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Javed Akhtar: जावेद अख्तर ने ट्रोल्स को दिया करारा जवाब, बोले- उन्हें अपनी सीमाएं पता होनी चाहिए

Thu, 01 May 2025 08:12 AM IST
मोहम्मद फायक अंसारी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

Javed Akhtar Slams Trolls: जावेद अख्तर ने हाल ही में ट्रोल्स को करारा जवाब दिया। उन्होंने एक बातचीत में कहा कि उन्हें अपनी सीमाएं पता होनी चाहिए।
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जावेद अख्तर - फोटो : पीटीआई
मशहूर लेखक, शायर और स्क्रिप्ट राइटर जावेद अख्तर सोशल मीडिया पर नफरत फैलाने वालों को करारा जवाब देने के लिए जाने जाते हैं। चाहे भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद शमी का 'रोजा' विवाद में समर्थन करना हो, विराट कोहली की तारीफ पर ट्रोल करने वालों को जवाब देना हो या पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा करना हो, जावेद अपनी बेबाक राय एक्स पर खुलकर रखते हैं।
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जावेद अख्तर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
क्या दोस्त देते हैं ट्रोल्स से दूर रहने की सलाह?
लेकिन क्या उनका परिवार या दोस्त उन्हें इन ट्रोल्स से दूर रहने की सलाह देते हैं? इस सवाल पर जावेद ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, "हां, बिल्कुल। मेरे दोस्त कहते हैं, 'इसे छोड़ दो, तुम्हें इसकी जरूरत नहीं। तुम इन सबसे ऊपर हो।" उन्होंने आगे कहा कि मुझे माफ कीजिए लेकिन, मैं ज्यादातर समय खुद को इन ट्रोल्स से ऊपर ही मानता हूं, हालांकि, कभी-कभी आपको नीचे उतरकर उन्हें बताना पड़ता है कि 'नहीं, तुम इतनी छूट नहीं ले सकते। अगर तुमने ऐसा किया तो मैं तुम्हें उसी तरह जवाब दूंगा।
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जावेद अख्तर - फोटो : एक्स
2017 से कर रहे आईपीआरएस का नेतृत्व
80 वर्षीय जावेद अख्तर इंडियन परफॉर्मिंग राइट सोसाइटी (आईपीआरएस) के अध्यक्ष भी हैं। मंगलवार को फिक्की द्वारा आयोजित "आईपी एंड म्यूजिक: फील द बीट ऑफ आईपी" कॉन्फ्रेंस के मौके पर उन्होंने यह बात कही। जावेद अख्तर आईपीआरएस का नेतृत्व 2017 से संभाल रहे हैं। उनका कहना है कि कलाकारों को उनकी मेहनत का उचित हक दिलाने के लिए सरकार का साथ जरूरी है।

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जावेद अख्तर - फोटो : इंस्टाग्राम
सरकार से की ये अपील
उन्होंने कहा, "लाखों लोग हमें पब्लिक परफॉर्मेंस रॉयल्टी नहीं दे रहे। हम लाखों केस कोर्ट में नहीं लड़ सकते, यह संभव नहीं। केवल सरकार ही नियम या उप-नियम बनाकर इसे अनिवार्य कर सकती है।" जावेद ने कहा कि जब भी उन्होंने किसी राजनीतिक दल या मंत्रालय से संपर्क किया तो उन्हें हमेशा सहानुभूति और समर्थन मिला। उन्होंने कहा, "उन्हें भारतीय कलाकारों के लिए सम्मान है। कई बार वे हमारी मदद के लिए अतिरिक्त प्रयास करते हैं। मुझे कोई शिकायत नहीं। अब हमें फिर से सरकार के पास जाकर बताना होगा कि कानून तो शानदार है, लेकिन जमीन पर यह लागू नहीं हो रहा।"
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सलीम खान और जावेद अख्तर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अपनी फिल्मों के लेकर कही ये बात
जावेद अख्तर ने सलीम खान के साथ मिलकर 'शोले' और 'दीवार' जैसी फिल्में लिखीं हैं। इन फिल्मों की आज भी प्रासंगिकता के बारे में पूछे जाने पर जावेद ने कहा, "कुछ अच्छे काम लोगों की यादों में हमेशा रह जाते हैं। ये फिल्मं किसी तरह भारतीय संस्कृति, मानसिकता और आम बोलचाल का हिस्सा बन चुकी हैं, लेकिन इसका कारण क्या है, मैं नहीं जानता। अगर जानता, तो बार-बार ऐसा करता।"  उन्होंने आगे कहा, "50 साल पुरानी फिल्मों के डायलॉग आज भी स्टैंड-अप कॉमेडी, दूसरी फिल्मों और यहां तक कि राजनीतिक भाषणों में इस्तेमाल हो रहे हैं। यह कैसे और क्यों हुआ? इसे समझाना मुश्किल है। इसे आप करिश्मा कह सकते हैं, जिसकी कोई परिभाषा नहीं। यह बस हो जाता है और फिर हम इसके पीछे तर्क ढूंढने की कोशिश करते हैं। लेकिन मुझे लगता है कि यह तर्कों से परे है।"

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