रवि जाधव
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
आपने विज्ञापन कंपनी की नौकरी छोड़कर फिल्म मेकिंग शुरू की, समय कठिन तो रहा होगा?
मेरी पत्नी का बहुत सपोर्ट रहा, उन्होंने कहा कि तुम जो करना चाहते हो करो। अगर फिल्म नहीं चली तो वापस एडवरटाइजिंग में काम कर लेना, लेकिन कोशिश करो। मेरे लिए यह बहुत बड़ा मोरल सपोर्ट था। साल 2009 में 'नटरंग' शुरू की और साल 2010 में रिलीज हुई, जिसे नेशनल अवार्ड मिला। मराठी में वह फिल्म बहुत चली। इसके बाद मैंने 'बालगंधर्व' बनाई। इस फिल्म को तीन नेशनल अवार्ड मिले। फिर ‘बालक पालक’, ‘टाइमपास’ की, सभी फिल्में हिट रही। इसके बाद मैंने सोच लिया कि वापस एडवरटाइजिंग में नहीं जाना है, अब फिल्में ही बनानी है।