तापसी पन्नू को अपने किरदारों के जरिये अपने प्रशंसकों को चौंकाने में मजा आता है। फिल्म 'दोबारा' और 'शाबाश मिट्ठू' के बाद तापसी पन्नू की एक और लीक से इतर फिल्म 'ब्लर' भी ओटीटी प्लेटफार्म जी5 पर 9 दिसंबर को रिलीज हो रही है। इस फिल्म का निर्माण खुद तापसी पन्नू ने अपने प्रोडक्शन आउटसाइडर्स फिल्म्स के बैनर तले किया है। इस नाम के पीछे की कहानी के अलावा तापसी ने ‘अमर उजाला’ से एक खास बातचीत में ये भी बताया कि आखिर फिल्म फिल्म 'डंकी' में शाहरुख खान के साथ काम करने का मौका मिलने को वह अपना सौभाग्य क्यों मानती हैं।
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तापसी पन्नू
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
फिल्म 'ब्लर' की यूसपी क्या है? इसे बनाने के लिए आपको निर्माता बनना पड़ा या निर्माता बनने का फैसला लेने के बाद आपने ये कहानी चुनी?
अपना बच्चा तो सबको प्यारा होता है। मेरी कोशिश यही रहती है कि ऐसी फिल्म में काम करूं, जिसे देखकर किसी का समय बर्बाद ना हो। मैं यह नहीं कहती कि आपने 'ब्लर' जैसी फिल्म पहले कभी नहीं देखी होगी । यह ऐसी डराने वाली फिल्म है जिसमें भूत नहीं है। जो लोग थ्रिलर फिल्में देखना पसंद करते हैं, उनको फिल्म देखकर मजा आएगा। इस फिल्म को पहले मैंने एक कलाकार के रूप में साइन कर लिया था। निर्माता के रूप में और भी फिल्में कर रही थी, जिसमे एक्टर नहीं हूं। मुझे लगा कि 'ब्लर' मुझे खुद प्रोड्यूस करनी चाहिए क्योंकि इस फिल्म को अपने तरीके से बनाना चाह रही थी।
आपके प्रशंसक अब आपको ओटीटी क्वीन कहकर बुलाने लगे हैं, इस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?
मेरी इस साल दो फिल्में 'लूप लपेटा' के बाद 'ब्लर' ओटीटी पर आ रही है और 'दोबारा', 'शाबाश मिट्ठू' थिएटर में आई हैं। अगले साल पता नहीं कितनी फिल्में ओटीटी पर आएगी। अगर मेरे मेरे प्रशंसक कहीं भी मुझे देख रहे हैं और अपनी जिंदगी का समय मुझे दे रहे हैं। उससे मैं बहुत खुश हूं। आज किसी के पास समय नहीं है। पैसे तो फिर भी कमाए जा सकते हैं, लेकिन समय नहीं। मेरे प्रशंसक मुझे ओटीटी या थियेटर कहीं भी देख रहे हैं तो, उससे बड़ी खुशी की बात मेरे लिए और क्या हो सकती है।
क्या महिला प्रधान फिल्मों के लिए सिनेमाघर मिलने मुश्किल हो रहे हैं?
बिल्कुल, जब भी मेरी फिल्म रिलीज हुई है तो उसे बाकी स्टार्स के मुकाबले कम स्क्रीन मिले हैं। चाहे वो बड़ा स्टार हो या छोटा स्टार, ज्यादा स्क्रीन मिले इसके लिए काफी संघर्ष करना पड़ा। पहले मुझे बहुत बुरा लगता था। लेकिन अब बुरा नहीं लगता, अब मैं इस प्रयास में हूं कि लोगों की मानसिकता बदले और उम्मीद करती हूं कि एक दिन ऐसा समय आएगा। जब महिला प्रधान फिल्मों को लोग थियेटर में प्राथमिकता देंगे।
आपकी कंपनी का नाम आउटसाइडर्स फिल्म्स है, इस नाम को रखने के पीछे क्या सोच रही? एक आउटसाइडर्स होने का क्या कभी आपको भी नुकसान हुआ?
कुछ साल पहले इंडस्ट्री में आउटसाइडर्स और इनसाइडर्स को लेकर काफी बातें होती थी। आउट साइडर्स को विक्टिम की तरह देखा जाता था। आउट साइडर्स को लोग लोअर क्लास का आदमी समझते थे। तब मुझे बहुत बुरा लगता था। मुझे तो लगता है कि मेरा ट्रंप कार्ड ही है कि मैं आउटसाइडर्स हूं। मुझे ऐसे ही किरदार से पहचान मिली। तब मेरी समझ में आया कि मैं विक्टिम कैसे हो गई? किसी से भी किसी भी मामले में कम कैसे हूं? तो एक दिन मैंने प्रांजल को बोला कि हम दोनो ही बिना किसी के सपोर्ट के इंडस्ट्री में हैं तो क्यों ना अपने प्रोडक्शन का नाम सम्मान और गर्व के साथ आउटसाइडर्स रखे। ताकि लोग आउटसाइडर्स को विक्टिम की तरह ना बोले।
आपको पैन इंडिया कलाकार माना जाता है, शायद इसी सोच के चलते राजकुमार हिरानी ने आपको 'डंकी' में भी लिया, शाहरुख खान के साथ काम करने का अब तक का अनुभव कैसा रहा?
जब मैं दस साल पहले बॉलीवुड में आई थी तो मेरे लिए यह माइनस प्वाइंट था कि मैं साउथ से आई हूं। दस पहले हमें बताया जाता था कि आपको यह बात भुलानी पड़ेगी कि आप साउथ इंडस्ट्री से है। मैं पूछती थी क्यों? तो लोग कहते थे कि यहां के लोग आपको हिंदी फिल्म की हीरोइन के रूप में स्वीकार नहीं करेंगे। उस यह समय अच्छा टैग नहीं माना जाता था, लोग कहते थे कि आप क्षेत्रीय सिनेमा से आए हो। अचानक यह टैग बदल गया तो मुझे बहुत हंसी आती हैं। मेरे साथ 10 साल पहले जो समस्या थी, आज मेरे लिए सौभाग्य बन गया। मैं अपने आप को काफी भाग्यशाली मानती हूं कि मैं 'डंकी' का हिस्सा हूं। यह फिल्म मुझे मेरी योग्यता पर मिली है। राजकुमारी हिरानी की फिल्म हो और शाहरुख खान के साथ अगर रोमांस करने का मौका मिले तो दो सीन भी होता तो मैं कर लेती। यह फिल्म मुझे मेरे बलबूते पर मिली है, इस बात की बहुत खुशी है मुझे।
पहली फिल्म कौन सी देखी आपने शाहरुख खान की और उनके साथ पहला सीन कौन सा किया फिल्म 'डंकी' का,क्या अनुभव रहा उस दिन का ?
ये तो मुझे याद नहीं है, लेकिन शाहरुख खान ऐसे स्टार हैं जिनकी सबसे ज्यादा फिल्में देखी हैं। मैने अपनी जिंदगी में फिल्में बहुत देर से देखनी शुरू की, क्योंकि मेरे माता पिता को फिल्में देखने का शौक नहीं था। टीवी पर ही फिल्में देख लेती थी। जब कॉलेज में आई तब से थियेटर में फिल्में देखना शुरू किया। उस समय जितने भी स्टार्स की फिल्में आती थी, उनमें से सबसे ज्यादा फिल्में शाहरुख खान की ही देखती थी। आज भी उनकी कोई फिल्म जब रिलीज होती है तो वीकेंड पर जरूर देखती हूं। रही बात 'डंकी' के बारे में तो, वह सब बाद में बताऊंगी अभी फिल्म रिलीज होने में 10 महीने बाकी हैं।
'शाबास मिट्ठू' साल 2022 की बेहतरीन फिल्मों में गिनी जाती है, साल 2022 में रिलीज हो रही 'ब्लर' आपकी चौथी फिल्म है, कितनी संतुष्ट हैं आप इस साल में बतौर कलाकार अपनी प्रगति से?
इस साल मेरी 'लूप लपेटा', 'दोबारा', 'शाबास मिट्ठू' और 'ब्लर' चौथी फिल्म है। इस साल की मेरी सबसे बड़ी सीख यह है कि फिल्म जब हिट और फ्लॉप होती है तो संख्या से ज्यादा इसका फैसला समय करता है। कला के लिए समय सबसे बड़ी करेंसी है। अगर मेरी फिल्म 10 साल बाद भी देखी जा सकती है तो मैं समझती कि मेरी फिल्म हिट है। कभी कभी समझ में नहीं आता कि फिल्म में ऐसा क्या था जो दर्शकों को पसंद आया। मैं इसी कशमकश में रहती थी फिर सोचा कि आज से आठ दस साल बाद पता चलेगा कि कौन सी फिल्म हिट थी। आज लोग दस साल पहले की ब्लॉकबस्टर फिल्मों को भूल जाते हैं और ऐसी फिल्मों को याद रखते हैं जिन्हें थियेटर में रिलीज के समय कोई देखने भी नहीं गया होगा।
एक कलाकार की प्रगति में निर्देशक का बहुत बड़ा हाथ होता है, हिंदी सिनेमा के किन निर्देशकों के साथ आप बार बार काम करना चाहती हैं और क्यों?
मुझे मणिरत्नम के साथ काम करना है। जब मैंने अपनी साउथ की पहली फिल्म की थी तब से यह बात बोलती आई हूं। यह बात मैंने मणिरत्नम सर को भी बोली है और उन्होंने बहुत ही प्यार से जवाब दिया कि जल्दी काम करेंगे। लेकिन उनके साथ काम करने का अभी तक संयोग बन ही नहीं पाया। मणिरत्नम मेरी विश लिस्ट में टॉप पर हैं। 'पीएस 1' की शूटिंग के दौरान जब उनसे फिल्म सिटी में मुलाकात हुई थी तब भी उनको याद दिलाया था। देखते हैं कब उनके साथ काम करने का मौका मिलता है।
और, नए साल में कोई बड़ी खुशखबरी देने वाली हैं, अपने प्रशंसकों को?
मैं यही कहना चाहूंगी कि अब तक मुझे आप लोगों ने स्ट्रेसफुल वाले किरदार में देखे हैं, नए साल में ऐसे किरदार में नहीं देखेंगे। अब मैं कॉमेडी करने वाली हूं, अब मेरा दिमाग स्ट्रेसफुल वाले किरदार करके थक चुका था। अब मेरे किरदार के नए पहलू दर्शकों को देखने को मिलेंगे। प्रतीक गांधी की फिल्म 'वो लड़की है कहां' पूरी तरह से कॉमेडी फिल्म है। इसमें पुलिस की भूमिका निभा रही हूं। उनके बाद 'डंकी' में राजू हिरानी की ह्यूमरस कॉमेडी देखने को मिलेगी। एक दो फिल्में और हैं जिनकी घोषणा होनी बाकी है, वो भी मजेदार और एंटरटेनर फिल्म होगी।