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Raju Srivastav Birthday: भाई ने सुनाई कामयाबी की रुला देने वाली कहानी, जहां हैं खुश हैं नहीं तो लौटकर न आ जाते

Sun, 25 Dec 2022 11:54 AM IST
मेघा चौधरी अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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राजू श्रीवास्तव,दीपू श्रीवास्तव - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

राजू श्रीवास्तव होते तो आज अपना 59वां जन्मदिन मना रहे होते। उत्तर प्रदेश में कानपुर के रहने वाले राजू श्रीवास्तव का जन्म  25 दिसंबर 1963 को हुआ था। इसी साल 21 सितंबर  को राजू दुनिया छोड़ गए। लाखों, करोड़ों चेहरों को मुस्कान देने वाले राजू श्रीवास्तव सबको रुला कर चले गए। 'हंसाने वाला चला गया अपनों को रुलाकर, कमाने वाला चला गया अपनों को बसाकर, हर शख्स सहमा सा रहने लगा, अपना गम छुपाकर, फिर मुड़कर कभी नहीं देखा, अपना वादा भुलाकर।' करियर के उफान पर राजू श्रीवास्तव इतने व्यस्त रहे कि कभी उनको अपना जन्मदिन मनाने का समय ही नहीं मिला। आज कानपुर में उनका परिवार गरीबों में राशन, कंबल बांटकर उनका जन्मदिन मना रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार ने भी लखनऊ, कानपुर में कई रास्तों के नाम राजू श्रीवास्तव की याद में कर दिए हैं। राजू श्रीवास्तव के जन्मदिन पर उनके छोटे भाई दीपू श्रीवास्तव ने ढेर सारी बातें शेयर की। आइए सुनते हैं उन्हीं की जुबानी..... 

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राजू श्रीवास्तव,दीपू श्रीवास्तव - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

घर पर जन्मदिन मनाने का समय नहीं
राजू भैया  'द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज' के बाद इतने बिजी हो गए कि कभी उनके पास परिवार से मिलने के लिए समय नहीं रहता था। कई बार ऐसा हुआ कि भाभी और बच्चों के साथ हम लोग उनसे एयरपोर्ट पर ही मिलने जाते थे। 'द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज' के बाद राजू भैया को दुनिया का प्यार मिला और बिजी हो गए। एक दिन भी परिवार से मिलने के लिए समय नहीं निकाल पाते थे। एक महीने में लगातार 25 शोज भी किए। पांच दिन बचते थे तो उसमे भी हम लोग उनसे मिलने एयरपोर्ट पर जाते थे। वह फोन करते थे कि मैं चेन्नई से उतर रहा हूं, तुम लोग मिलने आ जाओ भाभी और बच्चों के साथ। मैं बोलता था क्यों घर आइए, बोलते थे कि दो घंटे में गोवा के लिए निकलना है। मैं कहता था कि ठीक है गोवा से आ जाइए सुबह मिल लेते हैं। कहते थे वहां से कहीं और शो के लिए जाना है। इतने व्यस्त रहते थे कि अपने जन्मदिन के लिए भी समय नहीं निकाल पाते थे। उनके जन्मदिन पर भी कोई ना कोई शो आ जाता था। कई बार तो हम लोगों ने शो में ही जाकर उनका जन्मदिन मनाया। वो हमेशा काम को ही प्राथमिकता देते थे। यही वजह रही है कि उन्होंने 40 वर्षों तक देश को हंसाया।

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राजू श्रीवास्तव,दीपू श्रीवास्तव - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

20 रुपये देते थे राजू भाई
राजू भाई से मैंने काफी कुछ सीखा है वही हमारे आदर्श और गुरु हैं। 22 साल तक उनके छत्र छाया में रहकर काफी कुछ सीखा। आज मैं भी 12-13 देशों में कुल मिलाकर 1800 शो कर चुका हूं। डॉक्टर कहते हैं कि लाफ्टर इज द बेस्ट मेडिसिन, मैं कहता हूं कि सबसे पहले लाफ्टर बाकी सब आफ्टर। किसी को खुलकर हंसाना सबसे बड़ी इबादत है। राजू भाई मुंबई 40 साल पहले 1982 में आए थे। हम उनसे 8 साल छोटे हैं। हम छह भाई और एक बहन हैं। सात लोगों में सबसे छोटे हम हैं। जब राजू भाई कानपुर आते थे तब मुझे 20 रुपये देते थे। उस समय मैं सोचता था कि हमारा भाई हीरो बन गया होगा तभी 20 रुपये मिल रहे हैं। घर में एक दो रुपये मिलते थे।

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राजू श्रीवास्तव - फोटो : सोशल मीडिया

यही तो हीरो है, सलमान खान
1989 में जब 'मैने प्यार किया' की शूटिंग चल रही थी तब मुंबई घूमने आया। पुष्पक एक्सप्रेस से दादर स्टेशन पर उतरा तो राजू भाई मुझे लेने आए। उस समय राजू भाई एंटॉप हिल में एक छोटे से कमरे में तीन चार लोगों के साथ रह रहे थे। एक दिन तैयार होकर सुबह निकल रहे थे तो मैंने पूछा कि सुबह सुबह कहां जा रहे हैं, बोले एक फिल्म 'मैंने प्यार किया' की शूटिंग है उसमे छोटा सा रोल कर रहा हूं, तुम भी घूमने चलो। मुझे लगा कि मेरा भाई तो हीरो बन गया, शूटिंग चल रही है। लंच ब्रेक में एक दुबले पतले लड़के के साथ बैठकर मैं भी खाना खा रहा था, मैंने पूछा कि ये लड़का कौन है? भाई ने बोला यही तो हीरो है सलमान खान।

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राजू श्रीवास्तव - फोटो : सोशल मीडिया

मुंबई कानपुर मुंबई का सफर
जब 1993 में दूसरी बार घूमने आया तो उस समय 'बाजीगर' की शूटिंग चल रही थी। भाई बोले चलो शूटिंग देखने तो मैंने पूछा कि इस बार कौन मिलेगा। भाई ने बताया कि इस बार भी एक नया हीरो एक दो फिल्में कर चुका है। 17 मई 1993 में जब भाई की शादी हुई तो मैं हमेशा के लिए मुंबई भाई के साथ आ गया। उस समय राजू भाई मलाड के जनकल्याण नगर में रहते थे। उस समय भाई के पास मारुति 800 कार हुआ करती थी, मैं कार चलाता था। भाई का शो देख देख कर मुझे भी लगा कि मैं भी सबको हसाऊंगा। मुंबई में दो तीन साल खूब घूमा,  उसके बाद 1996 में वापस कानपुर चले गया। वहां दो साल तक आर्केस्ट्रा में एंकरिंग की। लोग बोलते थे तुम यहां क्या कर रहे हो, जाओ मुंबई तुम्हारे भाई का तो कैसेट निकल रहा है। फिर 1998 में अटैची उठाए और पुष्पक एक्सप्रेस पकड़कर मुंबई आ गए।

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राजू श्रीवास्तव - फोटो : सोशल मीडिया

पहली कामयाबी पर मिले 300 रुपये
राजू भाई को बोला कि हम भी हसाएंगे। भाई बोले क्यों? इसमें तो बहुत संघर्ष है, मैने बहुत संघर्ष किया है। तुम नहीं कर पाओगे, मैने कहा, जितना हो सकेगा, करूंगा। हमको भी हंसाने में मजा आता है, कानपुर में आर्केस्ट्रा में एंकरिंग करते थे। हम भी सबको जोक सुनाएंगे। फिर भाई ने मुझे एक शो दिया और बोले आर्केस्ट्रा की पूरी टीम लेकर हैदराबाद जाओ और शो खत्म होने के बाद सबको वापस लाना। वहां तुम्हारा मन लगे तो कॉमेडी कर लेना। मैंने वहां स्टेज पर पांच मिनट कॉमेडी किया। जब मुंबई लौट कर आया तो सबने भाइया को बताया कि दीपू ने बढ़िया कॉमेडी किया और लोग उस पर खूब इंजॉय किए।  राजू भाई खुश होकर मुझे 300 रुपये दिए।  वो रुपये आज भी संभालकर रखें हैं। उसके बाद मैने संघर्ष करना शुरू किया। साल 2000 में भैया ने मलाड वाला घर बेचकर अंधेरी में घर ले लिया।

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राजू श्रीवास्तव और दीपू श्रीवास्तव अपनी पत्नियों के साथ - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

जब भाई का घर छोड़ दिया
भैया को मैंने बोला कि मुझे भी संघर्ष करना है। भैया ने बोले, तुमको संघर्ष करने की क्या जरूरत है?  तुम हमारे साथ ही रहो, नहीं तो कानपुर में जाकर कोई बिजनेस कर लो, जितना पैसा लगेगा मुझसे ले लो। मैने कहा, मुझे बिजनेस नहीं करना, लोगों को हंसाना है। भैया का साथ छोड़कर मैं माटुंगा लेबर कैंप के पास झोपड़पट्टी में रहने चला गया। वहां एक कमरे में 10 लड़के रहते थे और टॉयलेट के लिए डिब्बा लेकर बाहर जाते थे। भैया थोड़े नाराज भी हुए। लेकिन मुझे संघर्ष करके खुद को तपाना था। उस समय जो भी छोटे मोटे शो मिलते थे कर लेता था। इस तरह से वहां पांच साल गुजार दिए। बीच बीच में भैया से मिलने आता रहता था और हर बार भैया यही बोलते थे कि मेरे पास रहने आ जाओ, सुना है बहुत संघर्ष कर रहे हो, जब हार मान जाना तो बता देना, कानपुर में कोई बिजनेस शुरू करा दूंगा।

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दीपू श्रीवास्तव, राजू श्रीवास्तव - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

राजू भाई ने वापस खरीदा था पुश्तैनी मकान
किदवई नगर का हमारा जो पुश्तैनी मकान है उसे पिता जी ने साल 1993 में तीन लाख में बेच दिया था जिसे 10 गुना की कीमत देकर राजू भाई ने 30 लाख में साल 2006 में खरीद लिया। उस घर में मुझसे बड़े भाई धर्म प्रकाश श्रीवास्तव रहते हैं जिन्हे काजू श्रीवास्तव के नाम से लोग जानते हैं। सबसे बड़े भाई प्रेम प्रकाश श्रीवास्तव सिंचाई विभाग में इंजीनियर थे, अब सेवा निवृत होकर लखनऊ में ही रहते हैं। दूसरे नंबर के भाई चंद्र प्रकाश श्रीवास्तव एयरफोर्स में फ्लाइंग ऑफिसर थे, वह दिल्ली में रहते हैं, तीसरे नंबर के भाई ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव की कानपुर में ही किराने की दुकान है। तीन भाइयों के बाद बहन है सुधा श्रीवास्तव जिनकी शादी कानपुर में हुई है। भाइयों में चौथे नंबर पर राजू भाई थे और पांचवे नंबर के भाई धर्मप्रकाश श्रीवास्तव कानपुर में ही सरकारी नौकरी करते है और वो हमारे पुश्तैनी मकान में रहते हैं, और छठवें नंबर पर में हूं।

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राजू श्रीवास्तव, दीपू श्रीवास्तव - फोटो : सोशल मीडिया

भाई की विरासत को आगे बढ़ाना है
अब भैया की विरासत को बिना उनका नाम खराब किए आगे बढ़ाना है। लखनऊ के राजाजीपुरम  में राजू भाई का ससुराल है। वहां की मेयर संयुक्ता भाटिया  प्रशासन से मिलकर 13 दिसंबर को भैया के  ससुराल के सामने के सड़क का नाम बदलकर स्वर्गीय राजू श्रीवास्तव मार्ग रख दिया और घर के पास एक चौराहा है, उसका नाम स्वर्गीय राजू श्रीवास्तव चौक रख दिया। ठीक दूसरे दिन 14 दिसंबर को कानपुर के किदवई नगर  में मेरे घर के सामने जो सड़क है उसका नाम वहां की मेयर प्रमिला पांडेय ने प्रशासन के साथ मिलकर स्वर्गीय राजू श्रीवास्तव मार्ग रख दिया। कानपुर में  हमारे घर के बगल में एक पार्क है जहां राजू भैया खेलते थे, उसका नाम स्वर्गीय राजू श्रीवास्तव पार्क रख दिया। यह कार्य भैया के जन्मदिन पर आज होना था, लेकिन स्थानीय निकाय चुनाव के चलते आचार संहिता लग गई है, इसलिए इसे पहले ही कर दिया गया।

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राजू श्रीवास्तव - फोटो : सोशल मीडिया

जहां हैं वहां खुश हैं, नहीं तो वापस न आ जाते
राजू भाई सिर्फ कलाकार नहीं, बल्कि कोहिनूर हीरा थे, ऐसा हीरा जो 10-20 साल तक इस धरती पर दोबारा पैदा नहीं होगा। हंसाने वाला चला गया अपनों को रुलाकर, कमाने वाला चला गया अपनों को बसाकर, हर शख्स सहमा सा रहने लगा,अपना गम छुपाकर,फिर मुड़कर कभी नहीं देखा,अपना वादा भुलाकर। राजू भैया जहां भी रहे खुश रहें। एक कड़वा सच तो यही है कि जहां भी हैं वो खुश हैं, नहीं तो लौटकर ना आ जाते। आज कानपुर में हमारा पूरा परिवार राजू भैया की याद में कंबल, गरम कपड़े, राशन और फल वितरित करके राजू भैया का जन्मदिन मना रहा है।

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