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Sharad Kelkar: हकलाहट को मात देकर शरद ऐसे बने प्रभास की आवाज, वॉयस-ओवर कलाकारों के लिए की यह बड़ी मांग

Sat, 13 Jan 2024 11:22 AM IST
रुपाली रामा जायसवाल एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

शरद केलकर कभी हकलाते थे। हालांकि, अभिनेता ने इस समस्या को मात दी। साथ ही साउथ ब्लॉकबस्टर फिल्मों में प्रभास की आवाज बनकर उभरे। शरद ने इस पूरी जर्नी पर बारीकी से प्रकाश डाला है। 
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शरद केलकर - फोटो : सोशल मीडिया
शरद केलकर ने अपने शानदार अभिनय और लगन के दम पर टेलीविजन और फिल्म दोनों इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाई है। शरद अपने अभिनय के लिए तो दर्शकों के बीच चर्चित हैं ही। साथ ही वह अपनी आवाज के लिए भी काफी लोकप्रिय हैं। शरद ने 'बाहुबली' में प्रभास के किरदार के लिए अपनी आवाज दी थी। तेलुगु स्टार के साथ उनका नवीनतम प्रोजेक्ट प्रशांत नील की 'सलार' था। अब शरद ने साउथ फिल्मों में प्रभास की आवाज के रूप में पहचाने जाने के बारे में बात की है। 
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शरद केलकर - फोटो : सोशल मीडिया
शरद केलकर ने प्रभास की आवाज बन लोकप्रियता हासिल करने को लेकर कहा, 'मैं बचपन से ही हकलाता था। जब तक मैंने अभिनय करना शुरू नहीं किया तब तक मैं हकलाता था। मैंने कभी अभिनेता बनने का सपना नहीं देखा था, वॉयस आर्टिस्ट बनना तो दूर की बात है।' शरद कहते हैं उन्हें अच्छा लगता है कि 'बाहुबली' और 'सलार' में प्रभास के किरदारों के लिए डब करने के बाद उनकी आवाज की एक अलग फैन फॉलोइंग है। शरद ने 'आदिपुरुष' के हिंदी संस्करण में भी प्रभास के लिए डबिंग की।
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शरद केलकर - फोटो : सोशल मीडिया
साउथ फिल्मों के लिए डबिंग के बारे में शरद केलकर ने कहा, 'साउथ में, मैंने बहुत लंबे समय से ज्यादा काम नहीं किया है। मैंने बहुत लंबे समय से हॉलीवुड फिल्मों की डबिंग भी नहीं की है, लेकिन प्रभास की फिल्मों से मुझे जो पहचान मिली वह बड़ी थी। मुझे नहीं लगता कि वॉयस इंडस्ट्री में किसी के साथ ऐसा हुआ है। लोगों ने अब वॉयस-ओवर कलाकारों को नोटिस करना शुरू कर दिया है, जैसे लोगों ने पुष्पा में श्रेयस तलपड़े को और केजीएफ में यश के लिए सचिन गोले को पहचाना। इसलिए, मुझे लगता है कि बाहुबली के बाद, यह सच नहीं है कि आप उस व्यक्ति को नहीं जानते जिसने डब किया है।'

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शरद केलकर - फोटो : सोशल मीडिया
शरद केलकर बदलाव लाने के लिए 'बाहुबली' को श्रेय देते हैं, और चाहते हैं कि फिल्म निर्माता अंतिम क्रेडिट और फिल्म के पोस्टर में वॉयस-ओवर कलाकारों का उल्लेख करना शुरू करें। वह कहते हैं, 'मैं कहूंगा कि बाहुबली ने इंडस्ट्री में बदलाव लाया और लोगों ने वॉयस एक्टर्स को भी पहचानना और उनका सम्मान करना शुरू कर दिया। लोग मुझे जानते थे, लेकिन उन्होंने यह भी देखा कि मैं एक वॉयस-ओवर कलाकार हूं। इन फिल्मों को डब करने के लिए इस्तेमाल की जा रही मेरी आवाज को वे पहचानने लगे और अन्य कलाकारों को भी पहचान मिलने लगी। इसके लिए मैं बहुत खुश हूं।'

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शरद केलकर - फोटो : सोशल मीडिया
यह पूछे जाने पर कि उन्होंने हकलाने पर कैसे काबू पाया, शरद केलकर ने बताया, 'जब आप हकलाते हैं, तो कोई भी आवाज पर ध्यान नहीं देता है, लेकिन एक बार जब मैंने उस मुद्दे पर काबू पा लिया तो मुझे काम मिलना शुरू हो गया। मुझे एहसास हुआ कि मेरे सांस लेने का तरीका सही नहीं था इसलिए मैं हकलाता था। बहुत से बच्चे और उनके माता-पिता मुझसे पूछते हैं कि मैं हकलाहट पर काबू पाने में कैसे कामयाब रहा, और मैं कहता हूं कि यह मेरी समस्या थी। यह ऐसा है जैसे अगर मैं आपसे 100 मीटर तक दौड़ने के लिए कहूं और तुरंत कुछ पंक्तियां बोलूं, तो आप ऐसा नहीं कर सकते क्योंकि आपकी सांस लेना आपके नियंत्रण में नहीं है। आप जोर-जोर से सांस ले रहे होंगे। मेरे लिए यह वैसा ही था। एक बार जब मैंने अपनी सांसें ठीक कर लीं, तो मैंने हकलाना बंद कर दिया। फिर मैंने अन्य अभिनेताओं को देखना शुरू किया कि वे कैसे इतना धाराप्रवाह बोलते हैं, और इस पर काम किया। एक बार जब मेरा हकलाना बंद हो गया, तो लोगों ने मेरी आवाज पर ध्यान देना शुरू कर दिया।'

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