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जब अपनी सगाई तोड़ कैफी आजमी से शादी के लिए अड़ गई थीं शौकत, पहली मुलाकात में हुआ था दिलचस्प किस्सा

Sat, 23 Nov 2019 04:53 AM IST
Mishra Mishra एंटरटेंमेंट डेस्क, अमर उजाला
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Shaukat Azmi - फोटो : Social Media
मशहूर अदाकारा और लेखिका शौकत कैफी आजमी का शुक्रवार को निधन हो गया। मशहूर शायर, लेखक व गीतकार कैफी आजमी की पत्नी तथा शबाना आजमी की मां शौकत (90) लंबे समय से बीमार चल रही थीं। उनके इंतकाल के समय उनकी बेटी शबाना आजमी भी वहीं मौजूद थीं। शौकत बहुत जिंदादिल और जिद्दी महिला थीं। कैफी से उनके प्यार का किस्सा भी उतरा ही खूबसूरत है।

कैफी के चाहने वाले उन्हें रूमानियत का शायर कहते थे। उनके अनेक किस्से हैं जब उन्हें सुनने वाले पहली बार में ही उन्हें अपना दिल दे बैठते थे। ऐसा ही एक किस्सा उनके बारे में उनके समकालीन शायर निदा फाजली ने साझा किया था।
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कैफी आजमी - फोटो : डेमो
बकौल निदा फाजली, ''कैफी आजमी सिर्फ शायर ही नहीं थे। वह शायर के साथ स्टेज के अच्छे ‘परफार्मर’ भी थे। इस ‘परफार्मेंस’ की ताकत उनकी आवाज और आवाज के उतार चढ़ाव के साथ मर्दाना कदोकामत और फिल्मी अदाकारों जैसी सूरत भी थी।

शायरी और इसकी अदायगी। ये दोनों विशेषताएं किसी एक शायर में मुश्किल से ही मिलती है। और जब ये मिलती है तो शायर अपने जीवन काल में ही लोकप्रियता के शिखर को छूने लगता है। कैफी आजमी इसी परंपरा से जुड़े शायर थे, यह परंपरा उन्हें बचपन में मोहर्रम की उन मजलिसों से मिली थी, जिनमें मर्सिए (शोक-गीत) सुनाए जाते थे।
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Shaukat Azmi - फोटो : Social Media
सुनाने वाले आंखों और हाथों के हाव-भाव और आवाज़ के उतार-चढ़ाव से सुनने वालों को जब वो चाहे हंसाते थे, जब चाहे रुलाते थे और कभी उनसे मातम करवाते थे। कैफी आजमी का पढ़ने का अंदाज अपने समकालीनों में सबसे अनोखा था।

कैफी आजमी जब कलाम पढ़ने के लिए बुलाए जाते तो पढ़ने के बाद पूरे मुशायरे को अपने साथ ले जाते थे। हैदराबाद में एक मुशायरे में उनकी इसी कलात्मक प्रस्तुति ने कैफी के जवानी के दिनों की एक लड़की को किसी और के साथ अपनी मंगनी तोड़ने पर मजबूर कर दिया था। कैफी अपनी मशहूर नज्म औरत सुना रहे थे...

उठ मेरी जान मेरे साथ ही चलना है तुझे
क़द्र अब तक तेरी तारीख ने जानी ही नहीं
तुझमें शोले भी हैं बस अश्क फिशानी ही नहीं
तू हकीकत भी है दिलचस्प कहानी ही नहीं
तेरी हस्ती भी है इक चीज जवानी ही नहीं
अपनी तारीख का उन्वान बदलना है तुझे
उठ मेरी जान...

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kaifi azmi - फोटो : social media
और वह लड़की (शौकत) अपनी सहेलियों में बैठी कह रही थी, “कैसा बदतमीज शायर है, वह ‘उठ’ कह रहा है। उठिए नहीं कहता और इसे तो अदब-आदाब की अलिफ-बे ही नहीं आती। इसके साथ कौन उठकर जाने को तैयार होगा?” मुंह बनाते हुए वह व्यंग्य से पंक्ति दोहराती हैं, ‘उठ मेरी जान मेरे साथ ही चलना है तुझे..’ ।

मगर जब श्रोताओं की तालियों के शोर के साथ नज्म खत्म होती है तो वह लड़की अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा फैसला ले चुकी थी। मां बाप ने लाख समझाया वह नहीं मानी। अपनी सगाई भी तोड़ दी। सहेलियों ने इस रिश्ते की ऊंच-नीच के बारे में भी बताया। वह शायर है, शादी के लिए सिर्फ शायरी काफी नहीं होती। शायरी के अलावा घर की जरूरत होती है।
 
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शबान और कैफी आजमी
वह खु़द बेघर है, खाने-पीने और कपड़ों की भी जरूरत होती है। कम्युनिस्ट पार्टी उसे केवल 40 रुपए महीना देती है। लेकिन वह लड़की अपने फैसले पर अटल रही। और कुछ ही दिनों में अपने पिता को मजबूर करके बंबई ले आई। सज्जाद जहीर के घर में कहानीकार इस्मत चुगताई, फिल्म निर्देशक शाहिद लतीफ, शायर अली सरदार जाफरी, अंग्रेजी के लेखक मुल्कराज आनंद की मौजूदगी में वह रिश्ता जो हैदराबाद में मुशायरे में शुरू हुआ था, पति-पत्नी के रिश्ते में बदल गया।

सरदार जाफरी ने दुल्हन को कैफी का पहला संग्रह ‘आखिरी शब’ तोहफे में दिया। इसके पहले पेज पर कैफी के शब्द थे, शीन (उर्दू लिपि का अक्षर) के नाम। मैं तन्हा अपने फन को आखिरी शब तक ला चुका हूं तुम आ जाओ तो सहर हो जाए। यह ‘शीन’ अब कैफी आजमी की विधवा हैं। वह शौकत खान से शौकत आजमी बनीं थीं, उनके नाम का पहला अक्षर है ‘शीन’। शौकत आजमी जो जवान कैफी की खूबसूरत प्रेमिका थीं।

मशहूर शायर, गीतकार कैफी आजमी की पत्नी शौकत का इंतकाल, लंबे समय से थीं बीमार
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