फूलन देवी (फाइल फोटो)
2 साल बाद भी पुलिस फूलन देवी को पकड़ नहीं पाई थी, इस बात का राजनीतिक दबाव सरकार पर पड़ने लगा था। तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार ने फैसला किया कि फूलन देवी के सरेंडर करने पर उन्हें रियायत दी जा सकती है। इस वक्त तक फूलन की तबीयत अक्सर खराब रहने लगी थी और उनके गैंग के कई सदस्यों की मौत हो चुकी थी। 1983 में फूलन देवी सरेंडर करने पर राजी हुईं। उन पर 22 हत्या, 30 डकैती और 18 किडनैपिंग के चार्जेज लगे थे। 11 साल जेल में रहने के बाद 1993 में उन पर लगे सारे केस वापस ले लिए गए थे।