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ये हैं सुपरस्टार राजेश खन्ना की 10 बेहतरीन फिल्में, इस तरह से भारतीय सिनेमा के पहले मेगास्टार बने 'काका'

Sat, 18 Jul 2020 01:08 PM IST
अपूर्वा राय रोहितास सिंह परमार, मुंबई
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राजेश खन्ना की 10 बेहतरीन फिल्में - फोटो : ट्विटर
हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना (Rajesh Khanna Death Anniversary) एक अभिनेता, फिल्म निर्माता और एक कुशल राजनीतिज्ञ थे। राजेश लगातार 15 फिल्में सुपरहिट देने वाले वह दुनिया के इकलौते अभिनेता हैं। उनका यह रिकॉर्ड अब तक कायम है। अपने करियर में तीन फिल्मफेयर और चार बीएफजेए पुरस्कार जीतने वाले राजेश खन्ना 1970 से 1987 तक सबसे ज्यादा फीस लेने वाले अभिनेता रहे। भारत सरकार की तरफ से उन्हें भारत के तीसरे सर्वोच्च सम्मान पद्म भूषण से सुशोभित किया गया। लंबे समय तक बीमार रहने के बाद जुलाई 2012 में आज ही के दिन उनका निधन हो गया। आज काका की पुण्यतिथि है। आज हम आपको उनकी कुछ फिल्मों के बारे में बताने जा रहे हैं।
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आखिरी खत - फोटो : file photo
आखिरी खत (1966)
राजेश खन्ना ने 1966 में आखिरी खत नामक फिल्म से अपने सिनेमाई करियर की शुरुआत की जिसे चेतन आनंद ने निर्देशित किया था। उन्होंने अपने पूरे फिल्मी करियर में 168 फीचर फिल्मों और 12 शॉर्ट फिल्मों में काम किया। राजेश खन्ना एफटीआईआई के छात्र सुभाष घई और धीरज कुमार के साथ उन आठ फाइनल प्रतियोगियो में से एक थे, जिन्हें साल 1967 में यूनाइटेड प्रोड्यूसर्स नाम की कंपनी और फिल्मफेयर की प्रतियोगिता में 10,000 प्रतियोगियों में से चुना गया। यह प्रतियोगिता राजेश खन्ना ने जीती और उन्हें पहली फिल्म मिली आखिरी खत।
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राज - फोटो : file photo
राज (1967)
राजेश खन्ना ने 'द हिन्दू' अखबार को दिए एक साक्षात्कार में कहा था, 'हालांकि 'आखिरी खत' मेरी पहली फिल्म है, लेकिन मुझे पहली बार 1967 में रवींद्र दवे की फिल्म 'राज' में एक मुख्य अभिनेता की भूमिका निभाने का मौका मिला था। मेरी हीरोइन बबीता पहले से ही एक लोकप्रिय अभिनेत्री थीं। मुझमें बहुत आत्मविश्वास था लेकिन शुरू में कैमरे का सामना करने में मुझे दिक्कत आ रही थी। अपने पहले तीन शॉट्स में, मुझे अपनी देह की चाल-ढाल और संवादों के प्रवाह पर जोर देना था। हालांकि मैं अपने संवादों के साथ सही था, लेकिन मेरी हरकतें वैसी नहीं थीं। रवींद्र दवे ने मेरे चलने के अंदाज को सही करते हुए मुझे मेरे दृश्यों और हलचल को स्पष्ट रूप से समझाया।'

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फिल्म आराधना का सीन - फोटो : अमर उजाला, मुंबई टीम
आराधना (1969)
राजेश खन्ना ने साल 1969 से 1971 के दो साल के अंतराल में ही हिंदी सिनेमा में लगातार 15 सफल फिल्में दी थीं। जिसमें फिल्म आराधना भी एक थी। आराधना फिल्म का आम तौर पर भारतीयों पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ा था। इसने कई कलाकारों को फिल्मों में अभिनय को एक व्यवसाय के रूप में लेने के लिए प्रेरित किया था। उनमें से एक लोकप्रिय भारतीय अभिनेता टॉम ऑल्टर थे। टॉम ने एक साक्षात्कार में यह स्वीकार किया था कि 1970 में राजेश खन्ना की फिल्म आराधना देखकर ही वह प्रभावित हुए और इसके बाद उन्होंने फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एफटीआईआई) में दाखिला लेने की बात सोची थी।
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फिल्म कटी पतंग का पोस्टर - फोटो : अमर उजाला, मुंबई टीम
कटी पतंग (1970)
राजेश खन्ना ने अपने फिल्मी करियर में आशा पारेख के साथ चार फिल्मों में बतौर मुख्य कलाकार काम किया था और फिल्म कटी पतंग उनमें से दूसरी फिल्म थी। इससे पहले फिल्म आन मिलो सजना में इस सफल जोड़ी को देखा गया था। स्क्रीन पर राजेश खन्ना कभी भी सुर से सुर मिलाते हुए नहीं दिखाई दिए इसलिए उनके भाव स्पष्ट थे। संगीत समर्थित उनकी उपस्थिति ही एक फिल्म की सफलता के लिए शक्ति का मुख्य स्रोत बनी रही।

पढ़ें- EXCLUSIVE: ‘हाथी मेरे साथी’ के निर्माता के हाथों होती थी रोज एक शख्स की पिटाई, काका से था सीधा कनेक्शन
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आनंद
आनंद (1971)
बाबू मोशाय! जिंदगी बड़ी होनी चाहिए, लंबी नहीं। ऐसे ही ढेरों संवादों से भरी यह फिल्म राजेश खन्ना की बेहतरीन फिल्मों में से एक है। फिल्म में राजेश खन्ना का किरदार 'शोमैन' राज कपूर से प्रेरित था, जो इस फिल्म के लेखक और निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी को 'बाबू मोशाय' कहते थे। इस फिल्म के मुख्य किरदारों में से एक अभिताभ बच्चन भी हैं, जिनकी इस फिल्म से पहले तमाम फिल्में फ्लॉप हो चुकी थीं। आनंद ने ही अमिताभ बच्चन को सही मायनों में हिंदी सिनेमा में स्थापित किया।
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दुश्मन - फोटो : file photo
दुश्मन (1971)
देसी शराब पीने वाला और वेश्यालयों में जाने वाला एक मजबूत मर्दाना ट्रक ड्राइवर सुरजीत सिंह। ऐसे किसी किरदार में राजेश खन्ना को सोचना ही उस दौर में मुश्किल लगता था लेकिन किरदारों के साथ प्रयोग करने की राजेश खन्ना की यह पहली सीढ़ी थी। मोटी-मोटी पोशाक पहनकर और मूंछें रखकर राजेश खन्ना ने पूरे देश का दिल जीत लिया।

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अमर प्रेम का पोस्टर - फोटो : अमर उजाला, मुंबई टीम
अमर प्रेम (1972)
अमर प्रेम के फिल्मांकन के दौरान एक दृश्य था जिसमें राजेश खन्ना और शर्मिला टैगोर को हावड़ा ब्रिज के नीचे ले जाने के साथ शूट करने की आवश्यकता थी। अधिकारियों ने इस दृश्य को खारिज कर दिया क्योंकि उन्होंने महसूस किया था कि अगर जनता को पता चला कि उनका पसंदीदा अभिनेता यहां है तो उसकी एक झलक पाने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ेगा और समस्या पैदा हो जाएगी। ऐसा भी हो सकता है कि ज्यादा भगदड़ से पुल गिरने की सम्भावना बढ़ जाए। ये वो दौर था जब तमाम लड़कियों ने राजेश खन्ना की तस्वीरों से शादी की, अपनी उंगलियां काट ली और खून को सिंदूर के रूप में लगाया। किसी अभिनेता के लिए ऐसा उन्माद पहले कभी नहीं देखा गया। बाद में हावड़ा ब्रिज वाला दृश्य मुंबई के एक स्टूडियो में फिल्माया गया।

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बावर्ची - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
बावर्ची (1972)
एक साक्षात्कार के दौरान सुपरस्टार राजेश खन्ना ने कहा, 'फिल्म बावर्ची में मैंने उसका बिल्कुल उल्टा किया जो ऋषि दा ने मुझे फिल्म आनंद में करने को कहा था। उन्होंने मुझे किरदार की व्याख्या करने और अपने तरीके से प्रदर्शन करने की पूरी अनुमति दी। मैंने इससे पहले काफी गंभीर भूमिकाएं की थीं लेकिन बावर्ची ने मुझे ऐसे किरदार की व्याख्या और प्रदर्शन करने का अवसर दिया, जिस तरह से मैं चाहता था इसलिए मैंने उस फिल्म में खुद पर सारे प्रयोग किए।' लगभग सभी फिल्मों में टाइटल क्रेडिट होता है लेकिन इस फिल्म में कोई भी टाइटल क्रेडिट नहीं था। अमिताभ बच्चन की आवाज में हम सिर्फ फिल्म और कलाकारों के नाम सुनते हैं।

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फिल्म अवतार का पोस्टर - फोटो : अमर उजाला, मुंबई टीम
अवतार (1983)
राजेश खन्ना की चरित्र भूमिकाओं वाली फिल्मों में ये फिल्म हिंदी सिनेमा का टर्निंग प्वाइंट मानी जाती है। 1973 के दस साल बाद बॉक्स ऑफिस कलेक्शन के लिहाज से यह राजेश खन्ना की सबसे बड़ी सफल फिल्म रही। राजेश खन्ना को 1983 में इस फिल्म में उनके प्रदर्शन के लिए फिल्म समीक्षकों की संस्था ने सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार मिला। ऐसा इसलिए क्योंकि फिल्मफेयर ने इस फिल्म में अभिनय के लिए उन्हें नामित करने के बावजूद उस साल का फिल्मफेयर बेस्ट एक्टर पुरस्कार फिल्म मासूम के लिए नसीरूद्दीन शाह को दे दिया था।
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अमृत - फोटो : Social Media
अमृत (1986)
लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की जोड़ी के प्यारेलाल ने एक साक्षात्कार में कहा कि "राजेश खन्ना हमारे लिए हम उनके लिए भाग्यशाली भी थे। 1969 की फिल्म दो रास्ते से लेकर 1986 की फिल्म अमृत तक, हमने फिल्मों और संगीत दोनों को हिट किया। जब हम 1984 में अपने पहले विदेशी संगीत कार्यक्रम में गए, तो राजेश खन्ना ने आकर तीन गानों पर डांस किया। वह अपने संगीत को लेकर बहुत सजग थे। अगर वह एक गीत का आकलन नहीं कर पाते थे, तो उस गाने की एक टेप अपने घर ले जाते थे। उसके एक या दो दिन के बाद वह गाने को लेकर अपनी प्रतिक्रिया देते थे। अगर उन्हें ऐसे ही बैठे हुए कोई गाना पसंद आ जाता था तो वह सराहना में जोर से "वाह!" वाह! चिल्लाते थे। यह भगवान का आशीर्वाद ही था कि हमने उनके लिए हिट गीतों की एक बड़ी सीरीज उनको दे पाए। इसमें उनके खुद के निर्माण में बनी फिल्म रोटी, सच्चा झूठा, छैला बाबू, चक्रव्यूह, फिफ्टी फिफ्टी और अमर दीप जैसी फिल्में शामिल हैं। संयोग से, उनकी फिल्म महबूब की मेहंदी में भी हमारी हिस्सेदारी थी।'
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