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जन्मदिन विशेष: रेडियो अनाउंसर से मंत्री तक, ऐसा था सुनील दत्त का फिल्मी और राजनीतिक सफर

Sun, 06 Jun 2021 11:43 AM IST
दीपाली श्रीवास्तव एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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सुनील दत्त - फोटो : सोशल मीडिया
अभिनेता, निर्देशक, निर्माता और राजनेता रहे सुनील दत्त ने जिस भी क्षेत्र में कदम रखा वहां उन्होंने लाजवाब ख्याति प्राप्त की। फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखने से पूर्व रेडियो अनाउंसर के तौर पर काम करने वाले सुनील दत्त ने फिल्मों में नायक से लेकर खलनायक दोनों तरह के किरदार निभाए। वह जब पांच वर्ष के थे तभी उनके पिता दीवान रघुनाथ दत्त की मृत्यु हो गई थी। उनकी परवरिश उनकी मां कुलवंती देवी ने की थी। सुनील दत्त आज ही के दिन यानी 6 जून 1929 को झेलम में पैदा हुए थे, जो अब पाकिस्तान में है। सुनील दत्त ने साल 1955 में फिल्म 'रेलवे प्लेटफॉर्म' से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की। अभिनेता का असली नाम बलराज दत्त था। लेकिन फिल्मों में आने के बाद उन्होंने अपना नाम बदल लिया था। सुनील दत्त ने अपने छह दशक के लंबे फिल्मी करियर में 50 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय किया था। आज सुनील दत्त के जन्मदिन के मौके पर हम आपको उनसे जुड़ी कुछ खास बातें बताने जा रहे हैं।

बसों में की कंडक्टर की नौकरी
सुनील दत्त पढ़ाई करने के लिए मुंबई आ गए थे। लेकिन घर की आर्थिक स्थिति अच्छी न होने की वजह से उन्होंने मुंबई की बसों में कंडक्टर की नौकरी कर ली। अपने अभिनय और आवाज से सुनील दत्त लोगों का दिल जीत लेते थे।
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सुनील दत्त - फोटो : सोशल मीडिया
ऐसे मिली थी रेडियो में आरजे की नौकरी
सुनील दत्त हमेशा से एक्टर बनना चाहते थे और इसलिए वो कॉलेज के नाटकों में भाग जरूर लेते थे। एक बार वो अपने कॉलेज में नाटक कर रहे थे। इस प्ले को देखने के लिए रेडियो के प्रोग्रामिंग हेड आए हुए थे। सुनील दत्त की आवाज सुनकर वो काफी प्रभावित हुए और उन्होंने एक्टर आरजे की नौकरी का ऑफर दे डाला। सुनील ने तुरंत हां कर दी और उन्हें इस नौकरी के लिए 25 रुपये सैलरी मिलने लगी। एक्टर रेडियो सेलॉन में हिंदी के सबसे प्रसिद्ध अनाउंसर थे।
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मदर इंडिया का दृश्य - फोटो : सोशल मीडिया
पर्दे पर नरगिस के बेटे का निभाया रोल
आज लोग भले ही सुनील दत्त को सिनेमा जगत के सुपरस्टार के तौर पर जानते हैं लेकिन असल में उनका जीवन बहुत संघर्षों भरा रहा। रेडियो थिएटर में काम करते हुए बॉलीवुड पहुंचे सुनील दत्त ने अभिनय की दुनिया में भी धूम मचा दी। सुनील दत्त ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत 'रेलवे प्लेटफॉर्म' से कर दी थी लेकिन उन्हें पहचान मिली फिल्म 'मदर इंडिया' से। इस फिल्म में उन्होंने बिरजू का किरदार निभाया था। फिल्म में उन्होंने नरगिस के बेटे का रोल अदा किया था। डकैतों के जीवन पर बनी फिल्म 'मुझे जीने दो'  के लिए उन्हें फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार मिला। सुनील दत्त ने कई फिल्मों में काम किया और सुजाता, रेशमा और शेरा, मिलन, नागिन, जानी दुश्मन, पड़ोसन, जैसी फिल्मों के लिए वो हमेशा याद किए जाते रहेंगे। 

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सुनील दत्त, नरगिस
निर्देशन में भी आजमाया हाथ
अभिनय के साथ ही उन्होंने फिल्म निर्माण और निर्देशन में भी हाथ आजमाए। सुनील दत्त ने 1964 में एक प्रयोगधर्मी फिल्म 'यादें' बनाई थी। इस फिल्म का नाम सबसे कम कलाकार वाली फिल्म के रूप में गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज है। इस फिल्म के आखिरी सीन में नरगिस एक छोटे से किरदार में नजर आई हैं। बाकी फिल्म में सुनील के अलावा कोई और एक्टर नहीं है। इस फिल्म की कहानी लिखी थी सुनील दत्त की पत्नी नरगिस दत्त ने। फिल्म में एक ऐसे पति की कहानी है जिसकी पत्नी उसे छोड़कर चली गई है और वो उससे जुड़ी बातों को याद करता है।
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सुनील दत्त, नरगिस - फोटो : सोशल मीडिया
सुनील दत्त का था मजाकिया अंदाज
पंढरी जुकर 1958 से 2005 तक सुनील दत्त के मेकअप मैन और फोटोग्राफर रहे थे। ऐसा ही एक किस्सा साझा करते हुए पंढरी दादा ने बताया था, 'फिल्म हमराज के लिए मैं उनका 110 साल के बूढ़े के किरदार के लिए मेकअप कर रहा था। तभी उनसे मिलने नरगिस जी आ गईं। उन्होंने दत्त साहब से ही पूछ लिया कि बाबा दत्त साहब कहां हैं। ये सुनते ही दत्त साहब ने मुझे कुछ ना बताने का इशारा किया और पूरे दो घंटे के इंतजार के बाद जब नरगिस चलने लगीं तो मुझे बुरा लगा। मैंने नरगिस जी को कहा दत्त साहब आपके बगल में ही हैं। यह सुनते ही नरगिस हैरान हो गईं और दत्त साहब जोर से हंस पड़े। नरगिस जी मेरे पास आईं और कहने लगीं आपने मेरे पति का ऐसा मेकअप किया कि उनकी पत्नी होते हुए भी मैं उन्हें नहीं पहचान पाई। तब उन्होंने मुझे अपनी कीमती घड़ी यादगार के तौर पर दी।'
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सुनील दत्त
राजनीति में भी मनवाया लोहा
सुनील दत्त ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत साल 1984 से की। मुंबई के उत्तर पश्चिम लोकसभा सीट से उन्हें सफलता मिली और उन्हें कांग्रेस पार्टी का सांसद चुना गया। सिनेमा के बाद दत्त साहब ने राजनीति में भी अपनी प्रतिभा और व्यक्तित्व का लोहा मनवाया। मनमोहन सरकार में सुनील दत्त युवा और खेल विभाग के मंत्री और दो बार सांसद बने थे। साल 2005, 25 मई को दिल का दौरा पड़ने से सुनील दत्त का निधन हो गया और हमने एक बेहतरीन इंसान और सितारा खो दिया।
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