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Amrish Puri: सरकारी नौकरी छोड़कर फिल्मों में आए थे अमरीश पुरी, विलेन बनकर भी खूब हुए मशहूर

Mon, 15 Mar 2021 09:03 PM IST
दीपाली श्रीवास्तव एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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अमरीश पुरी - फोटो : Social Media
बॉलीवुड में ऐसे तमाम अभिनेता हुए हैं, जिन्होंने फिल्मों में विलेन का किरदार निभाया है और अपनी एक्टिंग से अलग छाप छोड़ी है। लेकिन ऐसा कुछ ही अभिनेताओं के साथ हुआ है, जिनके निगेटिव रोल्स को देखने के बाद भी दर्शक उनपर प्यार लुटाते थे। हम बात कर रहे हैं 'मोगैम्बो' के नाम से मशहूर अभिनेता अमरीश पुरी की। जिन्होंने अपनी ज्यादातर फिल्मों में विलेन का रोल निभाया लेकिन इसके बाद भी लोग उन्हें पसंद करते थे। आज भले ही वो हमारे बीच नहीं हैं लेकिन लोगों के जेहन में उनकी फिल्में और शानदार एक्टिंग आज भी बसी हुई है। आज हम आपको अमरीश पुरी से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें बताने जा रहे हैं। 
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अमरीश पुरी - फोटो : Instagram
अमरीश पुरी ने तमाम फिल्मों में काम करते हुए अपने शानदार अभिनय से लोगों का दिल जीता था। उनकी फिल्मों की लिस्ट में 'चाची 420', 'दामिनी', 'गर्दिश', 'गदर', 'घातक', 'दिलवाले दुल्हनियां ले जाएंगे', 'घायल', 'हीरो', 'करण अर्जुन', 'कोयला', 'मेरी जंग', 'मि. इण्डिया' और ना जाने कितनी हिट फिल्में शामिल हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि अभिनेता ने एक्टिंग के लिए सरकारी नौकरी छोड़ दी थी। जी हां, अमरीश पुरी फिल्मों में आने से पहले सरकारी नौकरी करते थे लेकिन फिल्मों में काम करने के शौक को पूरा करने के लिए उन्होंने उसे छोड़ दिया था।
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अमरीश पुरी - फोटो : Instagram
अमरीश पुरी ने करीब 21 साल तक कर्मचारी बीमा निगम में बतौर क्लर्क काम किया था। फिर एक दिन अमरीश की मुलाकात इब्राहिम अल्काजी से हुई। इब्राहिम ने अमरीश को थिएटर के बारे में बताया और उन्हें थिएटर करने की सलाह दे डाली। फिर अमरीश की मुलाकात सत्येदव दुबे से हुई, जो उस वक्त निर्देशक, अभिनेता और लेखक थे। सत्यदेव भले ही अमरीश से उम्र में छोटे थे, लेकिन अमरीश ने उन्हें अपना गुरु माना और उनके साथ काम करना शुरू किया। साल 1971 में आई फिल्म 'रेशमा और शेरा' में अमरीश पुरी ने अपनी एक्टिंग का जलवा दिखाया और फिल्म में दर्शकों को उनकी एक्टिंग काफी पसंद आई थी।

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अमरीश पुरी
अमरीश पुरी अपने अभिनय को लेकर बहुत गंभीर रहते थे। वो जो भी किरदार निभाते थे, उसमें जी जान लगा देते थे। उन्होंने धर्मवीर भारती का लिखा नाटक ‘अंधा युग’ में भी काम किया था और ये अमरीश की जिंदगी का पहला नाटक था। जिसमें अमरीश को धृतराष्ट्र का किरदार निभाना था लेकिन समस्या ये थी कि उन्हें अंधे बने रहने के दौरान लगातार आंखें खुली रखनी थी। कई तरकीब लगाई जा रही थी कि इस तरह का मुश्किल सीन कैसे होगा क्योंकि 17 मिनट के इस नाटक में अभिनेता के हिस्से में लंबे मोनोलॉग भी थे। लेकिन उन्होंने जब इस नाटक को करना शुरू किया तो एक भी डायलॉग बिना भूले और बिना पलक झपकाए, उन्होंने इसे निभाया था। लोग ये देखकर हैरान रह गये थे कि 17 मिनट तक बिना पलकें झपकाए आखिर अभिनेता ने ये कैसे कर लिया था।
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अमरीश पुरी - फोटो : Instagram
बॉलीवुड की स्थिति उस वक्त काफी अच्छी नहीं थी सितारों को यहां काम करने के लिए कई सालों तक संघर्ष करना पड़ता था। अमरीश पुरी ने भी अपनी पहचान बनाने के लिए सालों तक मेहनत की थी। वो नहीं चाहते थे कि उनके बेटे राजीव पुरी को भी संघर्ष करना पड़े। इसलिए उन्होंने अपने बेटे को फिल्म इंडस्ट्री में ना आने की सलाह दी थी। इस बात तो खुद उनके बेटे राजीव ने एक इंटरव्यू में बताया था।
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अमरीश पुरी की तस्वीर के आगे हर्षवर्धन पुरी - फोटो : Instagram
राजीव ने मर्चेंट नेवी की नौकरी ज्वाइन कर ली थी। राजीव पुरी भले ही फिल्मों में ना आये हो लेकिन अमरीश पुरी के पोते हर्षवर्धन पुरी बॉलीवुड में ही काम कर रहे हैं। हर्षवर्धन फिल्मों की दुनिया में बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर काम कर रहे हैं। उन्होंने फिल्म 'इश्कज़ादे', 'शुद्ध देशी रोमांस' और 'दावत-ए-इश्क' में बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर काम किया है।
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अमरीश पुरी - फोटो : सोशल मीडिया
अमरीश पुरी को मयेलोडिस्प्लास्टिक सिंड्रोम हो गया था, जिसके चलते उनकी तबियत खराब रहने लगी थी। अमरीश घर पर ही रहने लगे थे, लेकिन वो बेड पर हमेशा नहीं रहना चाहते थे। एक बार जब उनके बेटे राजीव ने उनसे पूछा था कि आप कैसे हैं? तो उन्होंने कहा कि मैं कल से बेहतर हूं। इसके बाद वो घर पर अचानक गिर पड़े और ब्रेन हैमरेज होने के कारण उनका 12 जनवरी 2005 को निधन हो गया था।
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