Prabodh Chandra Dey Birth Anniversary: मन्ना डे के सदाबहार गीतों में ‘ऐ मेरे प्यारे वतन’, ‘जिंदगी कैसी है पहेली’, ‘लागा चुनरी में दाग’ और ‘एक चतुर नार’ आज भी लोगों की जुबान पर हैं। ये गाने न केवल भावनाओं को छूते हैं, बल्कि उनकी गायकी का अनोखा अंदाज हर किसी को मंत्रमुग्ध कर देता है। आज उनकी जयंती पर याद करते हैं उनके गानो से जुड़े दिलचस्प किस्से...
हिंदी सिनेमा के महान गायक मन्ना डे की आवाज आज भी लाखों दिलों में बसी है। उनके गीत न सिर्फ शास्त्रीय संगीत की गहराई लिए हैं, बल्कि हल्के-फुल्के और मजेदार गानों में भी उनकी जादुई छाप दिखती है। मन्ना डे ने अपने करियर में 4000 से ज्यादा गाने गाए, जो हिंदी के साथ-साथ बंगाली, मराठी, मलयालम, गुजराती और कई अन्य भाषाओं में हैं।
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मन्ना डे के गानों के पीछे के दिलचस्प किस्से
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मन्ना डे के गानों के पीछे के दिलचस्प किस्से
प्रबोध चंद्र डे, जिन्हें प्यार से मन्ना दा या मन्ना डे कहते हैं। मन्ना डे हिंदी सिनेमा के उन गायकों में से एक हैं, जिनकी आवाज ने लाखों दिलों को सुकून देती है। उनके कुछ मशहूर गानों के पीछे रोचक कहानियां भी छिपी हैं? आइए, जानते हैं मन्ना डे के कुछ प्रसिद्ध गानों के पीछे दिलचस्प किस्सों को।
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मन्ना डे की गायकी के रफी साहब भी थे दीवाने
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मन्ना डे की गायकी के रफी साहब भी थे दीवाने
मन्ना डे की गायकी के तो मोहम्मद रफी जैसे दिग्गज गायक भी प्रशंसक थे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रफी साहब ने एक बार कहा था, “लोग मेरे गाने सुनते हैं, लेकिन मैं मन्ना डे को सुनता हूं।” मन्ना डे ने हरिवंश राय बच्चन की मशहूर रचना ‘मधुशाला’ को भी अपनी आवाज दी, जो साहित्य और संगीत का अनूठा संगम है।
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"एक चतुर नार" के दौरान हुई किशोर कुमार से टकरार
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"एक चतुर नार" के दौरान हुई किशोर कुमार से टकरार
फिल्म पड़ोसन का गाना "एक चतुर नार बड़ी होशियार" आज भी लोगों को हंसाता और गुनगुनाने पर मजबूर करता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस गाने में मन्ना डे और किशोर कुमार की जुगलबंदी थी, लेकिन रिकॉर्डिंग के दौरान दोनों के बीच थोड़ी खटपट हो गई थी। मन्ना डे, जो शास्त्रीय संगीत के मास्टर थे, चाहते थे कि गाना सही राग और ताल में गाया जाए। वहीं, किशोर कुमार इसे मजेदार और हल्के-फुल्के अंदाज में गाना चाहते थे। निर्माता ने गीतकार राजेंद्र कृष्ण के लिखे शब्दों को जस का तस रखने को कहा, लेकिन मन्ना डे ने साफ मना कर दिया। उन्होंने कहा, "मैं संगीत के साथ मजाक नहीं कर सकता।" आखिरकार, मन्ना डे की बात मानी गई और इस गाने को अपने क्लासिकल अंदाज में गाया।
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"जिंदगी कैसी है पहेली" गाने से जुड़ी है राजेश खन्ना की जिद
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"जिंदगी कैसी है पहेली" गाने से जुड़ी है राजेश खन्ना की जिद
फिल्म आनंद का गाना "जिंदगी कैसी है पहेली हाय" मन्ना डे की आवाज में जिंदगी के फलसफे को बयां करता है, लेकिन इस गाने के पीछे एक मजेदार कहानी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शुरू में यह गाना फिल्म के बैकग्राउंड में बजने वाला था, लेकिन जब सुपरस्टार राजेश खन्ना ने इसे सुना, तो उन्होंने निर्माता से जिद की कि इस गाने को उन पर फिल्माया जाए, जिसके बाद यह गाना राजेश खन्ना पर शूट हुआ। मन्ना डे भी राजेश खन्ना के अभिनय के फैन थे। वे कहते थे, "जब राजेश मेरे गाने पर लिप-सिंक करते हैं, तो लगता है जैसे वे खुद गा रहे हों।"
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"ऐ मेरे प्यारे वतन"
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"ऐ मेरे प्यारे वतन"
फिल्म काबुलीवाला का गाना "ऐ मेरे प्यारे वतन" आज भी देशभक्ति की भावना से भर देता है। इस गाने की रिकॉर्डिंग के दौरान मन्ना डे इतने भावुक हो गए थे कि उनकी आंखों में आंसू आ गए थे। वे कहते थे कि इस गाने के बोल उनके दिल को छू गए।
"केतकी गुलाब जूही"
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्म बसंत बहार का गाना "केतकी गुलाब जूही" गाना मन्ना डे को महान शास्त्रीय गायक पंडित भीमसेन जोशी के साथ गाना था। जब मन्ना डे को यह पता चला, तो वे इतना घबरा गए कि उन्होंने मुंबई छोड़कर पुणे जाने का मन बना लिया। वे सोच रहे थे कि भीमसेन जोशी जैसे दिग्गज के सामने गाना आसान नहीं होगा। लेकिन उनकी पत्नी सुलोचना ने उन्हें समझाया कि वे हीरो के लिए गा रहे हैं। मन्ना डे ने इसे चुनौती के रूप में लिया और गाना रिकॉर्ड किया।