Tanhaji The Unsung Warrior
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1665 की संधि के बाद शिवाजी औरंगजेब से मिलने आगरा गए। लेकिन जब उन्हें वहां बंदी बना लिया गया तो शिवाजी किसी तरह आगरा से भागकर महाराष्ट्र पहुंचे और उन्होंने पुंरदर संधि को अस्वीकार कर दिया और अपने सभी 23 किलों को वापिस हासिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी।" देशपांडे बताती हैं, "रणनीतिक रूप से यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण किला था। उस समय उदयभान राठौड़ नाम के एक राजपूत सेनापति प्रमुख किले की रखवाली कर रहे थे। और तानाजी मालुसरे के साथ उनके भाई सूर्या मालुसरे भी थे।" पुणे शहर से 20 किमी दक्षिण पश्चिम में हवेली तहसील में स्थित इस किले का क्षेत्रफल 70,000 वर्ग किलोमीटर है। किले का एक द्वार पुणे की ओर खुलता है तो दूसरा द्वार कल्याण की ओर खुलता है। बालभारती द्वारा छापी गई किताब में बताया गया है कि जब तानाजी ने किले पर चढ़ाई की तो सूर्या जी अपनी सेना के साथ किले के कल्याण द्वार पर पहुंच गए। और दरवाज़ा खुलने का इंतजार करने लगे।