संजय गढ़वी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
एक साल की उम्र में देखी 'राम और श्याम'
मेरे जन्म के बाद मम्मी मेरी देखभाल में बिजी हो गईं। मेरी मम्मी की सहेली ने कहा कि एक साल हो गए हमने फिल्म नहीं देखी, चलकर देखते हैं। मम्मी का यह मानना था कि फिल्म देखते वक्त फिल्म का पूरा मजा लेना चाहिए। मैं साल भर का था और ये डर था कि कहीं फिल्म के बीच में रोने न लगूं। मम्मी की सहेली ने सलाह दी कि घर के सेवक आत्माराम को भी ले चलते हैं, जब मैं रोऊंगा तब वह मुझे लेकर बाहर आ जाएगा। इस तरह से प्लान बना और चार टिकटें खरीदी गईं। मम्मी बताती है कि मैं बिल्कुल भी रोया नहीं। आंखे फाड़ फाड़ कर फिल्म देख रहा था, वह फिल्म थी 'राम और श्याम'।