लुटेरा
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
फिल्म 'लुटेरा' आपकी पहली फिल्म है, छोटे परदे से बड़े परदे की छलांग कैसी रही?
टीवी इंडस्ट्री से अचानक फिल्मों में आया तो मेरे लिए कैमरे से लेकर सब कुछ बड़ा था। टीवी शूटिंग के दौरान 50-60 लोगों की यूनिट होती थी और फिल्मों में एक साथ 200 लोग एक साथ सेट पर होते हैं। सब लोग फर्राटेदार अंग्रेजी में बात कर रहे होते थे और तब अंग्रेजी में मेरा हाथ काफी तंग था। टीवी एक्टर को फिल्मवाले बहुत जलील करते हैं। मैं यह नहीं कहता कि मेरे साथ वहां ऐसा हुआ, लेकिन आम तौर पर ऐसा होता है। लोग सोचते हैं कि लोखंडवाला (मुंबई के अंधेरी पश्चिम का एक इलाका, जहां संघर्षशील कलाकार रहते हैं) का एक्टर है, बॉडी बना कर घूमते रहते हैं, बस। मेरे लिए चुनौती ये थी कि खुद को साबित करना है। जो काम मिला है, उसे पूरी ईमानदारी के साथ बखूबी करना है।