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Soumitra Chatterjee: सौमित्र चटर्जी की ये हैं 10 कालजयी फिल्में, एक तो मार्टिन स्कोर्सेसे ने लपक ली

Tue, 19 Jan 2021 11:34 AM IST
स्वाति सिंह अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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सौमित्र चटर्जी - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
बंगाली सिनेमा के सुपरस्टार अभिनेता सौमित्र चटर्जी पिछले साल नवंबर में ही इस दुनिया से विदा हो गए। लेकिन, पीछे छोड़ गए हैं अपनी फिल्मों की खूबसूरत विरासत जिसके दम पर वह इस दुनिया में हमेशा जिंदा रहेंगे। इस विरासत को सौमित्र ने अकेले नहीं बनाया, बल्कि इसमें हाथ रहा सत्यजीत रे, मृणाल सेन, तपन सिन्हा, असित सेन, तरुण मजूमदार जैसे फिल्मकारों का। इन सबके साथ सौमित्र ने लाजवाब काम किया लेकिन वह सबसे ज्यादा पसंदीदा रहे फिल्मकार सत्यजीत रे के। इन दोनों ने साथ में कुल 14 फिल्मों में काम किया और हर एक फिल्म के साथ नया इतिहास रचा। आज मौका है सौमित्र के जन्मदिन का तो उनकी सत्यजीत रे के साथ 10 बेहतरीन फिल्मों की बात करते हैं।
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अपूर संसार (1959) - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

अपूर संसार (1959)

फिल्मों में सौमित्र और सत्यजीत रे की जोड़ी बनना इत्तेफाक से शुरू हुई थी। दरअसल, सौमित्र एक बार सत्यजीत की फिल्म 'जलसाघर' की शूटिंग देखने गए थे। जब सत्यजीत की नजर सौमित्र पर पड़ी तो उन्होंने अपने मन ही मन उन्हें अपनी अगली फिल्म 'अपूर संसार' में साइन कर लिया था। हालांकि, इस बारे में सौमित्र नहीं जानते थे। सत्यजीत ने अचानक से सौमित्र का लोगों से परिचय सौमित्र चट्टोपाध्याय कहकर करवाया और बताया कि यह उनकी अगली फिल्म के हीरो है। इस बात ने किसी और को तो कम लेकिन सबसे ज्यादा सौमित्र को ही आश्चर्य में डाल दिया। आगे फिर सब इतिहास है।

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फिल्म-देवी - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

देवी (1960) 

सौमित्र ने अपने करियर की दूसरी फिल्म 'देवी' भी सत्यजीत रे के निर्माण और निर्देशन में ही की। यहां भी सौमित्र के साथ अभिनेत्री शर्मिला टैगोर मुख्य भूमिका में नजर आईं। यह कहानी शर्मिला टैगोर के किरदार दोयमोई की है जिसके ससुर कालिकिंकर चौधरी उसे देवी समझकर पूजने लगते हैं। जब दोयमोई के पति उमाप्रसाद को भनक लगती है तो वह दोयमोई को अपने घर से ले जाने की तैयारी कर लेता है ताकि मोहल्ले में उसकी देवी होने की अफवाह खत्म हो सके। यहां उमाप्रसाद का किरदार सौमित्र ने निभाया है। सौमित्र और सत्यजीत की यह फिल्म बड़ी हिट हुई।

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तीन कन्या - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

तीन कन्या (1961)

कहानियों के संकलन वाली फिल्मों का चलन तो आजकल ज्यादा है लेकिन सत्यजीत रे ने तो वर्ष 1961 में ही 'तीन कन्या' शीर्षक वाली एंथोलॉजी फिल्म बनाई है। जैसा कि फिल्म का शीर्षक है, उस हिसाब से इस फिल्म की कहानियां भी तीन रहीं। हालांकि, फिल्म को जब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर रिलीज किया गया तो इसमें सिर्फ दो ही कहानियां 'द पोस्टमास्टर' और 'समाप्ति- द कन्फ्यूजन' दिखाई गईं। दूसरे नंबर की कहानी 'मोनिहारा- द लॉस्ट ज्वेल' को अंतर्राष्ट्रीय वर्जन में छोड़ दिया गया। सौमित्र इस फिल्म की अंतिम कहानी का हिस्सा रहे जिसमें उन्होंने अमूल्य नाम का किरदार निभाया।

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अभिजान - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

अभिजान (1962)

सौमित्र चटर्जी और सत्यजीत रे की जोड़ी एक बार फिर से बनी वर्ष 1962 की फिल्म 'अभिजान' में। इस फिल्म में सत्यजीत की फिल्मों के वह सभी तत्व मिलते हैं जिनके लिए सत्यजीत को जाना जाता है। फिल्म में सौमित्र चटर्जी ने मुख्य अभिनेता की भूमिका निभाई। उनका किरदार नारा सिंह का रहा जो एक कैब ड्राइवर है। नारा सिंह के किरदार से प्रेरित होकर मार्टिन स्कोर्सेसे ने वर्ष 1976 में अपनी फिल्म 'टैक्सी ड्राइवर' बनाई जिसमें कैब ड्राइवर की मुख्य भूमिका निभाई अभिनेता रॉबर्ट डे नीरो ने। मार्टिन ने खुद भी अपने काम को सत्यजीत से प्रेरित बताया।

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चारुलता - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

चारुलता (1964)

जब 1964 में सत्यजीत रे और सौमित्र चटर्जी की जोड़ी बनी तो इस जोड़ी ने अपनी सबसे बेहतरीन फिल्मों में से एक 'चारुलता' बना डाली। इस फिल्म में सत्यजीत रे के काम की बहुत सराहना हुई। खास तौर पर फिल्म का पहला दृश्य और आखिरी दृश्य। पहले दृश्य में दिखाते हैं कि चारु बिना कुछ बोले अकेली है और वह दूरबीन से बाहर की दुनिया को निहार रही है। वहीं, अंतिम दृश्य ऐसा है कि चारु और उसका पति एक दूसरे के करीब आते हैं हाथ थामते हैं और पर्दा वहीं रुक जाता है। सिनेमा में पर्दा रोक देने वाली कला का सत्यजीत ने इस फिल्म में बेहतरीन उपयोग किया है। सौमित्र का किरदार फिल्म में अमल का है जो अपने चचेरे भाई की पत्नी को ही दिल दे बैठता है।

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अरण्यर दिन रात्रि - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

अरण्यर दिन रात्रि (1970)

सत्यजीत रे अपनी ज्यादातर फिल्मों का लेखन भी खुद ही करते थे और निर्देशन भी। उन्होंने वर्ष 1970 में फिल्म 'अरण्यर दिन रात्रि' बनाई जिसमें सौमित्र चटर्जी, सुभेंदु चटर्जी, समित भांजा, रबी घोष, पहाड़ी सान्याल, शर्मिला टैगोर, अपर्णा सेन, सिमी ग्रेवाल जैसे कलाकारों ने काम किया। यह फिल्म सुनील गंगोपाध्याय के इसी नाम से लिखे एक बंगाली उपन्यास पर आधारित रही। फिल्म बहुत बेहतरीन साबित हुई और इसे बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में सर्वश्रेष्ठ फिल्म के गोल्डन बियर के लिए नामित भी किया गया। यह कहानी कोलकाता में रहने वाले तीन दोस्तों की है जो अलग-अलग स्वभाव के हैं और एक साथ छुट्टी मनाने के लिए जंगल में निकलते हैं।

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अशानि संकेत - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

अशानि संकेत (1973)

सत्यजीत रे अब तक बहुत फिल्में बना चुके थे और उनकी वह फिल्में ब्लैक एंड व्हाइट रहीं। लेकिन, वर्ष 1973 में आई उनकी फिल्म 'अशानी संकेत' का फिल्मांकन रंगीन हुआ। फिल्म में सौमित्र चैटर्जी मुख्य भूमिका में रहे और उनके साथ मुख्य अभिनेत्री की भूमिका निभाई बांग्लादेशी अदाकारा बोबीता ने। यह फिल्म बिभुतिभूषण बंदोपाध्याय के लिखे इसी नाम से एक उपन्यास पर आधारित है। फिल्म में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान के बंगाल को दिखाया गया है जहां पर एक ब्राह्मण परिवार है जिसमें रहने वाला गंगाचरण एक डॉक्टर और अध्यापक है। यह उसकी जिंदगी का ऐसा समय होता है जहां लगभग 30 लाख लोग अलग-अलग बीमारियों से मरते हैं लेकिन गंगाचरण उसमें कुछ कर ही नहीं पाता।

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सोनार केला - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

सोनार केला (1974)

जैसा कि सत्यजीत रे एक बहुत बेहतरीन लेखक भी थे, उन्होंने वर्ष 1971 में एक मिस्ट्री थ्रिलर उपन्यास लिखा जिसका शीर्षक रहा 'सोनार केला'। इसी उपन्यास पर आधारित सत्यजीत रे ने वर्ष 1974 में इसी शीर्षक से एक फिल्म भी बना डाली जिसमें उन्होंने मुख्य भूमिकाएं निभाने के लिए सौमित्र चटर्जी, संतोष दत्ता, सिद्धार्थ चटर्जी और कुशल चक्रवर्ती जैसे कलाकारों को चुना। यह फिल्म कहानी है एक छोटे लड़के की जो कुछ बदमाशों का शिकार बनता है। वह लड़का बताता है कि उसे अपनी पिछली जिंदगी याद है और उसे यह भी पता है कि एक किले में बहुत से हीरे जवाहरात दफन हैं। इसी के चक्कर में बदमाश उस लड़के को घेरे रहते हैं।

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जॉय बाबा फेलूनाथ - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

जॉय बाबा फेलूनाथ (1979)

'फेलूदा' शीर्षक वाला एक मशहूर मिस्ट्री थ्रिलर उपन्यास को सत्यजीत रे ने लिखा था जिस पर उन्होंने पहली फिल्म 'सोनार केला' बनाई। वर्ष 1979 में आई फिल्म 'जॉय बाबा फेलूनाथ' 'सोनार केला' का ही सीक्वल है। इस फिल्म को सत्यजीत रे ने ही निर्देशित किया और इसमें मुख्य भूमिकाएं निभाने के लिए उन्होंने सौमित्र चटर्जी, संतोष दत्ता, सिद्धार्थ चटर्जी और उत्पल दत्त को लिया। अपने उपन्यास में सत्यजीत ने फेलूदा, जटायु जैसे कुछ मशहूर काल्पनिक किरदारों को भी बनाया है जो ठीक वैसे अस्तित्व रखते हैं जैसे मार्वेल सिने यूनिवर्स की फिल्मों में कैप्टन अमेरिका, आयरन मैन, आदि।

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हीरक राजार देशे - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

हीरक राजार देशे (1980)

एक और मशहूर फिल्म सीरीज की रचना सत्यजीत रे ने की जिसकी पहली फिल्म उन्होंने वर्ष 1969 में बनाई जिसका शीर्षक रहा 'गोपी गाइने बाघा बायने'। इसका सीक्वल बनाने में सत्यजीत को काफी वक्त लगा। वर्ष 1980 में उन्होंने 'हीरक राजार देशे' के नाम से इस फिल्म का सीक्वल बनाया। फिल्म में एक अनोखी बात यह रही कि मुख्य कलाकारों के ज्यादातर संवादों को एक लय में बोला गया। जो अपने संवादों को लय में नहीं बोलता वह सिर्फ एक अध्यापक है। बताया गया कि वह अध्यापक अपनी सोच रखता है जबकि बाकी लोग एक जैसी सोच में बंधे हुए हैं। इसलिए, ऐसा किया गया। फिल्म में तपन चटर्जी, सौमित्र चटर्जी, रबी घोष, उत्पल दत्त, संतोष दत्ता, कामू मुखर्जी जैसे कलाकारों ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं।

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