मों से विक्की कौशल फिल्म दर फिल्म निखरते जा रहे हैं। उनकी हालिया रिलीज फिल्म ‘बैड न्यूज’ उनकी अब तक की सबसे अच्छी ओपनिंग लेने वाली फिल्म है। ‘अमर उजाला’ के लिए उनसे ये खास मुलाकात की सलाहकार संपादक पंकज शुक्ल ने।
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बैड न्यूज - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
कॉमेडी फिल्म करते समय कलाकारों को खुद पर कितना काबू रखना होता है?
कॉमेडी फिल्मों का ये बहुत ही संवेदनशील पहलू है। कई बार कलाकार खुद ही इतना खो जाते हैं किरदार में कि दर्शकों तक उनका रस पहुंच ही नहीं पाता है। ऐसे मौकों पर ये याद रखना बहुत जरूरी है कि ये फिल्म दर्शकों को हंसाने के लिए है, खुद के मजे लेने के लिए नहीं। फिल्म ‘बैड न्यूज’ के निर्देशक आनंद तिवारी ने भी हमें यहीं समझाया कि ये आपके लिए मजाकिया स्थिति नहीं है। आप जितना परेशान होंगे हालात से, दर्शकों को लिए ये उतनी ही अच्छी कॉमेडी बनती जाएगी।
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गोविंदा नाम मेरा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
और, ‘गोविंदा नाम मेरा’ जैसी अपनी पिछली कॉमेडी फिल्मों के कुछ सबक काम आए आपको इस फिल्म में?
कॉमेडी सिनेमा की एक ऐसी श्रेणी है जिसमें से मैं हर बार कुछ नया सीखता हूं और हर बार अपनी फिल्म में कुछ बेहतर करता हूं। व्यक्तिगत पसंद के तौर पर पूछें तो भावुक और नाटकीय दृश्य करने में मुझे बहुत आनंद आता है। उनके एहसास में मैं घुस जाता हूं। लेकिन, कॉमेडी करते समय थोड़ा दबाव तो रहता है कि दर्शकों को हंसाना है, उन्हें खुश करना है। ऐसे में मैं गोविंदा, अक्षय कुमार और दिलजीत दोसांझ जैसे लोगों से प्रेरणा लेता हूं जिनकी अदाकारी अपने अलग प्रवाह में रहती है, वे किसी की परवाह नहीं करते।

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बैड न्यूज - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
और, घटनाओं से बनने वाला हास्य जिसे सिनेमा में सिचुएशनल कॉमेडी कहते हैं, ये कितना कठिन या आसान है, स्लैपस्टिक या कहें कि दूसरों की हंसी उड़ाकर बनने वाले हास्य से?
सिचुएशनल कॉमेडी ज्यादा मुश्किल है। इसमें जो सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण बात होती है वह है इसका लेखन। क्योंकि, परदे पर दर्शकों के लिए हास्य की स्थिति बन रही है, लेकिन जिन किरदारों के साथ वह सब हो रहा है, वे सब उस वक्त देखा जाए तो काफी गंभीर स्थिति से गुजर रहे होते हैं। फिल्म ‘बैड न्यूज’ के भी सारे गैग्स, सारे चुटकुले पहले से लिखे हुए थे। हमने कुछ भी शूटिंग करते हुए नहीं बनाया है।
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विक्की कौशल (छावा) - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

‘बैड न्यूज’ की शूटिंग खत्म करने के बाद आपने ‘छावा’ की और अब फिर से उसी लुक में हैं। एक बार में एक फिल्म के लिए एक लुक रखना किरदारों को निभाने में कितनी मदद करता है?

मेरे लिए ये बहुत काम करता है। मुझे ऐसा लगता है कि मैं और सच्चाई से इसके चलते अभिनय की प्रक्रिया में घुस पाता हूं और बहुत फोकस के साथ घुसता हूं। बीती सदी में फिल्मों की शूटिंग दिन में 12 घंटे करने निकले कलाकार अलग अलग निर्माताओं को तीन-तीन घंटे बांट देते थे। अब अगर आपने किसी फिल्म के लिए हां की है तो आपको पूरा समय उस फिल्म को देना ही होगा। ऐसे में एक तयशुदा लुक बहुत मदद करता है क्योंकि उस लुक में आप दूसरी फिल्म कर ही नहीं सकते। आज बड़े से बड़े कलाकार पर ये व्यवस्था लागू होती है।

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विक्की कौशल और कैटरीना कैफ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
फिल्म ‘बैड न्यूज’ के आप और आपकी पत्नी कैटरीना कैफ की फोटो एक ही फ्रेम में दिखते हैं, साथ काम करते कब दिखने वाले हैं आप दर्शकों को?
आशा तो है कि जल्दी दिखें। हम भी खोज रहे हैं ऐसी कहानी। लेकिन, हम ऐसी कोई फिल्म नहीं करना चाहते जो सिर्फ हमें साथ लेकर ही बना दी जाए। हमारी जोड़ी कहानी की मांग के अनुसार हो, तभी मजा आएगा। हम इंतजार कर रहे हैं और हमें इसकी कोई जल्दी भी नहीं है।
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न्यूयॉर्क फिल्म - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
कैटरीना कैफ की फिल्म ‘एक था टाइगर’ जब रिलीज हुई थी तब आप फिल्म ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ में अनुराग कश्यप के सहायक हुआ करते थे, उन दिनों कभी सोचा था कि सलमान खान की हीरोइन एक दिन आपकी पत्नी बनेगी?
पहली बार जीवन में अगर किसी फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग पर गया था तो वह थी निर्देशक कबीर खान की फिल्म ‘न्यूयॉर्क’। वहां पर वह भी थीं, जॉन थे, नील नितिन मुकेश थे, नवाजुद्दीन सिद्दीकी थे। तब तो हम उनकी फिल्में किसी प्रशंसक की तरह ही देखते थे। कभी कभी दिल में ख्याल आता भी है कि किसे क्या ही पता होता है कि ऊपरवाले ने किसके भाग्य में क्या लिख रखा है!  उस दिन हम उस एक छत के नीचे थे और कहां पता था कि हमें किसी दिन एक छत के नीचे साथ रहना है।

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नसीरुद्दीन शाह - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
उन दिनों आप रंगमंच भी किया करते थे, नसीरुद्दीन शाह के साथ भी आपने नाटकों के लिए काम किया है, क्या सबक मिला उनसे जो अब तक याद रह गया हो?
बिल्कुल ठीक कहा आपने, मैंने नसीर साब के नाटकों के लिए काम किया है। बैकस्टेज ही काम किया उनके साथ। फिर मानव कौल के साथ खूब काम किया है। और एक रेज प्रोडक्शन है, उनके नाटक किए। नसीर साब से मैंने सीखी है सांस लेने की कला। कई बार अभिनय करते समय हमें अपनी सांस लेने की प्रक्रिया पर ध्यान नहीं रहता जबकि जैसे ही हमारे भाव बदलते हैं हमारी सांसों की गति भी बदलने लगती है। इससे हमारी आवाज का सुर, लय, ताल सब बदलती है। उसका एहसास बदलने लगता है। ये मेरे लिए बहुत नई चीज थी जो मैंने वहां पहली बार देखी और फिर उसका खूब अभ्यास किया।

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मसान फिल्म - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
भारतीय सिनेमा में दलितों के प्रतिनिधित्व पर इन दिनों विदेशी विद्यार्थी शोध कर रहे हैं, आपकी तो पहली ही फिल्म ‘मसान’ अमेरिका के दलित सिनेमा फेस्टिवल में दिखाई गई, हिंदी सिनेमा में ऐसी फिल्मों की कम होती संख्या पर क्या कहेंगे?
मुझे नहीं लगता कि किसी समुदाय को लेकर ऐसी कोई सोच है या कि फिल्में कम लिखी जा रही हैं। मेरा मानना है कि दर्शक इन दिनों सिनेमा में सच्चाई तलाश रहा है। उसे वह भरोसा कहानी पर चाहिए, फिर चाहे आप नया कलाकार ले लो या बड़े से बड़ा स्टार ले लो। उसे ये किरदार सच्चा लगा तो वह ‘12वीं फेल’ को भी फिल्म ऑफ द ईयर बना देंगे और अगर उन्हे किरदार ही झूठा लगा तो नहीं चलेगी वह फिल्म।

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12वीं फेल फिल्म - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
‘12वीं फेल’ का आपने जिक्र किया, इस साल भी ‘मुंजा’, ‘लापता लेडीज’ और ‘मंजुम्मेल बॉयज’ जैसी बिना सितारों के हिट हो रही हैं..
‘12वीं फेल’ मेरी पिछले साल की सबसे फेवरेट फिल्म थी। मेरी सबसे पसंदीदा अदाकारी वाली फिल्म है ये। मैं बता नहीं सकता कि इस फिल्म को देखकर मैं कितना भावुक हुआ और कितना रोया हूं मैं। कह सकते हैं कि ये सारा दर्द मेरे साथ ही रह गया। क्या ही कमाल फिल्म थी वह!

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विक्की कौशल - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

12th फेल का जो जिक्र किया है आपने। तो जैसे मुंजा है या मंजुम्मेल बॉयज हैं ये सब बिना सितारों के हिट हुई फिल्में हैं,..

12th फेल मेरी पिछले साल की सबसे फेवरेट फिल्म थी मेरी सबसे फेवरेट परफॉरमेंस थी, और जितना मैं रोया हूं ये फिल्म देख के जितना मैं भावुक हुआ हूं कि मैं बता नहीं सकता मतलब वो मेरे साथ रह गया .. बाकमाल फिल्म थी वो..

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विक्की कौशल - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
और, ऐसे किरदार करने के लिए आप शाहरुख खान या रणबीर कपूर की फिल्मों में साइड हीरो के रोल भी कर लेते हैं..?
मेरे लिए मेरे किरदार की सच्चाई जरूरी है। अगर किसी फिल्म में मुझे पीछे से पासिंग शॉट भी देना होगा तो मैं पूरी सच्चाई के साथ करूंगा। मेरे अंदर अभिनय की भूख है। मैं इसी के लिए तो आया हूं। और अगर राजकुमार हीरानी जैसे निर्देशक की फिल्म में ऐसा मौका मिल रहा है तो मैं कैसे जाने दूं? वह तीन साल में एक पिक्चर बनाते हैं। लोगों की कतार लगी है उनके साथ काम करने के लिए और उनके साथ काम करने का मौका मिले और मैं अपना दो सौ फीसदी न दूं तो लानत है मुझ पर।
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विक्की कौशल - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
शुरुआत आपने सहायक निर्देशक के तौर पर की और अब कभी मन तो नहीं होता कि निर्देशन में भी हाथ आजमाना चाहिए?
नहीं, सर। अभी तो एक्टिंग में ही थोड़ा पैर जमा रहा हूं। पहले ये हो जाए फिर वह देखेंगे। बतौर अभिनेता मुझे अलग अलग निर्देशकों के साथ काम करने का मौका मिल रहा है। उनकी सोच मुझे समझने में आनंद आता है। एक ही पटकथा को अगर सौ निर्देशक अलग अलग बनाएं तो हर फिल्म दूसरी से बिल्कुल अलग होगी। सिनेमा निर्देशक का माध्यम है। मेरी भीतर निर्देशन को लेकर उत्सुकता तो है पर वह बहुत बड़ी जिम्मेदारी है और उसे उठाने के लिए अभी तो मैं बहुत बच्चा हूं।
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