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कौन है वो जिसने बिंदास रेखा को बदल डाला, मिला था इतना बड़ा धोखा

Sat, 07 Oct 2017 07:11 AM IST
amarujala.com- Presented by: अरविंद
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Rekha
22 जनवरी 1980 का दिन था। मौका था ऋषि कपूर और नीतू सिंह की शादी का। भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के बड़े से बड़े नाम वहां मौजूद थे। अमिताभ बच्चन अपनी पत्नी जया और माता-पिता के साथ वहां पहुंचे हुए थे और एक कोने में खड़े होकर मनमोहन देसाई से बात कर रहे थे। जया अपनी सास तेजी बच्चन के साथ बैठी हुई थीं, तभी अचानक रेखा ने एंट्री ली। उन्होंने खूबसूरत सफेद साड़ी पहन रखी थी और उनके माथे पर एक लाल बिंदी लगी हुई थी। लेकिन जो चीज सबसे ज्यादा लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींच रही थी वो था उनकी मांग के बीच लगा सिंदूर। उनको देखते ही फोटोग्राफरों के कैमरे नीतू और ऋषि को छोड़ कर उनकी तरफ मुड़ गए थे। थोड़ी देर बाद रेखा पार्टी से चली गईं थीं, लेकिन वो अपने पीछे कई अनुत्तरित सवाल छोड़ गईं थीं जो लोगों के जहन में महीनों तक रहे। 
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किसके नाम का था रेखा की मांग में सिंदूर ?

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Rekha
बाद में एक पत्रिका को दिए गए इंटरव्यू में रेखा ने स्पष्टीकरण दिया कि उस दिन वो सीधे एक शूट से पार्टी में चली आई थीं और जो मंगलसूत्र और सिंदूर वो लगाए हुए थीं, वो उस फिल्म में उनके मेक अप का हिस्सा था। ये थीं असली रेखा जिन्हें विवादों में खेलना पसंद था और उन्हें इस बात की रत्ती भर भी फिक्र नहीं थी कि लोग क्या कहेंगे। रेखा की जीवनी, रेखा- द अनटोल्ड स्टोरी लिखने वाले यासेर उस्मान बताते हैं कि रेखा के फिल्मी सफर की शुरुआत हुई थी 14 साल की कच्ची उम्र में जब नैरोबी में रहने वाले प्रोड्यूसर कुलजीत पाल ने उन्हें पहली बार जैमिनी स्टूडियो में देखा था। वो तमिल हीरोइन वाणीश्री को साइन करने गए थे। उन्होंने उनके मेक अप रूम में एक गोल मटोल, साँवली लड़की को बैठे हुए देखा। वो खाना खा रही थी। उसकी प्लेट पूरी तरह से भरी हुई थी। 
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इस डायलॉग से शुरू हुआ फिल्मी सफर

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Rekha
किसी ने कुलजीत से फुसफुसा कर कहा कि ये अभिनेत्री पुष्पवल्ली की बेटी है। कुलजीत को उस लड़की में कुछ ऐसा खास दिखाई दिया कि वो उसी शाम पुष्पवल्ली के घर पहुंच गए। उन्होंने रेखा से पूछा क्या तुम 'हिंदी बोल सकती हो?' रेखा ने छूटते ही जवाब दिया, 'नहीं.' तभी उनकी मां ने कहा, "मेरी बेटी की याददाश्त बहुत जबरदस्त है। आप कुछ भी एक कागज पर लिख दें। ये उसे तुरंत याद कर आपके सामने पढ़ देगी." कुलजीत ने एक डायलॉग हिंदी में लिखा। रेखा ने उसे रोमन में उतारा और इससे पहले कि कुलजीत अपनी चाय का प्याला खत्म कर पाते, रेखा ने वो डायलॉग सुनाना शुरू कर दिया, "सतीश, अब तो वो दिन आ गया है जब तुम्हारे और मेरे बीच में एक फूलों का हार भी नहीं होना चाहिए." कुलजीत ने उसी समय रेखा को अपनी फिल्म के लिए साइन किया। इस तरह उस समय भानुरेखा के नाम से जाने वाली रेखा का फिल्मी सफर अनजाना सफर नाम की फिल्म से शुरू हुआ। 

जब पहली ही फिल्म में यौन शोषण की शिकार हुईं रेखा !

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अपनी पहली ही फिल्म में रेखा को एक तरह के यौन शोषण का शिकार होना पड़ा जब निर्देशक राजा नवाथे ने उन पर पांच मिनट लंबा चुंबन का दृश्य फिल्माया। यासेर बताते हैं, "पहले ही शिड्यूल में कुलजीत, राजा और फिल्म के हीरो विश्वजीत ने योजना बनाई कि फिल्म में एक किसिंग सीन होगा। जैसे ही निर्देशक राजा ने एक्शन कहा, विश्वजीत रेखा को अपनी बाहों में भर कर चूमने लगे। ये सीन पांच मिनट तक चलता रहा। कैमरा रोल करता रहा और न तो निर्देशक ने कट कहा और न ही विश्वजीत रुके। इस बीच यूनिट के लोग जो ये शूटिंग देख रहे थे सीटियां बजाते रहे। रेखा इस शोषण और अपमान को कभी नहीं भुला पाईं। बाद मे जब मशहूर पत्रिका लाइफ ने भारतीय फिल्मों में चुंबन पर एक स्टोरी की तो उसने विश्वजीत और रेखा पर फिल्माए गए उस चुंबन की तस्वीर को भी छापा। ये फिल्म रेखा के फिल्मों में आने के दस वर्ष बाद रिलीज हुई और बुरी तरह से फ्लाप हुई। 
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कौन था रेखा का पहला प्यार

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Vinod Mehra
रेखा की पहली हिट फिल्म थी सावन भादो। धीरे-धीरे वे बालीवुड में लोकप्रिय होती चली गईं। एक समय ऐसा भी आया कि उनके पास 25 फिल्में थीं।उसी दौरान उनकी मुलाकात विनोद मेहरा से हुई। वो उन्हें पसंद करने लगीं। उन्होंने उनसे शादी भी कर ली लेकिन विनोद मेहरा की मां ने उन्हें स्वीकार करने से इंकार कर दिया। यासेर उस्मान बताते हैं, "मैं रेखा के जितने भी करीबी लोगों से मिला, सबने कहा कि विनोद मेहरा उन्हें दिल से चाहते थे।रेखा उन्हें विन-विन कह कर पुकारती थीं। लेकिन वो अपनी मां को रेखा से शादी के लिए नहीं मना पाए। जब वो कोलकाता में शादी कर रेखा को सीधे एयरपोर्ट से अपने घर ले गए और रेखा ने विनोद मेहरा की मां कमला मेहरा के पांव छूने चाहे तो उन्होंने उन्हें धक्का दे दिया। "उन्होंने रेखा को अपने घर में नहीं घुसने दिया। एक समय तो वो इतनी नाराज हो गईं कि वो रेखा को चप्पल से मारने पर उतारू थीं। विनोद मेहरा ने उनसे कहा कि वो कुछ दिनों तक अपने घर पर रहे। तब तक वो अपनी मां को मनाने की कोशिश करेंगे। लेकिन विनोद मेहरा अपनी मां को कभी नहीं मना पाए और ये रिश्ता वक्त के साथ खत्म हो गया।"
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जब अमिताभ से शुरू हुआ रेखा के प्यार का सिलसिला

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Amitabh bachchan and Rekha
रेखा की शख्सियत में आमूल बदलाव आया अमिताभ बच्चन से मिलने के बाद। उनकी बिंदास हरकतों, उन्मुक्त व्यवहार और बात बात पर खिलखिला देने की अदा की जगह एक खास किस्म के गांभीर्य ने ले ली। यासेर बताते हैं, "इन दोनों की पहली बड़ी फिल्म थी दो अंजाने। तब तक अमिताभ की दीवार आ चुकी थी। शोले भी आ चुकी थी। वो फिल्मी दुनिया के उभरते हुए सितारे थे। रेखा उन्हें देखते ही उन पर फिदा हो गईं थीं। उन्होंने सिमी गरेवाल के कार्यक्रम रेनडावू में दिए गए इंटरव्यू में स्वीकार किया है कि अमिताभ बच्चन के सामने खड़े होना उनके लिए आसान नहीं था। वो वक्त पर सेट पर आया करते थे जबकि रेखा अपनी लेटलतीफी के लिए मशहूर थीं।
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फिल्म 'उमराव जान' के लिए ऐसे हुईं सिलेक्ट

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Rekha
रेखा ने सबसे ज्यादा नाम कमाया अपनी फिल्म 'उमराव जान' के लिए। सवाल उठता है कि मुजफ्फर अली ने रेखा में आखिर ऐसा क्या देखा कि उन्होंने उमराव जान के रोल के लिए रेखा को चुना? अली बताया था  "मैं उस रोल के लिए स्मिता पाटिल को चुन सकता था, लेकिन मैंने रेखा की आंखों में देखा कि वो टूटने का अनुभव समझती हैं। उमराव जान के जीवन की भी यही कहानी थी। रेखा ने इस रोल के लिए बहुत मेहनत की। उन्होंने मेरी उम्मीद से कहीं बेहतर अभिनय किया और स्क्रिप्ट के भी ऊपर निकल गईं।
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