हिंदी सिनेमा में 80 के दशक में महिलाओं की शक्ति प्रदर्शन को लेकर खूब फिल्में बनीं। ये फिल्में दर्शकों काफी पसंद आती थी, क्योंकि उन्हें इसमें कुछ नया लगता था। उस दौरान ऐसी कई फिल्में आईं, जिनमें अभिनेता नहीं बल्कि फिल्म की अभिनेत्री लीड किया करती थी। वहीं, तब फिल्मों में विलेन का रोल काफी अहम माना जाता था क्योंकि कोई महिला अगर किसी दमदार विलेन से टक्कर लेती थी तो फिर फिल्म में एक अलग ही रोमांच पैदा हो जाता था। इसी दौर निर्देशक अशोक देव ने जीनत अमान के साथ भी कुछ इस तरह की फिल्म बनाई। फिल्म का नाम डाकू हसीना था, इसमें जीनत अमान के अलावा रजा मुराद और रजनीकांत भी अहम भूमिका में थे।
ये फिल्म एक महिला डकैत पर आधारित थी, जिसका शारीरिक शोषण होता है। इसके बाद वह बदला लेने के बंदूक उठा लेती है और डकैत बन जाती है। फिर वह अपने साथ हुई ऐसी हरकत करने वालों से बदला लेती है। जब मुराद को बताया गया कि उन्हें जीनत के साथ एक रेप सीन शूट करना है तो वे पीछे हट गए। क्योंकि उनके दिमाग में एक ही बात थी कि जीनत असल रिश्ते में उनकी बहन लगती हैं।