समीक्षा भटनागर
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सीता की मान्यताओँ को नए सिरे से स्थापित करने के लिए उनके दृष्टिकोण से भी पूरी राम कहानी को फिर से लिखने की कोशिशें हुई हैं। इसी मान्यता पर एक धारावाहिक भी बन चुका है, ‘सिया के राम’। बदलते दौर में भी सीता का चरित्र महिला सशक्तीकरण का प्रतीक माना जाता है और समीक्षा भी इस बात से इत्तेफाक रखती हैं। वह कहती हैं, ‘सीता की जीवनयात्रा भारतीय महिलाओं के लिए एक प्रेरणास्रोत बन चुकी है। त्रेता युग में जो चुनौतियां उन्होंने झेलीं, कलयुग में भी वे बदस्तूर जारी हैं। जीवन उनके लिए अब भी कई बार बोझ सा तब बन जाता है जब उन्हें बार बार ‘अग्निपरीक्षाओं’ से गुजरना होता है। कई बार तो ये भी लगने लगता कि क्या महिलाएं पुरुषों जैसी ही इंसान नहीं हैं। सीता ने अपनी जीवन यात्रा के जरिए ये दिखाने की कोशिश कि एक महिला को अपना जीवन कैसे जीना चाहिए और कैसे उसे कभी भी सिद्धांतों से समझौता नहीं करना चाहिए।’