तब्बू
- फोटो : इंस्टाग्राम@tabutiful
हैदराबाद की परवरिश ने तब्बू की कहानियों को समझने में मदद की?
मेरे नाना-नानी दोनों ही पढ़ाते थे। मेरी नानी 47 साल तक टीचर थीं और मेरे नाना गणित के प्रोफेसर थे। तो ये सारा किताबों का माहौल और सिर्फ उसकी वजह से नहीं, मेरी सभी खाला और पांच मामू वो सभी किताबों के कीड़ें हैं। उनके पास हर चीज की किताबें थीं। मुझे लगता है कि मैं बहुत लकी हूं कि मेरे आस पास हर इंसान को पढ़ने का शौक था। मेरी एक खाला हैं, जो रात में आधा घंटा पढ़े बिना सो नहीं सकतीं। खैर मैं अपने प्रोफेशनल के चलते हर रोज नहीं पढ़ती। मगर मैं कोशिश करती हूं कि पढ़ सकूं। हम सभी लोग कहानियों के साथ बड़े हुए हैं। कहानियों से हमें जिंदगी की, काम की और रिश्तों की सीख मिली है।