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अखबार की एक कटिंग ने बदली किसी की ज़िंदगी तो किसी को नहीं भूला पहला आलेख, पढ़िए सितारों की यादें

Mon, 13 Apr 2020 06:59 PM IST
anand anand रोहिताश सिंह परमार, मुंबई
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Sooraj barjatya, Sonnalli Seygall, Satish kaushik - फोटो : amar ujala mumbai
अखबार आम लोगों से लेकर फिल्मी सितारों तक ही ज़िंदगी का अहम हिस्सा रहा है। मुंबई में इन दिनों भले कोरोना के चलते घरों तक अखबार न पहुंच पा रहा हो, लेकिन फिल्म इंडस्ट्री के तमाम सितारे ऐसे हैं जो अपने जीवन का टर्निंग प्वाइंट इन अखबारों में छपी खबरों को ही मानते हैं। अमर उजाला ने बात की ऐसे ही कुछ सितारों से और जानने की कोशिश की कि कैसे एक अखबार ने उनके जीवन को प्रभावित किया।
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Satish Kaushik - फोटो : social media
कटिंग पर बनी ‘कागज’
हिंदी सिनेमा में कैलेंडर नाम से मशहूर रहे अभिनेता सतीश कौशिक रेडियो पर फिल्मी कैलेंडर शो भी करते हैं। उनकी एक फिल्म जो रिलीज की कतार में हैं, उसका नाम है कागज़। फिल्म के प्रोड्यूसर सलमान खान हैं। सतीश बताते हैं, “फिल्म 'मुझे कुछ कहना है' की शूटिंग के दौरान मैंने एक अजीब खबर पढ़ी जिसमें एक आदमी लाल बिहारी को जीवित रहते हुए भी उसके चाचा ने मरा हुआ घोषित करवा दिया। 19 साल तक कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाकर लाल बिहारी ने खुद को जिंदा साबित किया।” इसी खबर पर बनी है सतीश कौशिक की फिल्म कागज जिसे वह लॉक डाउन उठने के बाद रिलीज करने की तैयारी में हैं।
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adhyayan suman - फोटो : file photo
नहीं भूलता पूरे पेज का लेख
अभिनेता शेखर सुमन के बेटे अध्ययन सुमन हाल ही में अभिनेत्री हिना खान के साथ वेब सीरीज 'डैमेज्ड 2' में नजर आए थे। उनका करियर बहुत बेहतर तो नहीं चला, लेकिन अखबार ने उन्हें खुशियां बहुत दी हैं। उन्होंने बताया, 'आज से 10 पहले जब अखबार में मेरे ऊपर पूरा एक पेज लिखा गया था, तो उसमें खुद को देखकर बहुत खुशी हुई थी। मैं उस पेपर को पढ़कर खुद मन ही मन खुश हो रहा था। उस जैसी फीलिंग आजतक फिर से नहीं आई। बेशक, अखबार ने मेरा बहुत साथ दिया है। पेपर के जैसा कुछ और है ही नहीं।'

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Sonnalli Seygall - फोटो : twitter
अखबारों ने दिया पहला सहारा
वहीं फिल्म 'जय मम्मी दी' में सनी सिंह के साथ नजर आईं सोनाली सहगल की तो शुरुआत ही अखबार से हुई है। उन्होंने बताया, 'मैं जब अपने करियर की शुरुआत कर रही थी तो मेरी लोगों से जान पहचान तो थी नहीं। इसलिए मैं अक्सर चीजों को अखबार में ही ढूंढा करती थी। मैंने कई ऑडिशन तो अखबार से पते निकालकर ही दिए हैं। लेकिन अब मैं अखबार से थोड़ी दूर हूं, क्योंकि आजकल देश में ऐसी चीजें ज्यादा होती हैं, जो मुझे अंदर से आहत करती हैं। और मैं इन सब चीजों के बारे में सोचना नहीं चाहती।'
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नीरज काबी - फोटो : Amar Ujala, Mumbai
अखबार ने बदल दी किस्मत
रंग मंच के शानदार कलाकार नीरज काबी को भी अखबार ने ही बड़ी पहचान दिलाई। पुराने दिनों का एक वाकया बताते हुए उन्होंने कहा, 'मैं जब रंगमंच का कलाकार था, तब एक अखबार में मेरे लिए एक आलेख छपा। जिस नाटक में मैंने काम किया था, उस नाटक की कम और मेरे किरदार की तारीफें ज्यादा लिखी गईं थी। उससे मुझे बड़ा फायदा हुआ। उसको पढ़कर लोगों ने वह नाटक देखना शुरू किया। पहले जहां उस नाटक को 50-60 लोग ही देखने आ रहे थे, अब वह शो हाऊसफुल चल रहा था। मुझे अब भी याद है कि वह नाटक पृथ्वी थिएटर में चल रहा था। मेरा चेहरा मास्क से ढका हुआ था, फिर भी एक अखबार ने मुझे पहचानने योग्य बना दिया था।' 
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Sooraj Barjatya - फोटो : file photo
अखबार की कटिंग ने बचाया करियर
निर्देशक सूरज बड़जात्या जब एक फिल्म के फ्लॉप होने के बाद बहुत टूट गए थे, तब एक अखबार ने ही उनके अंदर आशा की एक लौ जलाई थी। अमर उजाला में ही प्रकाशित हो चुके के एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में सूरज ने बताया था, 'मेरी फिल्म विवाह की कहानी 18 साल पहले एक अखबार की कटिंग से ली गई थी। मेरे पिताजी ने मुझे 10 साल पहले ही बोला कि तुम इस विषय को लेकर फिल्म बनाओ। मेरी फिल्म 'मैं प्रेम की दीवानी हूं' कम चली, तो मेरा आत्मविश्वास थोड़ा हिल गया। मैं अपने पिताजी के पास गया और उनसे पूछा कि अब क्या बनाऊं? तब उन्होंने मुझे वह अखबार की कटिंग दी, और फिर हमने उससे फिल्म 'विवाह' बनाई। उस पेपर की कटिंग आज भी मेरे पास सुरक्षित रखी हुई है। तो मेरे लिए एक अखबार की इतनी अहमियत है।'
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