लेखक चेतन भगत ने पद्मावती फिल्म को लेकर निर्देशक संजय लीला भंसाली और अभिनेत्री दीपिका पादुकोण को दी जा रही धमकियों को गलत बताया है। उन्होंने कहा लोकतंत्र में किसी भी चीज को आप नापसंद कर सकते हैं, उसकी निंदा कर सकते हैं लेकिन धमकी और हिंसा को किसी भी सूरत में जायज नहीं ठहराया जा सकता। सेलिब्रिटी लेखक ने कहा कि राजपूत लोग हमेशा अपने शौर्य, आन -बान-शान तथा नारी सम्मान की रक्षा के लिए बलिदान देने के लिए विख्यात रहे हैं। ऐसे वर्ग से उद्दंडता की आशा नहीं की जा सकती । उन्होंने देश के माहौल को अजीब बताया ।
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उन्होंने कहा छोटी-छोटी बात पर लोग सड़कों पर उतरते हैं। धमकियां देते हैं। सरकारें वोट बैंक की नाराजगी से बचने के लिए ऐसे लोगों पर कार्रवाई नहीं करतीं। यह प्रवृत्ति बहुत घातक है। मूडी की भारत की नई रेटिंग पर भी चेतन बोले। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय जगत भारत की आर्थिक क्षमताओं को मान रहा है। यह माना जा रहा है कि पहले की अपेक्षा अब भारत में निवेश और कारोबार करने का बेहतर माहौल है। भगत ने देश में सकारात्मक बदलाव की भी बात तो स्वीकारी मगर उसकी गति धीमी होने की बात कही।
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बड़ा बनने के लिए बड़े सपने देखना जरूरी
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बच्चों के साथ चेतन भगत
- फोटो : अमर उजाला
युवा पीढ़ी के बारे में चेतन भगत ने थोड़ी मायूसी भरे लहजे में कहा कि आज की युवा पीढ़ी की बड़ी समस्या यह है कि वह बड़े सपने नहीं देखती। बड़ा बनने के लिए बड़े सपने देखना बहुत जरूरी है। दुर्भाग्य है कि भारत में हर चीज औकात से तय की जाती है। लेकिन सपनों की कोई औकात नहीं होती। उन्होंने बताया कि यह खामी मेरे साथ भी थी। मेरे दसवीं कक्षा में 76 फीसदी अंक थे। मध्यवर्गीय परिवार से था। मैं सपना देखता था कि एसटीडी बूथ खोलूंगा। एक दिन मेरे पास दस टेलीफोन बूथ होंगे। आज का दुर्भाग्य यह है कि आज की युवा पीढी के सामने रोल माडल की कमी हो गई है ।
शिक्षा का उद्देश्य बेहतर इंसान बनाना हो
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जाने-माने लेखक चेतन भगत
- फोटो : अमर उजाला
चेतन भगत ने मौजूदा शिक्षा व्यवस्था की भी आलोचना की । उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य बेहतर इंसान बनाना होना चाहिए लेकिन आज की शिक्षा सिर्फ कमाई और फायदे की बात सोचती है । एजूकेशन सिस्टम बदला नहीं है। कोर्स पुराने हैं। बच्चों को रटाने के बजाय गूगल मैप जैसी नई तकनीकी से पढ़ाया जाना चाहिए। आईआईटी और आईबीएम जैसी विश्वस्तरीय संस्थाओं से प्रतिभा पलायन के सवाल पर चेतन भगत का कहना था कि भारत को ऐसा माहौल बनाना होगा कि लोग यहीं रहें। पहले से आप देश में सेवा जैसी शर्तें रखेंगे तो संस्थान का स्तर गिरेगा। वैसे मेरे जैसे कई लोग विदेश से भारत में लौटे भी हैं।
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राहुल साबित करें वे दूसरों से बेहतर व्यवस्था दे सकते हैं
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बच्चों को संबोधित करते हुए चेतन भगत
- फोटो : अमर उजाला
चेतन भगत ने मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य पर टिप्पणी की कि स्वस्थ लोकतंत्र के लिए मजबूत विपक्ष का होना जरूरी है । राहुल गांधी के नए अवतार और आक्रामक तेवर पर उन्होंने कहा कि राहुल कुछ बदले तो लग रहे हैं । उनके बयानों में अब पंच भी दिख रहा है । लेकिन दूसरों की आलोचना की अपेक्षा उन्हें इस बात का भरोसा दिलाना चाहिए कि वे कैसे दूसरों से बेहतर साबित होंगे। भारत की जनता मसालेदार ट्वीट पर वोट नहीं देती।
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हिंदी में लिखने से डर लगता है
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चेतन ने अमर उजाला संवाद में अपनी लोकप्रियता में हिंदी पट्टी के महत्व को स्वीकार किया। उन्होंने माना कि हिंदी पाठकों ने उन्हें स्टार लेखक बनाया। उनका समूचा साहित्य हिंदी में अनूदित है और बेहद लोकप्रिय है। लेकिन वह मूल रूप से हिंदी में लिखने से डरते हैं। चेतन कहते हैं कि जब अंग्रेजी में लेखन पर आलोचक उनकी पिटाई से बाज नहीं आते फिर हिंदी में कौन बख्शेगा।
चेतन ने एक सवाल के जवाब में कहा कि थ्री इडियट्स फिल्म ने मुझे काफी लोकप्रियता दिलाई। उसमें माधवन ने जो किरदार निभाया वह मुझसे मिलता जुलता है । असल स्क्रिप्ट में नायिका भी माधवन के पल्ले पड़ती है। लेकिन चूंकि फिल्म में आमिर बड़े स्टार थे । इसलिए फिल्म में नायिका उन्हीं के पल्ले पड़ी। जब उनसे पूछा गया कि उन्हें निर्देशकों का मूल कहानी में छेड़छाड़ कितना जायज लगता है तो वह बोले कि इस मामले में मैं काफी लकी रहा हूं। मेरे साथ ऐसी समस्या नहीं आई।