sushmita sen
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सुष्मिता ने आगे कहा- 'कपड़े का फैब्रिक कैसा है दूर से उन्हें नहीं पता चलेगा। तो हम सरोजनी नगर बाजार गए। नीचे, गैराज में टेलर बैठते थे जो पेटिकोट सिलते थे। हमने उन्हें सामान दिया और बोला कि यह टीवी पर आने वाला है इसलिए काम अच्छा करना। उस कपड़े से सरोजनी नगर के उस टेलर ने मेरा गाउन सिला। मेरी मां ने बचे हुए कपड़े से एक गुलाब बनाया। हमने काले रंग की नई जुराब खरीदी और काटकर, लास्टिक डालकर दस्ताने बनाए।'