अनिरुद्ध अग्रवाल
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तकनीक का अभाव
90 के दशक से टेक्नोलॉजी पैर पसारने लगी। आज तकनीक ने इतनी तरक्की कर ली है कि ऐसी फिल्मों के लिए एक से बढ़कर एक भूत, चुड़ैल और डराने वाले अक्स स्पेशल इफेक्ट और ग्राफिक से तैयार हो जाते हैं।
रामसे बंधुओं के दौर में टेक्नोलॉजी का सहारा नहीं था। रामसे बंधुओं ने फिजिकल मेकअप और बैकग्राउंड म्यूजिक को डराने का हथियार बनाया। मनोरंजन के लिए कॉमेडी, म्यूजिक और बोल्ड सीन का तड़का लगाया। अनिरुद्ध अग्रवाल खासतौर से भूत बनते थे जो मेकअप करने के बाद परदे पर बेहद डरावने लगते थे। दीपक रामसे कहते हैं कि "उस समय तकनीक नहीं थी। बैकग्राउंड म्यूजिक का बड़ा असर था। हमारे पास अच्छे कंपोजर थे। 'पुराना मंदिर' में कंपोजर उत्तम सिंह थे जिनके म्यूजिक ने भूत से पहले ही दर्शकों को डराया था। स्पेशल इफेक्ट बिल्कुल भी नहीं था। मेकअप का बड़ा रोल था जिसमें 6-6 घंटे का समय लगता था। एक्टर को 9 बजे की शिफ्ट में सुबह 6 बजे बुलाते थे। 12 बजे तक मेकअप होता था। 1 बजे खाना खाते थे और 2 बजे से शूटिंग शुरू होती थी।"
दीपक रामसे ने बोल्ड सीन के बारे में बात करते हुए कहा, "हिंसा की वजह से हमारी फिल्मों को सेंसर से ए सर्टिफिकेट मिलता था। इसलिए उस समय तय किया गया कि अगर फिल्म में अच्छे ढंग से थोड़ा बोल्ड सीन डाले जाएं तो ये फिल्म के लिए अच्छा होगा। तीन घंटे की फिल्म को संतुलित करके बनाना पड़ता था जिसमें कहानी के साथ कॉमेडी, संगीत का तड़का डालना जरूरी था। पूरे तीन घंटे सिर्फ भूत प्रेत नहीं दिखा सकते। दर्शकों के सिर में दर्द हो जाएगा। हमारी फिल्मों में कॉमेडी का ट्रैक भी मजबूत होता था। फिल्म 'पुराना मंदिर' में शोले के ट्रैक पर जगदीप और गब्बर सिंह का ट्रैक बहुत लोकप्रिय हुआ था।"