kaifi azmi
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और वह लड़की (शौकत) अपनी सहेलियों में बैठी कह रही थी, “कैसा बदतमीज शायर है, वह ‘उठ’ कह रहा है। उठिए नहीं कहता और इसे तो अदब-आदाब की अलिफ-बे ही नहीं आती। इसके साथ कौन उठकर जाने को तैयार होगा?” मुंह बनाते हुए वह व्यंग्य से पंक्ति दोहराती हैं, ‘उठ मेरी जान मेरे साथ ही चलना है तुझे..’ ।
मगर जब श्रोताओं की तालियों के शोर के साथ नज्म खत्म होती है तो वह लड़की अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा फैसला ले चुकी थी। मां बाप ने लाख समझाया वह नहीं मानी। अपनी सगाई भी तोड़ दी। सहेलियों ने इस रिश्ते की ऊंच-नीच के बारे में भी बताया। वह शायर है, शादी के लिए सिर्फ शायरी काफी नहीं होती। शायरी के अलावा घर की जरूरत होती है।