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शान ने बिना नाम लिए साधा हिमेश रेशमिया पर निशाना, बोले- 'जज का काम शो में बड़े-बड़े वादे करना नहीं'

Sat, 09 Jan 2021 02:46 PM IST
प्रतीक्षा राणावत मुंबई ब्यूरो, अमर उजाला
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शान - फोटो : instagram/radhikashaan
अपने उसूलों पर शुरू से कायम रहे सिंगर शान अब 'इंडियन प्रो म्यूजिक लीग' का हिस्सा हैं। इंडियन प्रीमियर लीग यानी आईपीएल की तर्ज पर शुरू हुई इस नई लीग की टीमों के मालिकों में श्रद्धा कपूर, गोविंदा, राजकुमार राव, रितेश देशमुख, बॉबी देओल और सुरेश रैना जैसी जानी-मानी हस्तियां भी शुमार हैं। ‘अमर उजाला’ ने शान से इस एक्सक्लूसिव बातचीत में शो की पूरी विचारधारा को समझा और ये भी समझने की कोशिश कि हर बात का मुकाबला क्या वाकई जरूरी है?
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शान - फोटो : instagram/singer_shaan
'इंडियन प्रो म्यूजिक लीग' की विचारधारा क्या है?

हमारे देश में जिस तरह क्रिकेट को पसंद किया जाता है, वैसे ही संगीत के दीवाने भी हैं। इन दोनों को मिलाकर एक म्यूजिकल और मनोरंजन से भरपूर शो बनाया गया है। वैसे तो संगीत की बहुत सी प्रतियोगिताएं होती हैं। लेकिन, यहां अलग यह है कि नए गायक पुराने और स्थापित हो चुके गायकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर गा सकेंगे। जिस तरह क्रिकेट में होता है। एक तरफ विराट कोहली खेल रहा होता है और दूसरी तरफ कोई नया खिलाड़ी आकर बराबरी करने की कोशिश करता है। ठीक आईपीएल की तरह सभी टीमों के नाम भी देश के अलग-अलग राज्यों पर रखे जाएंगे लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं होगा कि टीम का नाम जिस राज्य पर रखा गया है, उसमें गाने वाले लोग भी उसी राज्य के होंगे। बाकी शोज में जिस तरह भावुक कहानियां और रोना-धोना होता है, वैसा कुछ यहां पर देखने नहीं मिलने वाला।
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राजकुमार राव, श्रद्धा कपूर, गोविंदा - फोटो : Instagram
श्रद्धा कपूर, गोविंदा, रितेश देशमुख, राजकुमार राव जैसे नामों को जोड़ने के पीछे क्या सोच है?

ये सभी फिल्मों के बड़े-बड़े कलाकार हैं और इनके देश और दुनिया में बहुत प्रशंसक भी हैं। जब ये अपने टीम की हौसला अफजाई करेंगे तो उनके प्रशंसक भी उन्हीं के स्वर में प्रतियोगियों का हौसला बढ़ाएंगे। देखिए, सौ बात की एक बात यह है कि अगर मैं चार अच्छे गायकों को पकड़कर एक प्रतियोगिता करवाता हूं तो लोगों को यह ज्यादा पसंद नहीं आने वाली। उसके लिए हमें लोगों का ध्यान आकर्षित करना होगा। और यह तभी संभव है जब हम कुछ बड़ा करेंगे। टीवी और फिल्म एक व्यापार ही है। इसको ठीक से करने के लिए हमें कुछ बड़ा तो करना ही पड़ेगा।

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शान - फोटो : instagram/singer_shaan
कला में मुकाबला होना कितना जरूरी है?

जब किसी प्लेटफॉर्म पर कलाकारों को प्रस्तुति देने का मौका मिलता है तो उन्हें वहां से एक अलग ही दर्जे की लोकप्रियता मिलती है। यह उनके भविष्य के लिए बहुत अच्छा होता है। मुकाबले अपनी जगह पर हैं। क्या है कि जब कुछ कलाकार आपस में मुकाबला करते हैं तो उन्हें देखने के लिए लोग बहुत ज्यादा जमा होते हैं। इससे कलाकारों की प्रस्तुति को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचने में मदद मिलती है। और जो अच्छे और लायक कलाकार होते हैं उन्हें अगर कोई अच्छा प्लेटफॉर्म मिलता है तो वहां से वह मुकाबला जीतकर अपना भविष्य उज्जवल भी कर सकते हैं। और फिर प्रतियोगिताएं तो मजे के लिए होती हैं। किसी की हार और जीत से ज्यादा फर्क नहीं पड़ता।
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शान - फोटो : instagram/radhikashaan
शंकर महादेवन भी 'तारे जमीन पर' लेकर आए हैं। उस शो में कलाकार तो हैं लेकिन कोई मुकाबला नहीं। वह शो आपको कैसा लगा?

उस शो की विचारधारा भी मुझे काफी अच्छी लगी। क्योंकि, उसमें बच्चों को गाने के लिए आमंत्रित किया गया और सिखाने के लिए भी तैयारी की गई। जहां बच्चों की बात होती है वहां अगर कुछ सीखने सिखाने की बात हो तो अच्छा ही लगता है। बच्चों में सीखने की ललक बहुत ज्यादा होती है। वह चीजों को बहुत जल्दी सीखते भी हैं। दूसरी बात यहां पर यह भी है कि आपको अगर जिंदगी में सफल होना है तो उसके लिए आपको मेहनत तो बहुत करनी ही पड़ेगी। लेकिन, अगर आप लाइफ जैकेट पहनकर पानी में छलांग लगाएंगे तो आपको तैरना नहीं आ सकता। आपको उसके लिए जान का जोखिम उठाना ही पड़ेगा।
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शान - फोटो : सोशल मीडिया
और प्रतियोगिता के समय प्रतियोगियों से काम देने जैसे बड़े-बड़े वादे कर देना कितना सही है?

देखिए, मेरा मानना है कि हम जिस तरह से चीजों को सीखे हैं और आगे बढ़े हैं, हमारे लिए यह बहुत जरूरी है कि हम आने वाले लोगों को किस तरह मार्गदर्शन देते हैं? मैं अगर अपनी बात करूं तो मैंने आज तक कभी बड़ी-बड़ी बातें नहीं कीं। मैंने कभी ऐसा व्यवहार नहीं किया कि मैं यह कर दूंगा, मैं वह कर दूंगा, अरे तुम्हारे गले में तो साक्षात मां सरस्वती बैठी है। मैं इस तरह की बातें कभी नहीं करता। मैंने और मेरी पत्नी ने मिलकर एक संस्था खोली है जहां हम नए बच्चों को गाने का मौका देते हैं।
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shaan - फोटो : social media
तो आपकी सलाह क्या है?
बहुत से ऐसे कलाकार होते हैं जो मुंबई आकर अपना भाग्य आजमाने की कोशिश करते हैं। लेकिन, हर किसी को तो बड़े मौके नहीं मिलते। फिर भी हम कोशिश कर रहे हैं कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को बेहतर बनाएं और गायकों का जो सम्मान है उसे बरकरार रखें। किसी शो पर बड़ी-बड़ी बातें कहना बहुत आसान होता है कि मैं तुम्हें यहां से काम दिला दूंगा, मैं तुम्हें यहां पर काम दूंगा। यह सब चीजें किसी शो पर ही अच्छी लगती हैं। बाद में सुनने में आता है कि ऐसे लोग फोन भी नहीं उठाते। इस तरह से बच्चे गुमराह होते हैं। उन्हें लगता है कि शो पर तो बड़े-बड़े स्टार हमें गोद में उठाते हैं लेकिन शो खत्म होते ही हमें कोई पूछता ही नहीं। शो में किसी भी जज का काम यह होना चाहिए कि वह प्रतियोगी की खूबियों और खामियों को बताए और उसे भविष्य में बेहतर गायक बनने की शुभकामनाएं दे। इससे ज्यादा नहीं होना चाहिए।

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