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Dadasaheb Phalke Award: रजनीकांत को दादा साहब फाल्के सम्मान, अभिनेता ने इन लोगों को समर्पित किया अवॉर्ड

Mon, 25 Oct 2021 01:28 PM IST
अपूर्वा राय एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित रजनीकांत - फोटो : DD
67वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह का आयोजन सोमवार को विज्ञान भवन में किया गया। इसी दौरान सुपरस्टार रजनीकांत को 51वें दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। विज्ञान भवन में मौजूद सभी लोगों ने रजनीकांत के सम्मान में खड़े होकर तालियां बजाईं।

दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित होने के बाद रजनीकांत ने इसके लिए भारत सरकार का धन्यवाद कहा। उन्होंने संबोधन में कहा- मुझे इस पुरस्कार से सम्मानित करने के लिए मैं भारत सरकार का बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं। मैं यह पुरस्कार अपने गुरू के. बालचंदर, अपने भाई सत्यनारायण राव और अपने ट्रांसपोर्ट ड्राइवर दोस्त राजबहादुर को समर्पित करता हूं।
 
 
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रजनीकांत (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
रजनीकांत बीते पांच दशक से सिनेमा पर राज कर रहे हैं। वह अभी भी सिनेमा में एक्टिव हैं। रजनीकांत की असली नाम शिवाजी राव गायकवाड़ था। रजनीकांत पांच साल के थे तभी उनकी मां का निधन हो गया। मां के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधे पर आ गई। रजनीकांत के लिए भी घर चलाना इतना आसान नहीं था। उन्होंने घर चलाने के लिए कुली तक का काम किया।
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रजनीकांत - फोटो : PTI
रजनीकांत फिल्मों में आने से पहले बस कंडक्टर की नौकरी करते थे। रजनीकांत ने तमिल फिल्म इंडस्ट्री में बालचंदर की फिल्म 'अपूर्वा रागनगाल' से एंट्री ली थी। दक्षिण भारतीय फिल्मों के सुपरस्टार रजनीकांत की हीरो बनाने का श्रेय बालाचंदर को ही जाता है। दादा साहब पुरस्कार लेते हुए रजनीकांत ने कहा कि उन्हें दुख है कि बालाचंदर इस पल को देखने के लिए उनके साथ नहीं है। रजनीकांत बालाचंदर को अपना गुरु मानते हैं।

रजनीकांत ने अपने अभिनय की शुरुआत कन्नड़ नाटकों से की थी। दुर्योधन की भूमिका में रजनीकांत घर-घर में लोकप्रिय हुए थे।

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रजनीकांत - फोटो : सोशल मीडिया
रजनीकांत की फिल्में सुबह साढ़े तीन बजे तक रिलीज हो जाती हैं। कुली से सुपरस्टार बनने वाले रजनीकांत कभी यहां तक नहीं पहुंच पाते अगर उनके दोस्त राज बहादुर ने उनके अभिनेता बनने के सपने को जिंदा न रखा होता। और उन्होंने ही रजनीकांत को मद्रास फिल्म इंस्टिट्यूट में दाखिला लेने के लिए कहा। दोस्त की बदौलत ही रजनीकांत आगे बढ़ते गए और फिर फिल्मों में काम करने लगे। 
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रजनीकांत - फोटो : सोशल मीडिया
साल 1983 में उन्होंने बॉलीवुड में कदम रख दिया। उनकी पहली हिंदी फिल्म अंधा कानून थी। रजनीकांत ने इसके बाद सिर्फ तरक्की की सीढ़ियां चढ़ीं। आज वे दक्षिण भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े स्टार कहे जाते हैं। रजनीकांत के दामाद और एक्टर धनुष को भी बेस्ट एक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला है।
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