उसे इश्क कहें, मोहब्बत या प्यार कहें, वो जब होता है तो इंसान को कहीं का नहीं छोड़ता। उस एहसास में एक अलग ही कशिश होती है। जिसकी वजह से हम एक अलग ही दुनिया में होते हैं। प्यार में पड़ा इंसान जब इसका आगाज करता है तो अंजाम की परवाह किए बगैर आगे बढ़ता जाता है। दिन-ब-दिन हमारी मोहब्बत बढ़ती जाती है। प्यार अमर है, जिसे न तो कोई सरहद रोक पाती है और न ही जाति की बेड़ियां जकड़ सकती हैं। मजहब या वक्त के दायरे में इसे बांधा नहीं जा सकता। मोहब्बत की कहानियां ऐसी होती हैं जो किरदारों के गुजर जाने के बाद भी जिंदा रहती हैं। इश्क के बारे में एक बात काफी मशहूर है कि ये मंजिल तक पहुंचते-पहुंचते लड़खड़ा जाता है, भटक जाता है। ऐसी कई प्रेम कहानियां हैं जो शुरू तो हुईं, लेकिन कभी मुकम्मल न हो पाईं। कुछ ऐसी ही प्रेम कहानी है बॉलीवुड के लीजेंड कलाकार गुरुदत्त और दिग्गज अदाकारा वहीदा रहमान की, जिन्हें अधूरी ख्वाहिशों संग मरना पड़ा। तो चलिए आज हम आपको अपने इस लेख के जरिए बताते हैं कि कैसे शादीशुदा गुरुदत्त का दिल वहीदा रहमान पर आया और फिर दोनों को जुदाई का गम सहना पड़ा। पढ़ें अधूरे इश्क की दास्तां...