केजीएफ
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ये बात साल 2018 की है। कन्नड़ सिनेमा में यश का नाम खूब था लेकिन कर्नाटक के बाहर उनको जानने पहचानने वाले कम ही थे। फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी की फिल्म निर्माण कंपनी एक्सेल एंटरटेनमेंट के दफ्तर में एक फोन आता है। फोन देश के सबसे बड़े फिल्म वितरकों में से एक अनिल थडानी का है और वह एक्सेल एंटरटेनमेंट के हेड विशाल रामचंदानी से बस कुछ मिनट का समय मांगते हैं। साथ ही अनुरोध करते हैं एक ऐसे शख्स से मिलने का जिसके पास अपनी जल्द रिलीज होने वाली फिल्म की चार मिनट की शो रील है। सवाल होता, ‘हिंदी में है?’ जवाब मिलता है, ‘नहीं।’ लेकिन, विशाल फिर भी इस मुलाकात के लिए मान जाते हैं।