70 और 80 के दशक की सुप्रसिद्ध अभिनेत्री विद्या सिन्हा ने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को लगभग एक दशक का ही समय दिया था और इतने में ही उन्होंने कई यादगार काम कर डाले। एक अभिनेत्री बनने का जुनून तो उनके सिर पर शायद शुरुआत से ही चढ़ा हुआ था इसलिए मात्र 18 साल की उम्र में विद्या एक ब्यूटी कॉन्टेस्ट में भाग लेकर मिस बॉम्बे बन गईं। उसके बाद जब उन्होंने मॉडलिंग शुरू की तो उन पर जाने-माने फिल्म निर्माता और निर्देशक बासु चटर्जी की नजर पड़ी। और फिर चल पड़ा विद्या का फिल्मी करियर। उनके जन्मदिन के मौके पर हम आपको विद्या के कुछ बेहतरीन किरदारों के बारे में बताते हैं।
विज्ञापन
2 of 11
रजनीगंधा
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
किरदार : दीपा कपूर
फिल्म : रजनीगंधा (1974)
विद्या ने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1974 में आई फिल्म 'राजा काका' से अभिनेता किरण कुमार के साथ की। हालांकि, फिल्म कुछ खास नहीं कर पाई और विद्या को भी इससे कोई ज्यादा फायदा नहीं हुआ। विद्या की किस्मत तो तब खुली जब बासु चटर्जी ने उन्हें अपनी फिल्म 'रजनीगंधा' के लिए साइन किया। फिल्म तो छोटे बजट की ही थी लेकिन विद्या के लिए यह बड़ी कामयाबी लेकर आई। इस में विद्या ने दीपा कपूर का किरदार निभाया है जो दिल्ली में रहती है और संजय से प्यार करती है। संजय के लिए उसका प्यार तब बदल जाता है जब मुंबई जाकर वह नवीन से मिलती है। नवीन उसकी रहने, खाने, नौकरी दिलाने तक में मदद करता है। हालांकि, समय रहते विद्या को समझ में आ ही जाता है कि संजय ही उसका असली प्यार है। इस रोमांटिक ड्रामा फिल्म में विद्या के साथ अमोल पालेकर और दिनेश ठाकुर मुख्य भूमिकाओं में हैं।
विज्ञापन
3 of 11
छोटी सी बात
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
किरदार : प्रभा नारायण
फिल्म : छोटी सी बात (1975)
विद्या को पर्दे पर एक बार फिर से चमकने का मौका बासु चटर्जी ने ही दिया। उन्होंने बी आर चोपड़ा के निर्माण में एक फिल्म 'छोटी सी बात' बनाई जिसमें विद्या सिन्हा के साथ अमोल पालेकर, अशोक कुमार और असरानी को मुख्य भूमिकाएं निभाते हुए देखा गया। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन, सुजीत कुमार, हेमा मालिनी और धर्मेंद्र ने भी कैमियो किए हैं। यह एक रोमांटिक कॉमेडी फिल्म है जिसमें विद्या ने प्रभा नारायण का किरदार निभाया है। प्रभा एक कामगार लड़की है जिसे अचानक एक दिन अरुण बस स्टॉप पर देख लेता है। पहली नजर में अरुण प्रभा की ओर आकर्षित होता है। हालांकि, प्रभा के पीछे पहले से ही उसके ऑफिस में काम करने वाला नागेश लगा हुआ है। फिर नागेश और अरुण में रेस होती है प्रभा को प्रभावित करने की। प्रभा यहां पर दो सज्जन पुरुषों के बीच फंसी हुई है लेकिन वह फैसला हालात पर ही छोड़ती है।
4 of 11
इंकार
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
किरदार : गीता चौधरी
फिल्म : इंकार (1977)
राज एन सिप्पी के निर्देशन में बनी इस फिल्म की घोषणा वर्ष 1975 में हुई थी। उस वक्त इस फिल्म के निर्देशन का काम रवि टंडन संभाल रहे थे और फिल्म में मुख्य अभिनेत्री थीं शर्मिला टैगोर। लेकिन, बाद में फिल्म 'इंकार' का निर्देशन राज सिप्पी को सौंपा गया और अभिनेत्री ली गईं विद्या सिन्हा। विद्या यहां अभिनेता विनोद खन्ना के साथ नजर आईं। 'इंकार' एक थ्रिलर फिल्म है जिसमें विनोद खन्ना एक सीआईडी अफसर अमरनाथ गिल के किरदार में हैं जबकि विद्या ने गीता चौधरी की भूमिका निभाई है। गीता के भाई हरिदास चौधरी के बेटे गुड्डू का अपहरण होता है तो उसे ढूंढ़ने की जिम्मेदारी अमरनाथ को सौंपी जाती है। अमरनाथ और गीता पहले से ही एक दूसरे से प्रेम करते थे। बताया जाता है कि विद्या और विनोद खन्ना के बीच इस फिल्म के दौरान नजदीकियां बढ़नी शुरू हो गई थीं। ये दोनों फिल्म से ज्यादा उन दिनों अपने निजी जिंदगी को लेकर चर्चाओं में थे।
विज्ञापन
5 of 11
कर्म
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
किरदार : आशा शास्त्री / साधना
फिल्म : कर्म (1977)
बी आर चोपड़ा के निर्देशन में बनी फिल्म 'कर्म' में मुख्य भूमिका निभाने के लिए विद्या सिन्हा बी आर चोपड़ा की पहली पसंद थीं। वह विद्या की फिल्म 'छोटी सी बात' में उनके काम से बहुत प्रभावित हुए थे इसलिए एक चुनौतीपूर्ण किरदार निभाने के लिए बी आर चोपड़ा ने इस फिल्म में विद्या को चुना। विद्या का किरदार इस फिल्म में आशा शास्त्री का है जो राजेश खन्ना के किरदार अरविंद से प्यार करती है। दोनों के माता-पिता शादी के लिए मान भी जाते हैं लेकिन शादी नहीं हो पाती। क्योंकि, अरविंद और आशा के ग्रह ठीक नहीं होते। बाद में अरविंद और आशा समाज की इन प्रथाओं को दरकिनार कर साथ रहने लगते हैं। इसी बीच आशा गर्भवती हो जाती है। लिव इन रिलेशनशिप का चलन जो आजकल हर जगह छाया हुआ है, वह बी आर चोपड़ा ने अपनी फिल्म 'कर्म' में 1977 में ही दिखा दिया था। गर्भवती होने के बाद आशा पूरी फिल्म में एक बिन ब्याही मां बनकर रहती है।
विज्ञापन
6 of 11
मुक्ति
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
किरदार : सीमा शर्मा
फिल्म : मुक्ति (1977)
दो बेहतरीन फिल्मों के बाद विद्या ने बड़ी फिल्मों में भी काम करना शुरू कर दिया था। वर्ष 1977 में वह नजर आईं राज तिलक के निर्माण और निर्देशन में बनी फिल्म 'मुक्ति' में। यहां विद्या ने सीमा शर्मा का किरदार निभाया। सीमा का पति कैलाश यौन उत्पीड़न के आरोप में फांसी की सजा पाता है। तब सीमा अपनी बच्ची पिंकी को लेकर जम्मू कश्मीर से मुंबई चली आती है। यहां सीमा को अपने पड़ोसी रतन से प्रेम हो जाता है और वह शादी कर लेती है। हालांकि, कैलाश 14 साल बाद फांसी के बजाय उम्र कैद की सजा काटकर मुंबई चला आता है। फिर सीमा के लिए शुरू होती हैं दुविधाएं। यहां भी सीमा को दो मर्दों में से एक को चुनना पड़ता है। इस ड्रामा फिल्म में विद्या के साथ शशि कपूर और संजीव कुमार मुख्य भूमिकाओं में हैं।
विज्ञापन
7 of 11
किताब
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
किरदार : कोमल गुप्ता
फिल्म : किताब (1977)
विद्या सिन्हा को समाज के हल्के फुल्के मुद्दों को उजागर करने वाली फिल्मों में खूब देखा गया। वर्ष 1977 में गुलजार ने जब अपनी फिल्म 'किताब' बनाई तो उन्होंने इस फिल्म के जरिए बताया कि बच्चों के लिए पढ़ना कितना जरूरी है? इस फिल्म में विद्या कोमल गुप्ता के किरदार में नजर आईं जिसका भाई बाबला पढ़ने लिखने का बिल्कुल शौकीन नहीं है। कोमल उसे पढ़ाने की बहुत कोशिश करती है और उसे स्कूल भी भेजती है। लेकिन, बाबला अक्सर स्कूल में अध्यापकों का मजाक उड़ाता है और कक्षा में गीत गाता है। कोमल अपने भाई से बहुत परेशान होती है। बाबला भी परेशान हो जाता है क्योंकि उसकी नजर में लोग बच्चों की भावनाएं नहीं समझते। हालांकि, एक घटना बाबला के साथ ऐसी घटती है कि उसकी समझ में आ जाता है कि पढ़ेंगे नहीं तो एक दिन फुटपाथ पर ही मर जाएंगे। यह कहानी पूरी बाबला की ही थी लेकिन कोमल के किरदार में विद्या भी आकर्षक लगीं।
8 of 11
पति, पत्नी और वो
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
किरदार : शारदा चड्ढा
फिल्म : पति पत्नी और वो (1978)
बी आर चोपड़ा ने विद्या सिन्हा को अपनी एक और फिल्म 'पति पत्नी और वो' में मुख्य भूमिका निभाने का मौका दिया। इस फिल्म में विद्या संजीव कुमार और रंजीता कौर के साथ नजर आईं। इस फिल्म का रीमेक पिछले ही साल मुदस्सर अजीज ने बनाया है जिसमें कार्तिक आर्यन, भूमि पेडनेकर और अनन्या पांडे ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं। कहानी से तो वाकिफ होंगे ही। फिर भी बी आर चोपड़ा की फिल्म में विद्या ने वह किरदार निभाया है जो नई फिल्म में भूमि ने निभाया। यानी संजीव कुमार की पत्नी का किरदार। एक घरेलू महिला शारदा के रूप में विद्या बहुत प्रभावशाली दिखीं। उनके काम की भी खूब तारीफें हुईं।
9 of 11
मीरा
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
किरदार : कृष्णा राठौर
फिल्म : मीरा (1979)
जिस तरह गुलजार ने विद्या सिन्हा को अपनी फिल्म 'किताब' में एक अहम किरदार दिया था। उसी तरह उन्होंने विद्या को वर्ष 1979 में आई फिल्म 'मीरा' में भी एक अहम किरदार दिया। इस फिल्म में मुख्य भूमिकाएं तो हेमा मालिनी, विनोद खन्ना, डॉ श्रीराम लागू, शम्मी कपूर ने निभाईं लेकिन विद्या ने भी इतनी बड़ी स्टार कास्ट से अपने हिस्से की तारीफें अलग से निकाल ही लीं। यह ड्रामा फिल्म भगवान श्री कृष्ण की परम भक्त मीरा की जिंदगी पर आधारित है। लेकिन, एक इतिहास के तौर पर, न कि किसी पौराणिक कथा की तरह। फिल्म में मीरा का किरदार हेमा मालिनी ने निभाया है और विद्या का किरदार कृष्णा राठौर का है जो मीरा की सगी बहन है। कहानी तो पूरी मीरा की ही है इसलिए कृष्णा हमेशा मीरा का साथ देती है।
10 of 11
लव स्टोरी
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
किरदार : सुमन डोगरा
फिल्म : लव स्टोरी (1981)
विद्या सिन्हा उस वक्त कोई 32 से 33 साल की ही रही होंगी फिर भी राहुल रवैल ने उन्हें अपनी फिल्म 'लव स्टोरी' में विजयता पंडित की मां का किरदार निभाने के लिए दिया। विद्या के ढलते करियर की यह अंतिम बड़ी फिल्म रही। दरअसल, बी आर चोपड़ा के साथ 'मुक्ति', 'कर्म' और 'पति पत्नी और वो' जैसी फिल्मों में काम करने के बाद विद्या कभी दोबारा ऊपर आ ही नहीं पाईं। उनका समय खत्म हो चुका था। उस समय अमिताभ बच्चन और जीतेंद्र बड़े अभिनेता थे लेकिन इनके साथ विद्या को कभी कोई फिल्म नहीं मिली। यही कारण है कि अच्छी फिल्मों में काम करने के बावजूद विद्या को कभी शीर्ष अभिनेत्री नहीं माना गया। इसी बीच जब फिल्म 'प्यारा दुश्मन' से अमजद खान के साथ उनके प्रेम संबंध होने की खबरें आने लगीं तो उन्हें लगातार बी ग्रेड फिल्में ही मिलती रहीं।
किरदार : मिसेज राणा
फिल्म : बॉडीगार्ड (2011)
विद्या सिन्हा ने राज सिप्पी की वर्ष 1986 में आई फिल्म 'जीवा' के बाद से हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को अलविदा कह दिया था। फिर वह सीधे नजर आईं वर्ष 2011 में आई सलमान खान की फिल्म 'बॉडीगार्ड' में। इस एक्शन कॉमेडी रोमांटिक ड्रामा फिल्म का निर्देशन सिद्दीकी ने किया और इसमें विद्या का किरदार रहा करीना कपूर के किरदार दिव्या राणा की मां का। दिव्या की जान को खतरा होता है इसलिए दिव्या के माता पिता उसकी हिफाजत के लिए एक बॉडीगार्ड नियुक्त करते हैं। यह बॉडीगार्ड दिव्या की हर तरह के खतरे से रक्षा करता है। करीना कपूर और सलमान खान के अलावा इस फिल्म में राज बब्बर, आदित्य पंचोली, चेतन हंसराज, हेजल कीच, महेश मांजरेकर भी अहम भूमिकाओं में हैं।