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पर्यावरण दिवस: भूमि, दीया, नेहा, आकांक्षा बने हरियाली के हरकारे, अगली पीढ़ी के लिए बेहतर धरती की दुआ

Sat, 05 Jun 2021 08:26 AM IST
दीपाली श्रीवास्तव अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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दीया मिर्जा, भूमि पेडनेकर, आकांक्षा शर्मा, नेहा पेंडसे - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण दिवस पर इस साल लोगों को हाल के दिनों की वह त्रासदी फिर याद आ रही है जब ऑक्सीजन के लिए लोग यहां वहां भटके थे और कइयों ने तो समय पर ऑक्सीजन न मिल पाने के चलते दम ही तोड़ दिया। मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के तमाम चर्चित चेहरों ने पर्यावरण दिवस पर अपने आसपास की प्रकृति की हिफाजत करने की फिर से अपील की है। भूमि पेडनेकर का मानना है कि हर उस शख्सीयत को इसमें अपना योगदान करना चाहिए जिसकी आवाज सुनी जाती है। दीया मिर्जा चाहती हैं कि दुनिया में हर शख्स पर्यावरण संरक्षण पर काम करे। वहीं, टीवी की अभिनेत्रियों नेहा पेंडसे और आकांक्षा शर्मा ने भी हरियाली को लेकर अपने दिल की बात साझा की है।
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भूमि पेडनेकर - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
इस बारे में भूमि पेडनेकर कहती हैं, ‘मुझे लगता है कि मेरा जर्रा जर्रा यहां तक कि आज मेरी जो शख्सियत है, वह भी मेरी जिंदगी के अनुभवों का कुल योग है, और इनमें से अधिकतर अनुभव वहां से निकले हैं जो मैंने अपने घर में देखे। मुझे याद है कि जब मैं स्कूल में थी तब हमारे देश पर एक प्राकृतिक आपदा आई थी। उस वक्त हमारे माता-पिता हम लोगों को डोनेशन जमा करने के लिए भेजा करते थे ताकि हम आपदा से प्रभावित लोगों की मदद कर सकें। मेरे पिता हमेशा अपनी कम्युनिटी की मदद करने के लिए आगे आते थे और मैंने देखा है कि मेरी मां अपने आसपास के लोगों के साथ गहरी सहानुभूति रखती थीं। पर्यावरण संरक्षण के लिए भी हमें इसी सामुदायिक भावना को फिर से अपने घर परिवार में जगाना होगा। कुदरत की देखभाल हमारी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा होनी चाहिए। हमें दूसरों की लगाई हरियाली से मिल रही साफ हवा पर तो खुश होना चाहिए, लेकिन साथ ही ये भी ध्यान रखना चाहिए कि हम आने वाली जेनरेशन के लिए कैसी धरती छोड़कर जाने वाले हैं।
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दीया मिर्जा - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
अभिनेत्री दीया मिर्जा भी पर्यावरण को लेकर काफी सजग रहती हैं। संयुक्त राष्ट्र की वह पर्यावरण ध्वजवाहक भी हैं। वह कहती हैं, ‘जब तक हम दीर्घकालिक विकास की योजनाएं नहीं बनाएंगे और पर्यावरण के विघटन को हर स्तर पर रोकेंगे नहीं, जलवायु परिवर्तन हमें हर स्तर पर प्रभावित करता ही रहेगा। ये देखते हुए भी कि हम एक ऐसी महामारी के समय में जी रहे हैं जो मानव की प्रकृति से खिलवाड़ से ही उपजी है, पर्यावरण को लेकर अब भी सामाजिक आंदोलनों को उतनी तवज्जो दी नहीं जाती है। पर्यावरण के मामलों पर भी लोग अब भी उतना ध्यान नहीं दे रहे हैं जबकि मेरा मानना है कि हर कोई कहीं न कहीं से तो शुरूआत कर ही सकता है।’ 

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नेहा पेंडसे - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
इस बारे में धारावाहिक ‘भाबीजी घर पर हैं‘ की अनिता भाबी यानी नेहा पेंडसे कहती हैं, ‘सरल शब्दों में कहें तो स्थायित्वपूर्ण या अनुशासित जीवन जीने का मतलब है कि हमारे जीने के तौर-तरीकों का कितना प्रभाव हमारे आस-पास की दुनिया पर पड़ा है। साथ ही हर कोई बेहतर और जिम्मेदारीपूर्वक जीने के तरीके ढूंढें। पर्यावरण के अनुकूल तरीकों को अपनाना अपनी धरती की सुरक्षा और संरक्षण का ही तरीका है। जैसे कि मैंने सिंगल-यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल कम कर दिया है। इसकी जगह पर मैं अपनी ग्ऱसरी तथा बाकी जरूरत की चीजों के लिये प्लाटिक फ्री विकल्प चुनती हूं। मैंने तय कर रखा है कि मैं अपने साथ सूती या जूट के थैले रखूंगी। मैं चमचमाती लाइटिंग की बजाय एलईडी या सीएफएल बल्ब का इस्तेमाल करती हूं, क्योंकि ये लंबे समय तक चलते हैं और बिजली बचाते हैं। इसके अलावा मैं नैचुरल लाइटिंग करना भी पसंद करती हूं, इससे ना केवल बिजली की बचत होती है, बल्कि आपको और ज्यादा धूप मिलती है। हमारे रोजमर्रा के जीवन में ये छोटे-छोटे बदलाव हमें पर्यावरण को लेकर ज्यादा जागरूक बनाते हैं और इससे बड़ा बदलाव आता है।’
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आकांक्षा शर्मा - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
धारावाहिक ‘और भई क्या चल रहा है?‘ की सकीना मिर्जा यानी आकांक्षा शर्मा कहती हैं, ‘‘पर्यावरण की रक्षा करना और ईकोसिस्टम को तबाह होने से रोकना बहुत जरूरी है। इस धरती के जीव होने के नाते पर्यावरण को प्रदूषण और बाकी उन चीजों से बचाना जोकि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं, हमारा नैतिक कर्तव्य है। हमारा ईकोसिस्टम हमें कई सारी प्राकृतिक चीजें जैसे साफ हवा, पानी, खाना और कई और चीजें देता है। हमें अपने पर्यावरण की सुरक्षा जरूर करनी चाहिए और उसके लिये कुछ करना चाहियए। गाड़ियों की वजह से होने वाले प्रदूषण की वजह से चिंताएं बढ़ती जा रही हैं, खासकर महानगरों में। प्रकृति को वापस देने के लिए हमने हर छह महीने में एक पौधा लगाने का भी फैसला किया है।’
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