हिंदी सिनेमा जिस दौर से इन दिनों गुजर रहा है, उसे समझने का एक और नजरिया सामने आता है उस लम्हे में, जब मुंबई शहर से कोई कलाकार हमेशा के लिए गुजर जाता है। उसके जनाजे में आए लोगों के चेहरों पर रास्ते किनारे जमा लोगों की नजरें टिकी होती हैं। और, उसे याद करने के लिए होने वाली प्रार्थना सभा में इकट्ठा होने वालों की आंखों की नमी उसकी शख्सियत बयां करती है। इस लिहाज से देखें तो लेखक संजय चौहान ने मुंबई शहर में जो कमाया, वह शायद तमाम वे लोग भी अब तक नहीं कमा सके हैं जिनकी इंस्टाग्राम तस्वीरों पर जमाना सुबह, दोपहर, शाम कम से कम तीन बार तो ‘लाइक्स’ बटन दबाता ही रहता है। संजय चौहान को ‘लाइक’ करने वाले सोमवार को ओशिवारा के माहेश्वरी भवन में जुटे। वे अक्सर जुटते ही रहते थे। लेकिन, इस बार संजय साथ नहीं थे, बस कुछ था तो उनकी यादें, जिन्हें लोग बरसों बरस कलेजे से चिपकाए रहेंगे।