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बाइस्कोप: मौत से हफ्ता भर पहले दिखा था दिव्या भारती का ये दिलकश अंदाज, इस फिल्म में जमा आखिरी 'रंग'

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रंग - फोटो : रोहित झा, अमर उजाला
बीमा कंपनी में काम करने वाले एक मिडिल क्लास शख्स की बेटी को नौवीं क्लास में मिले मॉडलिंग के ढेर सारे ऑफर्स। पहली फिल्म साइन की मिथुन चक्रवर्ती के साथ गुनाहों का देवता। फिल्म नहीं बनी। गोविंदा के भाई कीर्ति कुमार ने भी उसे साइन किया। डांस और एक्टिंग की ट्रेनिंग चली फिर भी फिल्म में मौका नहीं मिला। यहां हीरोइन बनीं जूही चावला। फिर ये लड़की एक दिन चली गई हैदराबाद। वेंकटेश के साथ की पहली तेलुगू फिल्म ही सुपर डुपर हिट हो गई। मुंबई के फिल्म निर्माताओं को लगा कि ये तो हमारे ही शहर की लड़की है और हैदराबाद के निर्माताओं की सोने की चिड़िया बन गई है।

फिर क्या, बंबई में उसके घर से लेकर हैदराबाद के उसके होटल और स्टूडियो तक हिंदी फिल्म निर्माताओं की ऐसी लाइन लगी कि इस लड़की ने हिंदी सिनेमा में जब साल 1992 में डेब्यू फिल्म विश्वात्मा में सनी देओल की हीरोइन बनकर डेब्यू किया तो उस साल उसने फिल्मों की लाइन लगा दी। किसी हीरोइन की डेब्यू वाले साल में ही 12 फिल्में रिलीज होने का ये एक रिकॉर्ड है और ये रिकॉर्ड बनाने वाली अभिनेत्री का नाम है, दिव्या भारती। दिव्या भारती ने जिस आखिरी फिल्म की शूटिंग अपने जीवन में की, वह थी रंग और निर्देशक तलत जानी की ये फिल्म ही हमारे आज के बाइस्कोप की फिल्म है।
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दिव्या भारती
रंग की शूटिंग खत्म होने और इसके रिलीज होने के बीच हिंदी सिनेमा एक भूचाल से गुजरा। फिल्म रंग रिलीज होने के कोई तीन महीने पहले की बात है। 5 अप्रैल 1993 की देर शाम वर्सोवा, अंधेरी की तुलसी बिल्डिंग से एक युवती धड़ाम से जमीन पर आकर गिरी। लोगों को पहले तो समझ ही नहीं आया फिर हंगामा मचा कि ये तो दिव्या भारती है। हालांकि, सोसाइटी के गार्ड को तब युवती का नाम भी नहीं पता था और बताया जाता है कि जिस पांचवीं मंजिल के फ्लैट से दिव्या भारती जमीन पर गिरीं, उसके मालिक फिल्म निर्माता साजिद नाडियाडवाला ने इस युवती का परिचय अपने जानने वालों से सना नाडियाडवाला के नाम से ही कराया था। सना नाडियाडवाला उर्फ दिव्या भारती ने अपने घर से खुद कूदकर आत्महत्या की या फिर वह किसी साजिश का शिकार हुई, इसे लेकर तब वैसा ही बवाल मचा था जैसा पिछली 14 जून से अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की कथित आत्महत्या को लेकर मचा है।

यहां साजिद नाडियाडवाला ने पुलिस को चिट्ठी लिखकर सुशांत के शव की तस्वीरें सोशल मीडिया से हटवाईं, वहां साजिद नाडियाडवाला अपनी पत्नी का शव अस्पताल में देख गश खाकर गिर पड़े थे और उनके मुंह से झाग आने लगा था। मातमपुर्सी दोनों हादसों में एक जैसी हुई थी बस, लोग नहीं भूले तो जीतेंद्र के घर पर हादसे की खबर फैलने के अगले ही दिन हुई एक शानदार पार्टी और उसमें जश्न मनाने पहुंचे लोगों के चेहरे।
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रंग - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
दिव्या भारती के निधन के बाद जो फिल्म सबसे पहले रिलीज हुई वह थी रंग। जीतेंद्र ने फिल्म में दिव्या भारती के पिता का रोल निभाया है। अमृता सिंह उनकी मां बनी हैं। हालांकि पहले इस रोल के लिए निर्माताओं ने अश्विनी भावे को कहानी सुनाई थी लेकिन तब अश्विनी भावे को लगता था कि अभी खुद उनके हीरोइन बनने के दिन है तो भला क्यों वह किसी नवोदित अभिनेत्री की मां का रोल करें। इसके बाद अमृता सिंह की इस फिल्म में एंट्री हुई। ये रोल दरअसल एक हीरोइन की मां का नहीं बल्कि फिल्म की दोनों हीरोइनों की मां का है। अमृता सिंह ने इस फिल्म के बाद ही सालों लंबा ब्रेक एक्टिंग से ले लिया था। उधर, जीतेंद्र ने अपनी पूरी शूटिंग खत्म कर ली तो उनको अपने मैनेजर से पता चला कि प्रोड्यूसर ने उनके बाकी के पैसे ही अब तक नहीं दिए हैं तो बताते हैं कि वह डबिंग करने ही नहीं गए। प्रोड्यूसर उनसे भी इक्कीस, बजाय इस मामले में बातचीत करने के उन्होंने एक डबिंग आर्टिस्ट बुलाकर जीतेंद्र के किरदार की डबिंग करा ली।

फिल्म रंग की कहानी कई स्तरों पर एक साथ आगे बढ़ती है। एक कहानी कॉलेज की है जहां दो लड़कियां आपस में एक लड़के को लेकर भिड़ी हैं। गलतफहमी इतनी बढ़ती है कि एक लड़की के पिता अपनी बेटी का रिश्ता लेकर इस लड़के के घर पहुंचते हैं तो पता चलता है कि लड़का तो दूसरी लड़की को प्यार करता है। मामले के पेंच उलझना शुरू होते हैं। कहानी में दूसरी लड़की की मां की भी एंट्री होती है। तमाम हो हल्ला मचता है और पता चलता है कि दोनों लड़कियां आपस में बहने हैं। इसके बाद बहन की बहन के लिए कुर्बानी वाला चैप्टर भी फिल्म में सामने आता है और किसी तरह आखिर मे जाकर सब ठीक हो जाता है।

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रंग - फोटो : Social Media
फिल्म जब रिलीज हुई तो इसने भारत समेत अमेरिका और कनाडा में भी बंपर ओपनिंग ली थी। वजह थी फिल्म की हीरोइन दिव्या भारती और रिलीज से पहले ही हिट हो चुके फिल्म के गाने। रंग जब रिलीज हुई तो उन दिनों हिंदी सिनेमा में नदीम श्रवण का दौर चल रहा था। समीर दनादन गीत लिखे जा रहे थे और एक से एक बेहतरीन गीत लिखे जा रहे थे। फिल्म में एक नई गायिका पी सुनंदा ने भी गीत गाए। कुमार शानू, अलका याग्निक और पी सुनंदा का गाया ‘तुम्हें देखें मेरी आंखें’ कैंटीन और टैम्पो रिक्शा में उन दिनों खूब बजता था। ‘तेरी मोहब्बत ने..’ गाना आशिक और माशूक के बीच का मोहब्बत भरा गाना था और इस गाने के चलते ही फिल्म के कैसेट्स बर्थडे गिफ्ट्स बनकर खूब बंटे। लेकिन फिल्म का सबसे हिट गाना रहा ‘तुझे ना देखूं तो चैन मुझे आता नहीं है..’। यही वह गाना है जिसकी शूटिंग के सात आठ दिन बाद ही दिव्या भारती ये दुनिया छोड़ गईं। कैमरे के सामने ये दिव्या भारती की आखिरी परफॉरमेंस है।

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रंग - फोटो : Social Media
फिल्म में हीरो के तौर पर कमल सदाना तो कब के साइन हो चुके थे। लेकिन फिल्म की हीरोइनों का मसला सुलझाने में इसके निर्देशक तलत जानी को नानी याद आ गई। फिल्म के निर्माता मंसूर अहमद सिद्दीकी चाहते थे कि फिल्म में करिश्मा कपूर लीड रोल करें और उनके साथ रहें आयशा जुल्का। आयशा जुल्का और करिश्मा कपूर के बीच किसी बात को लेकर अनबन हो चुकी थी और आयशा ने साफ कह दिया कि वह करिश्मा के साथ काम नहीं करेंगी। इसके बाद चांदनी को आयशा जुल्का वाला रोल ऑफर हुआ। लेकिन एक दिन अचानक चांदनी ने भी ये फिल्म छोड़ दी। फिल्म की शूटिंग शुरू होने में होती देर के चलते करिश्मा कपूर ने भी फिल्म को टाटा बाय बाय कर दिया। करिश्मा कपूर के रोल में तब दिव्या भारती को साइन किया गया और करिश्मा कपूर ही फिल्म में नहीं रहीं तो फिर भला आयशा जुल्का को क्या तकलीफ होती, वह भी फिल्म में वापस आ गईं।

वैसे इस फिल्म में निर्देशक तलत जानी अपनी एक करीबी रिश्तेदार रूबैना को हीरोइन बनाना चाहते थे लेकिन उन्होंने इसके लिए मना कर दिया। पर जब दिव्या भारती नहीं रहीं और फिल्म के कुछ सीन्स के लिए किसी दूसरी हीरोइन की जरूरत पड़ी तो रूबैना ने ही तलत जानी की मदद की। फिल्म में रूबैना के सीन बहुत ही कम लाइट में शूट किए गए हैं। तलत जानी की अपनी लिखी इस कहानी का स्क्रीनप्ले रूमी जाफरी ने काफी जलेबीदार रखा और इसमें किरदारों की बुनावट ऐसी है कि सब एक दूसरे से जंजीर की तरह अटके रहते हैं।
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दिव्या भारती
कादर खान और बिंदु कहानी के कैटलिस्ट हैं और जीतेंद्र व अमृता सिंह कहानी के दो अलग अलग ध्रुव। इन चारों की चौकड़ी में आयशा जुल्का, कमल सदाना और दिव्या भारती की प्रेम तिकड़ी पकती है। मशहूर फिल्म निर्माता और निर्देशक के बेटे ब्रिज सदाना के बेटे कमल सदाना ने साल भर पहले ही काजोल के साथ फिल्म बेखुदी से डेब्यू किया था और इस फिल्म में भी उनकी अदाकारी लोगों को पसंद आई थी। पर कमल सदाना के पास भावों की कमी शुरू से रही। काजोल ने बेखुदी संभाली और दिव्या भारती ने रंग, तीसरी फिल्म फौज में पूरा दारोमदार कमल सदाना पर रहा और वहीं से उनके पैर लड़खड़ाने शुरू हो गए।

फिल्म में दिव्या भारती का रंग, रूप और यौवन सब अपने पूरे शबाब पर दिखता है। उनकी इस फिल्म की झलक पाने के चक्कर में ही फिल्म सुपर हिट हो गई। उन दिनों दिव्या भारती का ऐसा हल्ला मचा था कि हर युवा उन्हीं के नाम का दीवाना था। इतनी जल्दी शोहरत का इतना ऊंचा आसमान हिंदी सिनेमा में इससे पहले किसी दूसरी कलाकार ने नहीं छुआ था। दिव्या भारती की ये फिल्म बाद में बांग्ला में भी डब होकर रिलीज हुई। आज के बाइस्कोप में इतना ही, कल बात करेंगे एक और ओल्डी गोल्डी की..। सिलसिला जारी है।

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