दिव्या भारती
रंग की शूटिंग खत्म होने और इसके रिलीज होने के बीच हिंदी सिनेमा एक भूचाल से गुजरा। फिल्म रंग रिलीज होने के कोई तीन महीने पहले की बात है। 5 अप्रैल 1993 की देर शाम वर्सोवा, अंधेरी की तुलसी बिल्डिंग से एक युवती धड़ाम से जमीन पर आकर गिरी। लोगों को पहले तो समझ ही नहीं आया फिर हंगामा मचा कि ये तो दिव्या भारती है। हालांकि, सोसाइटी के गार्ड को तब युवती का नाम भी नहीं पता था और बताया जाता है कि जिस पांचवीं मंजिल के फ्लैट से दिव्या भारती जमीन पर गिरीं, उसके मालिक फिल्म निर्माता साजिद नाडियाडवाला ने इस युवती का परिचय अपने जानने वालों से सना नाडियाडवाला के नाम से ही कराया था। सना नाडियाडवाला उर्फ दिव्या भारती ने अपने घर से खुद कूदकर आत्महत्या की या फिर वह किसी साजिश का शिकार हुई, इसे लेकर तब वैसा ही बवाल मचा था जैसा पिछली 14 जून से अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की कथित आत्महत्या को लेकर मचा है।
यहां साजिद नाडियाडवाला ने पुलिस को चिट्ठी लिखकर सुशांत के शव की तस्वीरें सोशल मीडिया से हटवाईं, वहां साजिद नाडियाडवाला अपनी पत्नी का शव अस्पताल में देख गश खाकर गिर पड़े थे और उनके मुंह से झाग आने लगा था। मातमपुर्सी दोनों हादसों में एक जैसी हुई थी बस, लोग नहीं भूले तो जीतेंद्र के घर पर हादसे की खबर फैलने के अगले ही दिन हुई एक शानदार पार्टी और उसमें जश्न मनाने पहुंचे लोगों के चेहरे।