प्रेम नाम है मेरा, प्रेम चोपड़ा। ये डायलॉग आज उनकी दुनिय़ाभर में पहचान बन चुका है। बॉलीवुड के वो एक मात्र ऐसे इंसान हैं जिन्होंने कपूर खानदार की सभी पीढ़ियों के साथ काम किया है। एक बेहतरीन कलाकार के अलावा एक बेहतरीन इंसान भी हैं।
अब तक तो आप समझ ही गए होंगे बात हो रही है, प्रेम चोपड़ा की। आज उनका जन्मदिन है। इसी मौके पर अमर उजाला लाया हैं, प्रेम चोपड़ा के वो दस मशहूर डायलॉग्स जिन्होंने इस शख्सियत को नई पहचान दी।
आगे की स्लाइड्स में देखें ऐसे ही दस मशहूर डायलॉग्स।
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ये हैं प्रेम चोपड़ा के वो डायलॉग्स, जो उनकी पहचान बन गए
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1- सबसे पहले तो वही डायलॉग्स जिसने उन्हें नाम दिया। ये बोला गया था फिल्म बॉबी में। ''प्रेम नाम है मेरा, प्रेम चोपड़ा''
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2- मैं वो बला हूं, जो शीशे से पत्थर को तोड़ता हूं। फिल्म सौतन का ये डायलॉग आज भी लोगों की जुबान पर है।
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3 - शराफत और ईमानदारी का सर्टिफिकेट ये दुनिया र्सिफ उन्हें देती है जिनके पास दौलत होती है। ये डायलॉग फिल्म 'आग का गोला' में है।
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4 - कैलाश खुद नहीं सोचता दूसरों को मजबूर करता है सोचने के लिए। फिल्म 'कटी पतंग' का ये डायलॉग भी काफी मशहूर हुआ था।
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5- बादशाहों का अंदाजा बहुत कम गलत होता है और जब गलत होता है तो वो बादशाह नहीं रहते। ये डायलॉग है फिल्म 'अलीबाबा चालीस चोर' से।
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6- फिल्म 'खिलाड़ी' के इस डायलॉग ने भी काफी रंग जमाया था। राजनीति की भैंस के लिए दौलत की लाठी की जरूरत होती है।
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7- जिनके घर शीशे के होते हैं वो बत्ती बुझा कर कपड़े बदलते हैं। फिल्म 'सौतन' का ये डायलॉग तो तब से लेकर आज तक जोक्स में शामिल रहा है।
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8- कर भला हो तो भला। फिल्म 'राजा बाबू' का ये डायलॉग अब एक कहावत बन चुका है।
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9- सांप के फन उठाने के पहले उसे कुचलना मैं अच्छी तरह जानता हूं। ये डायलॉग था फिल्म वारिस में।