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जब लगान की कहानी सुनते ही हैरान रह गए थे आमिर? जानिए फिल्म की मेकिंग से जुड़े रोचक किस्से

Sun, 07 Jul 2019 11:24 AM IST
Avinash Pal मनोरंजन डेस्क, अमर उजाला
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मेकिंग ऑफ लगान - फोटो : अमर उजाला
मौसम क्रिकेट का हो तो आमिर खान की फिल्म 'लगान' याद आती है। निर्देशक थे आशुतोष गोवारिकर। दुनिया भर में सराही गई थी। यह फिल्म। इस फिल्म के बनने की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं...। आशुतोष गोवारिकर को इस कहानी की ऐसी धुन चढ़ी कि वह इसे आमिर को सुनाने से खुद को रोक नहीं सके और सुबह मुंह अंधेरे ही इसे सुनाने पहुंच गए। आशुतोष मानते थे कि उनकी यह कहानी इतनी दमदार है कि इसे सुनकर किसी सोते हुए आदमी की नींद भी खुल जाएगी। लेकिन आमिर को ऐसा नहीं लगा।  
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lagaan - फोटो : file photo
आशुतोष को अहसास हुआ कि उन्हें कुछ ऐसा बनाना चाहिए, जिस पर उन्हें खुद भरोसा हो, तभी वह इसके दर्शकों को पंसद आने की आशा कर सकते हैं। आमिर के मना करने के बाद भी आशुतोष ने कहानी के विचार को विकसित करके एक पटकथा का रूप देने का मन बनाया। जब पटकथा पूरी हो गई तो उन्होंने आमिर से एक मीटिंग रखने को कहा। आशुतोष को लंबे समय तक प्रतीक्षा करवाने के बाद आमिर अंततः उनकी पटकथा सुनने को तैयार हो गए।
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lagaan
आशुतोष के कहानी सुनाने के बाद आमिर स्तब्ध रह गए। कहानी सुनते समय आमिर के मन में कई भाव उदय हुए। उन्हें 'लगान' की पटकथा बहुत अच्छी लगी। आमिर ने कहा, ''आशु तुम यह सब कैसे सोच सके? यह तो शानदार है।'' हालांकि वह समझ गए थे कि इस फिल्म की अनुभूति करवाना एक खर्चीला प्रयोग होगा। लेकिन आमिर की रचनात्मक महत्वाकांक्षा और चुनौतियों के प्रति प्रेम ने 'लगान' को अप्रतिरोध्य बना दिया। 

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बात जब संगीत की आई तो वो जानते थे कि इसके लिए ए.आर. रहमान ही उपयुक्त रहेंगे। रहमान इसके लिए तैयार हो गए; लेकिन आमिर चाहते थे कि वे इसके पूर्व पटकथा अवश्य सुनें। जिन रहमान के लिए निर्माता महीनों पंक्तिबद्ध प्रतीक्षा करते थे, उनसे यह किसी भी निर्माता द्वारा किया गया सबसे अस्वाभाविक अनुरोध था। आमतौर पर भाव-शून्य रहने वाले रहमान को आशुतोष की पटकथा पंसद आई। लेकिन रहमान के लिए फिल्म की शूटिंग शुरू होने से दो महीने पहले ही सब गीत तैयार कर लेना बड़ी चुनौती थी।
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Lagaan - फोटो : Lagaan
जब रहमान फिल्म का मुख्य सामूहिक गान लिख रहे थे, आमिर स्टूडियो के बाहर बैठे रहमान की प्रतीक्षा कर रहे थे। जब आमिर ने उसे सुना तो वह नम आंखें लिए अंदर दाखिल हुए और रहमान से बोले,''ए.आर. क्या अदभुत अहसास है! मेरी फिल्म तो बन गई!'' ''टाइम पत्रिका को बताए अपने संस्मरण में रहमान ने कहा,'मुझे आमिर की आंखों में बच्चों जैसे सच्चाई  दिखी।'
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भाषा में प्रामाणिकता व बोधगम्यता का संतुलन बनाए रखने के लिए अवधी संवाद कवि के. पी. सक्सेना से लिखवाए गए। इस फिल्म से आमिर की बहुत-सी महत्वाकांक्षाएं जुड़ी थीं। उन्होंने यह फिल्म वैश्विक दर्शकों को ध्यान में रखकर बनाई थी। इसी के चलते ऑस्कर में इसे सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा की फिल्म श्रेणी के लिए चुना गया।    
(छायाकार और लेखक प्रदीप चंद्र की पुस्तक ‘आमिर खान’ से।)
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