राही अनिल बर्वे
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यह वह समय था जब उन्होंने फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप के बारे में सुना था, जो अपने अंतहीन संघर्षों के बावजूद अपने दम पर सफल होने के लिए काफी दृढ़ थे। उन्हें पता था कि उन्हें कश्यप से मदद मांगनी होगी, क्योंकि उनकी मदद करने वाला कोई और नहीं था। जब राही की लघु फिल्म उनके पास पहुंची, तो अनुराग ने कहा, "मेरे पास एक पैसा भी नहीं है, लेकिन मैं तुम्बाड़ का निर्माण करूंगा, बस यह तय करना है कि कैसे। राही ने याद किया कि कैसे वह फिर से स्टूडियो की तलाश में निकल पड़े थे। निर्देशक ने आगे लिखा, "दिन में दो बार 90 मिनट लंबे तुम्बाड़ की कहानी सुनाने से मेरा गला खराब हो गया था। स्टूडियो के अधिकारी इसे सुनते थे, लेकिन बाद में कहते थे कि दिलचस्प विषय है, लेकिन भारतीय दर्शकों के लिए यह फिल्म काम नहीं कर सकती। महीनों तक चली अंतहीन बैठकों के बाद सभी स्टूडियो तुम्बाड़ को मना कर रहे थे और कुछ प्रोडक्शन हाउस के लगभग साथ आने के बावजूद, तुम्बाड़ दूसरी बार एक बार फिर से रुक गई।