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Hashiye Ke Superstar 6: घरों में बर्तन धोने वाले सुभाष बने फिल्म निर्माता, कैटरीना के मेकअपमैन की प्रेरक कहानी

Tue, 08 Nov 2022 04:59 PM IST
हर्षिता सक्सेना अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

सार

ये कहानी है उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में किरिरापुर ब्लॉक के गांव उधरन से ताल्लुक रखने वाले सुभाष सिंह की। सुभाष ने सिनेमा के शुरुआती सबक मशहूर अभिनेता दिलीप कुमार के संग सीखे।
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हाशिए के सुपरस्टार - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
चार साल की उम्र में अपने पिता को खो देने वाला उत्तर प्रदेश के बलिया जैसे जिले का कोई बच्चा अगर हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में अपनी कला के बूते किसी क्षेत्र में सबसे ऊंची पायदान पर पहुंचने में कामयाब रहे तो इसे लगन, समर्पण और मेहनत का जीता जागता उदाहरण ही माना जा सकता है। ये कहानी है उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में किरिरापुर ब्लॉक के गांव उधरन से ताल्लुक रखने वाले सुभाष सिंह की। सुभाष ने सिनेमा के शुरुआती सबक मशहूर अभिनेता दिलीप कुमार के संग सीखे। उन्होंने सुभाष को जब पहली बार ‘पंढरी’ कहकर पुकारा और सुभाष को जब अंदाजा हुआ कि ये नाम इंडस्ट्री के सबसे दिग्गज मेकअपमैन का है तो बस उन्होंने इस नाम को ही सार्थक करने का मन बना लिया। आइए जानते हैं सुभाष सिंह की कहानी, उन्हीं की जुबानी...
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सुभाष सिंह - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
मां ने पाल पोस कर बड़ा किया
'जब मैं चार साल का था तभी पिता जी की मृत्यु हो गई। मां ने ही हमें पाल पोस कर बड़ा किया। पिताजी की गांव में कुछ जमीन थी। मां ने ये भी सोचा कि गांव की जमीन बेचकर हमारी ठीक से परवरिश कर सकेंगी। लेकिन, पिताजी के भाइयों ने हमें बहुत परेशान किया, हमारे ऊपर सांप और बिच्छू छोड़ दिए गए। हमारी बहुत बेइज्जती हुई और हमें मारकर गांव से भगा दिया। उसके बाद से आज तक कभी अपने गांव नहीं गए।'
 

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सुभाष सिंह - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
घरों में कपड़े और बर्तन धोए
‘मुंबई आने के बाद हम लोग बांद्रा (पूर्व ) के भारत नगर में रहते थे। पढाई के साथ साथ मैं दूसरों के घरों में जाकर कपड़े और बर्तन साफ करता था और शाम को बांद्रा के लिंकिंग रोड पर एक जूते चप्पल की दुकान पर भी काम करता था।  मेरी बहन चंदा ने दिलीप कुमार और सायरा बानो के पर्सनल असिस्टेंट कम ड्राइवर अहमद से शादी कर ली। लिंकिंग रोड से अभिनेता दिलीप कुमार का पाली हिल बंगला नजदीक था तो मैं कभी कभी वहां खाना खाने चला जाया करता था। बड़े आदमियों का बड़प्पन कैसा होता है, ये मैंने पहली बार दिलीप कुमार में ही देखा।’

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सुभाष सिंह - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
दिलीप साब ने दिया हौसला
‘ये उन दिनों की बात है जब दिलीप कुमार 'कर्मा' की शूटिंग कर रहे थे। अहमद भाई का साला होने के चलते दिलीप साब मुझे बहुत दुलार करते थे। कभी कभार तो मैं स्कूल न जाकर दिलीप साब के बंगले जा पहुंचता और अक्सर उनकी गाड़ी में बैठकर शूटिंग देखने चला जाता। ये फिल्म ‘कर्मा’ की शूटिंग के वक्त की बात है। दिलीप साहब एक दिन बोले,  'क्या रे पंढरी, तू तो रोज ही शूटिंग देखने आ जाता है, तुझे अगर इतना शौक है तो इंडस्ट्री क्यों नहीं ज्वाइन कर लेता?' पंढरी जुकर हिंदी सिनेमा के बहुत बड़े मेकअप आर्टिस्ट हुए हैं।’

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सुभाष सिंह - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
ब्याज पर रकम लेकर कार्ड बनवाया
‘दिलीप साब की बात मेरे दिल में घर कर गई। मैंने तय कर लिया कि मुझे भी इसी इंडस्ट्री में आना है। लेकिन मेरी मां नहीं मा रही थीं। मेरे घर में तो तब टीवी भी देखने की अनुमति नहीं थी।  फिर मैंने अपनी दीदी चंदा से बात की। उन्होंने किसी तरह मां को समझाया। उस समय मेकअप आर्टिस्ट का यूनियन कार्ड 5400 रुपये में बनता था। (मुंबई फिल्म इंडस्ट्री में किसी भी फिल्म की यूनिट में शामिल होने के लिए संबंधित क्राफ्ट की यूनियन की सदस्यता लेना जरूरी है) जहां मैं काम करता था वहां से 10 प्रतिशत की ब्याज पर मैंने 5400 रुपये उधार लि। अगले दिन ही से मुझे काम मिल गया और पहली बार मैं शूटिंग पर बतौर सहायक लखनऊ गया तो मुझे 50 दिन के दो हजार रुपये मिले। तब मेरी उम्र सिर्फ 14 साल थी।'

 
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सुभाष सिंह, कटरीना कैफ - फोटो : Social media
पंढरी दादा का एकलव्य बना
‘लखनऊ से लौटने के बाद मुझे पंढरी दादा के सहायक के रूप में धारावाहिक 'चुनौती' में काम करने का मौका मिला। पंढरी दादा ऐसे मेकअप आर्टिस्ट रहे जिन्होंने अपनी कला किसी को कभी नहीं सिखाई। मैंने उनका ‘एकलव्य’ बनने की ठान ली। घर पर मम्मी और दीदी का मेकअप करना शुरू किया। दिमाग में हमेशा पंढरी दादा का काम रहता। पूरी अलमारी पर मैंने श्रीदेवी और रेखा की फोटो में से उनके होंठ और आंखें काटकर चिपका ली। बस उन्हीं को देख देखकर मैं मेकअप सीख गया। किसी कलाकार के पर्सनल मेकअप मैन के तौर पर मैंने उपासना सिंह का काम पाया। फिर डिंपल कपाड़िया के साथ एक बार काम किया तो उन्होंने अपने पास ही रख लिया। वहां रहते हुए मैंने उनकी बेटी ट्विंकल, रिंकी और कभी कभी सनी देओल का भी मेकअप किया। तब मुझे 40 हजार रुपये महीने वेतन मिलने लगा था।’

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सुभाष सिंह - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
13 साल तक रहा कटरीना का साथ
‘ट्विंकल उन दिनों निर्देशक राज कंवर की फिल्म 'इतिहास' और निर्देशक धर्मेश दर्शन की फिल्म 'मेला' में काम कर रही थीं। राज कंवर जी को मेरा मेकअप इतना पसंद आया कि उनकी फिल्म में हीरोइन कोई हो, मेकअप करने के लिए वह मुझे ही बुलाते थे। वहां से जूही चावला, प्रियंका चोपड़ा, लारा दत्ता, दिया मिर्जा, जैकलीन फर्नाडिस जैसी कई नामचीन अभिनेत्रियों के पर्सनल मेकअप मैन बनने के बाद मुझे कैटरीना कैफ के साथ राज कंवर की फिल्म 'हमको दीवाना कर गए' में काम करने का मौका मिला। कैटरीना कैफ ने फिर मुझे किसी और के साथ जाने नहीं दिया। पर्सनल मेकअप आर्टिस्ट के तौर मैं उनके साथ फिल्म 'सूर्यवंशी' तक 13 साल रहा। इस बात का मुझे हमेशा अफसोस रहेगा कि मैं उनकी शादी में नहीं जा पाया। उन दिनों मैं एक फिल्म की शूटिंग के सिलसिले में विदेश में था।’

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सुभाष सिंह - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
मेहनत से हर मंजिल मुमकिन
‘मेकअप आर्टिस्ट के करियर में तरक्की के मौके बहुत हैं। मैंने शुरुआत की तो मुझे 50 दिन के दो हजार रूपये मिले थे। आखिर तक आते आते मैंने महीने का 12 से 15 लाख रुपये कमाना शुरू कर दिया था। शूटिंग अच्छे निर्माता की हो तो मेकअप आर्टिस्ट को 20 हजार रुपये प्रतिदिन तक मिल जाता है और शूटिंग किसी बड़े विज्ञापन की हो, कलाकार ए लिस्टर हो तो एक ही दिन के डेढ़ से दो लाख रुपये तक मिल जाते हैं। मैंने मुंबई फिल्म जगत में पैसा और नाम खूब कमाया। फिर 35 साल तक ये काम करने के बाद मैंने इससे स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति ले ली कि अब नई पीढ़ी को आगे बढ़ाना चाहिए।’

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सुभाष सिंह - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
अब खुद बन गया फिल्म निर्माता
‘सिनेमा से जो मैंने पाया, वह अब मैं फिल्में बनाकर सिनेमा को लौटाना चाहता हूं। कटरीना कैफ के साथ काम करते हुए मैंने पहली बार 50 दिन की छुट्टी लेकर एक पंजाबी फिल्म 'इक जिंद इक जान' बतौर सह निर्माता बनाई। फिर जूही चावला और शबाना आजमी की फिल्म 'चॉक एन डस्टर' में भी सह निर्माता रहा। इन दिनों बतौर निर्माता मेरी तीन फिल्मों 'एलिस इन तालिबान', 'ट्रेन यूक्रेन' और 'मवान' पर काम चल रहा है।’
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